PRACHI KAUSHIK- कैसे बनीं देश की पहली PAD WOMAN

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डॉ कायनात क़ाज़ी:

ट्रैवलर, फोटोग्राफर, ब्लॉगर:

हरियाणा की युवा लड़की  Prachi Kaushik देश की पहली ‘Pad Woman’ कैसे बनी यह कहानी भी बड़ी रोचक है. जिस राज्य में महिलाओं की स्थिति बहुत खराब है वहां मासिक धर्म पर बोलना और जागरूकता लाना किसी क्रांति से कम नहीं था.




पर Prachi Kaushik  ने इसे सच कर दिखाया. वह ‘व्योमिनी’ नामक सामाजिक संस्था से जुड़ी हैं जो कि भारत के 10 राज्यों में सेनेटरी पैड उत्पादन, मार्केटिंग के माध्यम से 2 लाख से अधिक महिलाओ को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में रोज़गार उपलब्ध करवा रही है.




आज Prachi Kaushik को उनके काम के लिए कई अवार्ड भी मिल चुके हैं. प्राची को ‘100 वीमेन फेसेस ऑफ इंडिया’ में स्थान दिया गया. पी एम युवा प्रोग्राम फॉर यंग एंटरप्रेनर मेंटर के ख़िताब से नवाज़ा गया.

फ़िलहाल प्राची मनवाधिकारों से जुड़े सरोकारों के लिए जेलों में काम कर रही हैं. वह देश भर में घूमते हुए लड़कियों और महिलाओं के बीच स्वास्थय सम्बन्धी जागरूकता कार्यक्रम चला रही हैं.




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Prachi Kaushik के अथक प्रयासों का ही नतीजा है कि हाल ही में हरियाणा सरकार ने पहल की है जिसके अंतर्गत जरूरतमंद और आर्थिक अभावों का सामना करने वाली बेटियों और महिलाओं को सस्ती दरों पर पैड उपलब्ध करवाए जाएंगे जिसके लिए स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर पैड वेंडिंग मशीनें लगवाई जाएंगी.

डॉ कायनात क़ाज़ी
डॉ कायनात क़ाज़ी

उनकी इस मुहिम ने ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को न सिर्फ अपने स्वस्थ के प्रति जागरूक किया है बल्कि उन्हें रोज़गार देकर आत्मनिर्भर भी बनाया है. ‘Real Heroes Super Women’ की कड़ी में उन्हीं से सुनते हैं उनकी इस यात्रा के बारे में.

अपने बारे में कुछ बताएं?

मैं हरियाणा से हूं.  परिवार के कमजोर आर्थिक हालात के कारण 16 साल की आयु से मैंने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए ट्यूशन पढ़ाना शुरु कर दिया था.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजधानी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक किया उसके बाद एक NGO मैं नौकरी शुरू की साथ-साथ आगे की शिक्षा भी जारी रखी.

शिक्षा हासिल करने के दौरान लगा कि महिलाओ का आर्थिक सशक्तिकरण कितना ज़रूरी है और इसके कारण महिलाओं के विकास पर कितना प्रभाव पड़ता है. इसलिए मैंने यह निर्णय लिया कि भविष्य में जो भी करुंगी वह ऐसा होगा जिससे महिलाओं का सशक्तिकरण होगा.

प्राची कौशिक से  पैड  वूमेन बनने की अपनी यात्रा के उतार चढ़ावों के बारे में कुछ बताएं?

ये सफर बिलकुल आसान नहीं था. हर एक इंसान को अपना सपना पूरा करने में कुछ परेशानिया और संघर्ष का सामना

तो करना ही पड़ता हैं. मुझे भी कई दिक्कतें आईं.सबसे बड़ी दिक्कत थी घरवालो को राज़ी करने की.

मेरे घरवाले भी चाहते थे की मैं शादी कर के ‘सेटल’ हो जाऊ एक रेगुलर जॉब के साथ. लेकिन मुझे तो खुले असमान मैं उड़ना था जहा मैं ज़िन्दगी अपनी शर्तो पर जी सकूं. अपने देश के आर्थिक विकास के किए कुछ कर सकूं और महिलाओं को विकास के अवसर उपलब्ध करा सकूं.

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महिलाओं से जुड़े मुद्दों को शुरू से ही नज़रंदाज़ किया जाता रहा है. जैसे कि मैं उदाहरण से बताऊ कंडोम डिस्पेंसर वेंडिंग मशीन आपको कई जगह मिल जाएगी, कंडोम की कीमत भी काफी सस्ती रखी गयी है.

लेकिन वही अगर हम महिला स्वास्थ्य की बात करे तो सेनेटरी पैड की उपलब्धता, उसकी कीमत, उसकी गुणवता इन सब विषयों पर इतना ध्यान नही दिया जाता. जिसके कारण न जाने कितनी ही महिलाएं विकास की दौड़ मैं पीछे रह जाती है.

मैंने यह देखा कैसे एक कम कीमत का सेनेटरी पैड जो बिलकुल ही मूलभूत आवश्यकता है, महिलाओ तक नहीं पहुंचता और जो बिकता है वह कितना सुरक्षित है यह भी एक सवाल है.

Pad Man फिल्म के कारण इस मुद्दे को हवा तो काफी मिली लेकिन उन महिलाओ को जो दूर दराज़ गांव मैं रहती है या जो इस मुद्दे पर काम करती है उनको तो कोई क्रेडिट नहीं मिलता और Manufacturing के लिए समर्थन भी कम ही मिलता है.

मैंने जब यह सब काम शुरू किये तो मुझे फाइनेंस को लेकर काफी दिक्क़ते हुईं. मुझे यही समझाने मैं काफी समय लग गया कि यह एक जरुरी मुद्दा है जिस पर चर्चा होनी चाहिए, जिसपर काम होना चाहिए.

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मैंने अकेले ही गांव गांव जाकर जागरूकता अभियान आरंभ कर दिया. पंचायतों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करना काफी मुश्किल था, क्योंकि अधिकतर सत्ताधारी पुरुष ही होते है और गांव मैं जाकर इस मुद्दे पर एक महिला होकर बोलना आसान नहीं था.

मुझे कई तरह की दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा. जैसे बिना साधनों के प्रोग्राम चलाना, महिलाओ को एकत्रित कर समूह बनाना, प्रशासन को साथ लेना आदि. लेकिन अब हमने इस काम से 5 लाख महिलाओं तक सुविधाएं और रोज़गार के साधन उपलब्ध करवाए हैं.

5000 आंगनवाड़ी वर्कर्स को ट्रेनर्स बनाया, 1000 अवेयरनेस वर्कशॉप आयोजित की, 5000 महिलाओं को रोज़गार दिया.

उस लम्हे के बारे में बताएं जब आपको लगा कि यह मेरे जीवन का टर्निंग पॉइंट है.

मैंने जब सभी संघर्षो के बाद अपने आप को आर्थिक रूप से सशक्त बना लिया और अच्छी नौकरी हासिल कर ली तब मुझे लगा कि मेरे जीवन का लक्ष्य मात्र अपने आप को आत्मनिर्भर बनाना नहीं था बल्कि समस्त समाज जो अभाव से ग्रसित है उसके लिये साधनों को जुटाने मैं मदद करना था.

अच्छी खासी नौकरी को छोड़कर Social Entrepreneur बनना एक लाइफ मैं बड़ा टर्निंग पॉइंट था मेरे लिए. आप समझ सकती है कि एक तो आर्थिक तंगी उसमे जॉब छोड़कर Business Woman बनने का सपना सजोना आसान नही था.

इसी प्रकल्प को साथ लेकर मैंने महिलाओ के आर्थिक सशक्तिकरण कारण के लिए मुहीम छेड़ दी जैसे की:——-

1- आर्थिक भागीदारी प्रोग्राम-(Financial Inclusion) Bank Account Opening, Credit and Bank linkages, Signature learning

2- स्वयं सहायता समूह का गठन- छोटी-छोटी बचत करने के साधन, महिला अधिकारों की जानकारी देना, local मुद्दों मैं महिलाओ की भागीदारी सुनिश्चित करना आदि.

3- कौशल विकास – महिलाओं के हुनर को रोज़गार के अवसर से जोड़ना, देश मैं महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का क्या योगदान है इसकी जानकारी देना.

4.  माहवारी स्वास्थ एवम सुरक्षा सुनिश्चित करना  सभी महिलाओ को कम दरों पर सेनेटरी पैड उपलब्ध करवाना, दूर दराज़ गांव, पिछड़े इलाकों तक जाकर जागरूकता अभियान चलाना.

5- रोज़गार के अवसर – भारत के 10 राज्यों मैं ‘व्योमिनी संस्था’ सेनेटरी पैड Manufacturing, मार्केटिंग के माध्यम से 2 लाख से अधिक महिलाओ को direct or indirect रोज़गार उपलब्ध करवा रही है.

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आप एक आम महिला को क्या सन्देश देना चाहेंगी?

मैं यही कहना चाहूंगी की सभी महिलाओं को आसमान की उड़ानों को भरने के लिए छोटे-छोटे कदम पहले उठाने पड़ते है. संघर्ष तो सर्जन का आधार है.

महिलाओं को ये बात पूरी तरह अपने दिमाग से निकल देनी चाहिए की वो किसी से कम है. किसी भी परिस्थिति मैं आत्म विश्वास को डगमगाने न दे हालात से समझोता न करे.

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