KERALA FLOOD का सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की मांग से क्या संबंध?

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क्या Kerala Flood का Sabrimala Temple में महिलाओं की प्रवेश की मांग से कोई संबंध है? Kerala Flood से वहां के लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हो गया है और अब तक 350 से अधिक लोग अपनी जानें गवा चुके हैं.

Kerala में भयंकर बाढ़ आई है. कहा जा रहा है कि केरल सदी की सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है. तीन लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गई हैं. Kerala Flood के कारण  14 में से 11 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है.  केंद्र ने  500 करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया. इसके अलावा कई राज्‍यों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं.

लेकिन ऐसे मौके पर कुछ लोग व्यहारिकता को छोड़कर ऐसी प्राकृतिक आपदाओं को न जाने किन-किन चीजों से जोड़ने लगते हैं. एक तरफ Social Media पर कुछ लोग  Kerala Flood के लिए मदद का हाथ बढ़ाने की अपील कर रहे हैं तो दूसरी तरफ इस बाढ़ को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के Entry की Demand को बताया जा रहा है.

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सोशल मीडिया पर एक बहस चल रही है कि Kerala Flood का संबंध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश देने की मांग से जुड़ा है क्योंकि इससे Bhagwan Ayappan नाराज हो गए हैं. दरअसल केरल के Sabarimala Temple में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक है और इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है.

Reserve Bank of India (RBI) के Central board के Non-official Director नियुक्त हुए  Swaminathan Gurumurthy ने Kerala Flood को इसी बात से जोड़ते हुए Tweet किया है.

उन्होंने कहा है.  सुप्रीम कोर्ट के जज इस बात को देख सकते हैं इस मामले (मंदिर में प्रवेश की मांग) और सबरीमाला में कोई कनेक्‍शन है क्‍या. यदि लाख में से एक बार भी ऐसा हो सकता है तो लोग नहीं चाहेंगे कि केस अयप्‍पन के खिलाफ हो.

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उनके इस Tweet पर लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी है. हरि प्रभाकरण नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘कोई कानून भगवान से बड़ा नहीं होता है… यदि आप सभी को अनुमति देंगे तो वह सबको मना कर देगा.’

वहीं एक दूसरे यूजर ने लिखा है कि कि इस मामले को किसी धार्मिक मामले से मत जोड़िए. सुधीर श्रीनाथ नाम के यूजर के लिखा, ‘सर, आपको ऐसी बातें करते हुए शर्म नहीं आ रही क्‍या? लोग मर रहे हैं, बेघर होकर भटक रहे हैं और आप भारतीराजा फिल्‍म के गांववाले की तरह बात कर रहे हैं.

बाद में गुरुमूर्ति ने फिर Tweet किया, ‘मैंने यह कहा- यदि इस मामले और बारिश में हल्‍का सा भी कनेक्‍शन हो सकता है तो लोग- फिर से कहता हूं लोग- नहीं चाहेंगे कि फैसला अयप्‍पन के खिलाफ जाए. यदि लोगों की मान्‍यता के बारे में है. आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं अयप्‍पा का भक्‍त नहीं हूं और सबरीमाला भी नहीं जाता.

उन्‍होंने आगे लिखा, ‘भारतीय बुद्धिजीवियों के दोगलेपन को देखकर हैरान हूं जो लोगों की आस्‍था को खारिज कर देते हैं. 99 फीसदी भारतीय भगवान में विश्‍वास करते हैं. उदारवादी, धर्मनिरपेक्ष, बुद्धिजीवी को मिलाकर 100 फीसदी लोग ज्‍योतिष को मानते हैं. नास्तिक करुणानिधि के समर्थकों ने भी उनके लिए प्रार्थना की थी. मैं उन लोगों में से हूं जो ज्‍योतिष के बजाय भगवान को मानते हैं.’

Sabarimala Temple में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में टिप्पणी की थी कि यह मंदिर  एक सार्वजनिक संपत्ति है और यदि इसमें किसी पुरुष को जाने की इजाजत है तो महिलाओं को भी है. जो स्थान सार्वजनिक है वहां किसी को भी जाने से नहीं रोका जा सकता. मंदिर है तो उसमें कोई भी जा सकता.

चीफ जस्टिस ने कहा है कि संविधान में पुरुषों और महिलाओं में बराबरी की बात लिखी गई है. लिहाजा किसी को मंदिर में प्रवेश करने से रोकना Constitutional Mandate के खिलाफ है.