SHAILAJA JAIN- ईरान की महिला कबड्डी टीम क्यों कर रही है इस भारतीय महिला का गुणगान?

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Shailaja Jain
Shailaja Jain coach Iranian Women’s Kabbadi team

Iranian Women’s Kabbadi Team आज अपने कोच Shailaja Jain के गुण गा रही हैं. हो भी क्यों नहीं,  Shailaja Jain उसी ईरानी महिला कबड्डी टीम की Coach है जिसने Asian Games में भारत को हराकर गोल्ड जीत लिया है.




भारतीय महिला कबड्डी टीम को ईरान से 24-27 की हार झेलनी पड़ी. ईरान की इस जीत का श्रेय Shailaja Jain को दिया जा रहा है. शैलजा 18 महीने पहले पहले भारतीय टीम की कोच थीं, लेकिन Kabaddi Federation of India ने उन्हें हटा दिया.

करीब डेढ़ साल पहले उन्होंनें Iran की टीम का जिम्मा संभाला और ईरान को गोल्ड दिला दिया. उन्हें जब ईरान जाने का प्रस्ताव मिला तो उन्होंने इस चुनौती की तरह लिया.




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Shailaja Jain ने मीडिया को बताया कि कबड्डी फेडरेशन ने मुझे हटा दिया था. मुझ पर खुद को बेस्ट कोच साबित करने का दबाव था. मैं ईरान चली गई. एक भारतीय होने के नाते मुझे दुख है कि भारत को गोल्ड नहीं मिला, लेकिन बताौर प्रोफेशनल मैं सिर्फ ईरान की टीम का भला सोचती हूं.

ईरानी महिला कबड्डी टीम को प्राणायाम और योगा सिखाया

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक खुद को Best Coach साबित करने के लिए शैलजा जैन ने ईरानी कबड्डी टीम को कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा दी. उन्हें प्राणायाम और योग करना सिखाया जिससे उन्हें काफी फायदा हुआ.




कबड्डी टीम मैच या अभ्यास से पहले टीम मैट को माथे से लगाती हैं. ऐसा वे सम्मान देने के लिए करती हैं. उन्होंने भी ये आदत अपना ली है. शैलजा भी अब ग्राउंड में जाने से पहले मैट को माथे से लगाती हैं. इसमें कोई धार्मिक नजरिया नहीं है। वे ऐसा सम्मान देने के लिए करती हैं.

दूसरी संस्कृति में ढलना भी थी एक चुनौती

ईरान जाने का फैसला करना शैलजा के लिए उतना आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने खुद को इसके लिए तैयार किया. वे  जब पहली बार Tehran की फ्लाइट में बैंठी तो वहां के Dressing laws और महिलाओं के प्रति व्यवहार को लेकर टेंशन में थीं  लेकिन वहां जाने पर महसूस हुआ कि बहुत सारी Misconceptions हैं.

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उन्हें ईरान में थोड़ा Restrictions महसूस हुआ लेकिन लगा कि बहुत सारी बातें खराब नहीं है. उन्हें कभी  Head-scarf पहनने के लिए दबाव नहीं डाला गया, लेकिन वहां के कुछ नियम थे इसलिए मैं सिर पर ओढ़नी रख लिया करती थी.

शुद्ध रुप से शाकाहारी थीं इसलिए खान-पान संबंधी कई परेशानियां हुईं. भाषा संबंधी दिक्कतें दूर करने के लिए उन्होंने फारसी भी सीख ली. अब वे कहती हैं मेरी इन बातों में किसी की दिलचस्पी नहीं होगी क्योंकि अब मैं एक Successful Coach हूं.

 

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