जानिए उन जगहों के बारे में जो मशहूर हैं SILK SAREES के लिए

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Famous Silk Saress
Silk Sarees

Silk Sarees महिलाओं को बहुत पसंद आती हैं. महिलाएं चाहे कितनी ही आधुनिक हो जाए. कुछ ऐसे मौके होते हैं जब सिर्फ Silk Sarees अच्छी लगती है . यही कारण है कि हर त्योहार और समारोह में लड़कियां Silk Sarees को ही प्राथमिकता देती हैं.

आइए जानते हैं भारत के प्रमुख स्थानों के बारे में जहां की Silk Sarees की साड़ियां पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.

Tamil Nadu

Tamil Nadu (दक्षिण भारत) का नाम आए और कोई Kanjivaram Sarees की बात ना करें ऐसा कैसे हो सकता है दक्षिण भारत की कांजीवरम की खूबसूरत तथा भारी-भरकम साड़ियां महिलाओं की खास पसंद है.

शायद इतना पढ़कर आपको बॉलीवुड ऐक्ट्रेस रेखा, जयप्रदा, वैजयंती माला की याद आ जाए. ट्रेडिशनल रिच कलर्स और इंडिया की सबसे ज्यादा मशहूर और महंगी साड़ियों में से हैं. कांजीवरम सिल्क ,तमिलनाडु के एक गांव के नाम पर है .

kanjivaram saree

जहां इस सिल्क को बनाया जाता है. बाकी सिल्क साड़ियों के मुकाबले ये साड़ियां काफी भारी होती हैं, क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाले सिल्वर धागे गोल्ड में डिप होते हैं, वहीं मोटिफ्स मोर और तोते से इंसपायर्ड होते हैं. इस साड़ी का सबसे बेस्ट पार्ट होता है इसका पल्लू, जो अलग से बनाकर बाद में साड़ी से जोड़ा जाता है.

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Varnasi

बनारस की बनारसी साड़ियों का नाम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.रेशम की साड़ियों पर बनारस में बुनाई के संग जरी के डिज़ाइन मिलाकर बुनने से तैयार होने वाली सुंदर रेशमी साड़ी को बनारसी साड़ी कहते हैं.

इसे सुहाग की निशानी भी माना जाता है. मल्टी बनारसी साड़ी, पौड़ी, पौड़ी नक्काशी, कतान अम्बोज, टिपिकल बनारसी जंगला, एंटिक बूटा, जामेवार, कतान प्लेन,कतान फैंसी, तनछुई बनारसी आदि कई वरायटीज़ में ये साड़ियां उपलब्ध हैं.

 

 

 

Paithan, Maharashta

महाराष्ट्र की पैठणी एक खास तरह की साड़ी है. जो नौ गज लंबी होती है. यह पैठण शहर में बनती है. इस साड़ी को बनाने की प्रेरणा अजन्ता की गुफा में की गई चित्रकारी से मिली थी. इसे पहनने का अपना पारंपरिक स्टाइल है, जो महाराष्ट्र की औरतों को ही अच्छी तरह से आता है.

maharashtrian saree
Kora Silk Saree

Madhya Pradesh

Maheshswari Saree

यह साड़ी खासकर मध्य प्रदेश में पहनी जाती है. यह रेशम से  बनाई जाती है. इसका इतिहास काफी पुराना है. होल्कर वंश की महान शासक देवी अहिल्याबाई ने 250 साल पहले गुजरात से लाकर महेश्वर में कुछ बुनकरों को बसाया था और उन्हें घर, व्यापार और अन्य सुविधाएं दी थींं. यही बुनकर महेश्वरी साड़ी तैयार करते थे.

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मध्य प्रदेश की एक और पहचान

Chanderi Silk Saree

विश्व प्रसिद्ध Chanderi Saree आज भी हथकरघे पर ही बुनी जाती हैं. इन साड़ियों का अपना समृद्धशाली इतिहास है. पहले ये साड़ियां केवल राजघराने में ही पहनी जाती थीं, लेकिन अब यह आम लोगों तक भी पहुंच चुकी हैं.

एक चंदेरी साड़ी बनाने में एक बुनकर को साल भर का वक्त लगता है, इसीलिए चंदेरी साड़ियों को बनाते वक्त कारीगर इसे बाहरी नजरों से बचाने के लिए हर मीटर पर काजल का टीका लगाते हैं.

Mysore, Karnataka

मैसूर  की  बात हो और मैसूर सिल्क का नाम नहीं आए यह कैसे हो सकता है? अगर आपको साड़ियों में रिचनेस और ट्रेडिशनल टच चाहिए तो बस एक ही नाम है मैसूर सिल्क. ये साउथ इंडिया की कई मशहूर साड़ियों में गिनी जाती है. ये सिल्क मलबेरी सिल्क से बनता है, जो कर्नाटक में आराम से मिल जाता है.

Telangana 

यहां की नारायणपेट सिल्क  साड़ी अपने अलग तरह के पैटर्न के लिए प्रसिद्ध है. साड़ी में एम्ब्रॉयडरी के साथ चेक्ड सरफेस पैटर्न होते हैं. जो मिलकर बॉर्डर या पल्लू पर बहुत ही खास डिज़ाइन का लुक बनाते हैं.  जैसे किसी मंदिर की आउटलाइन.

इन साड़ियों की शुरुआत तेलंगाना के नारायणपेट जिले से 1630 ईसा पूर्व में हुई थी. साड़ी के बॉर्डर पर छोटे ज़री डिज़ाइन्स से कंट्रास्ट लुक मिलता है . यह ब्राइड्स के लिए स्पेशल साड़ी है.

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