KRISHNA DRESS पहनाने के अलावा अपने बच्चों में पैदा करें कृष्ण के ये 5 गुण

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Krishna Dress
Krishna Dress

जन्माष्टमी पर बाजर में Krishna Dress की धूम है. लोग भगवान कृष्ण के लिए वस्त्र और श्रृंगार की चीजें खरीदने के साथ-साथ अपने बच्चे के लिए Krishna Dress की खरीदारी कर रहे हैं. इस दिन पीले रंग और मोतियों से सजे Krishna Dress में पहने ये छोटे-छोटे बच्चों में कृष्ण का बाल रुप दिखाई देता हैं.




लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चों को केवल Krishna Dress पहनाना ही काफी है क्या? यह सच है कि इस संसार में कोई दूसरा कृष्ण नहीं होगा लेकिन मानवता और यह समाज कृष्ण के कुछ गुण तो अपना ही सकता है जिससे इस समाज को रहने लायक बना जा सके.

Lord Krishna ने जीने का पाठ सिखाया. वे मित्र, मार्गदर्शक, सखा और दार्शनिक सबकुछ थे. उनका पूरा व्यक्तित्व मानवता की सेवा के लिए समर्पित था. कृष्ण शब्द का अर्थ होता है, केंद्र. कृष्ण शब्द का अर्थ होता है, जो आकृष्ट करे, जो आकर्षित करे. कृष्ण एक शिक्षक के भांति है जिनके जीवन से बहुत कुछ सिखा जा सकता है.




कृष्ण के वो 5 गुण जिसे हम अपने बच्चों में विकसित कर सकते हैं

1--मित्रता को सबसे बढ़कर माना

कृष्ण के जीवन में मित्रता का बहुत महत्व रहा. चाहे अर्जुन से उनकी मित्रता रही या सुदामा से. अपने बाल सखाओं (Childhood friends) को वो हमेशा याद करते रहे. सुदामा (Sudama) को वे कभी नहीं भूले.

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एक बार जब उनके दरबार में सुदामा आए तो वे उनसे मिलने के लिए नंगे पांव दौड़ पड़े. उन्होंने सुदामा का साथ दिया. पांडवों का साथ दिया. मित्रता में अर्जुन के सारथी भी बने. अपने मित्रों के लिए उनके मन में Unconditional love था.

अपने दोस्तों, मित्रों के प्रति यह भावना शायद आज कम दिख रही हैं. आज ज्यादतर दोस्ती स्वार्थ और मतलब के नींव पर टिकी है. बच्चों को समझाएं कि अच्छी दोस्ती का महत्व जानें और हमेशा अपने दोस्तों की सहायता करें. सच्ची मित्रता या दोस्ती वहीं है जो हर समय साथ दे.

2-स्त्री का सम्मान करना सिखाया

द्रौपदी पांडवों की पत्नी थी और कृष्ण की बहन और सखा. उनका प्रेम इतना गहरा था कि द्रौपदी का एक नाम कृष्णा था. जब कौरवों की भरी सभा में द्रौपदी का चीरहण होने लगा तो उसने मन की गहराईयों से कृष्ण को पुकारने लगी. कृष्ण आए और द्रौपदी की लाज बचा ली.

कृष्ण से यह सीखा जा सकता है कि कैसे स्त्री का सम्मान बचाया जाता है. आज जब हर तरह महिलाओं के साथ होने वाले दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं ऐसे में मांएं अपने बेटों को यह सिखाएं कि वे हर हाल में औरतों का सम्मान करें. उनकी गरिमा की रक्षा करें.

3-प्रेम का पाठ पढ़ाया

कृष्ण प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं. राधा के साथ उनका प्रेम अक्षुण्ण था. इसलिए कृष्ण से पहले राधा का नाम लिया जाता है. राधा के साथ उनका नाम हमेशा के लिए जुड़ गया. राधा उनका अभिन्न अंग थी.

अलग-अलग धर्म ग्रंथों में राधा और कृष्ण की गोपियों का अलग अलग वर्णन किया गया है. एक जगह इस बात का जिक्र है कि कृष्ण की 64 कलाओं को ही गोपियां माना गया है और राधा उनकी महाशक्ति थी, जिसे स्त्री रुप माना गया है. राधा स्त्रीत्व का प्रतीक थी.

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कृष्ण की पूर्णता राधा के साथ ही मिलकर पूर्ण होती है. Radha Krishna का प्रेम अमर है. कहा जाता है कि राधा कृष्ण में विलीन हो गईं. दोनों ने संसार को प्रेम का पाठ पढ़ाया.

आज के युवाओं में एक-दूसरे के प्रति सच्चे प्रेम की कमी दिखाई देती है. कहीं महज शारीरिक आकर्षण तो कहीं ऐशो-आराम की चमक-दमक पर रिश्तों की नींव रखी जा रही है. ऐसे रिश्तों में पूर्ण समर्पण नहीं होता, जिससे परिवार बिखरता है.

 4-कर्म करने की सीख दी

श्रीकृष्ण ने ‘Dharma Yuddh’ के दौरान Bhagavad Gita में कर्मयोग के जो सिद्धांत दिए, कहा अपना कर्म करो, फल की चिंता मत करो. धैर्य खोए बिना अपने लक्ष्य पर डटे रहो. महाभारत के युद्ध में उन्होंने अर्जुन से कहा-तुम मेरा चिंतन करो, लेकिन अपना कर्म करते रहो.

गीता में लिखा है-बिना कर्म के जीवन बना नहीं रह सकता. कर्म से जो मनुष्य को जो सिद्धि प्राप्त होती हो सकती है वह तो संन्यास से भी नहीं मिल सकती.  जो काम आपके हाथ में इस समय है, यानी वर्तमान कर्म उससे अच्छा कुछ नहीं. उसे पूर्ण करो.

बच्चों को गीता के जरिए यह समझाया जा सकता है वे धैर्यवान और लगनशील बनें. अपना लक्ष्य निर्धारित करें, निष्ठा से अपनी Education पूरी करें. अपनी योग्यता अनुसार  Livelihood का जो भी काम उन्हें मिला है उसमें समर्पण और ईमानदारी दिखाएं.

5-वे हमेशा मुस्कुराते रहे

अपने जन्म से लेकर युवावस्था तक कृष्ण ने कई लीलाएं की और कई मुश्किलों का सामना किया लेकिन मुस्कुराते रहे. कृष्ण की सभी तस्वीरों में उन्हें मुस्कुराते हुए दिखाए गया इसलिए हमारी चेतना में भी वो मुस्कुराते हुए ही नजर आते हैं.

कृष्ण खुश रहने का मंत्र देते हैं. आज के बच्चे और युवा छोटी उम्र से ही तनाव, चिड़चिड़ाहट और अवसाद का शिकार हो रहे हैं. उनमें धैर्य की कमी हो रही है और छोटी-छोटी बातें उन्हें विचलित कर देती हैं. Krishna Dress पहनाने के अलावा बच्चों के अंदर खुश रहने की कला भी विकसित करें.

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