शादी की पहली रात सफेद तौलिए पर दिया मैंने VIRGINITY TEST

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Virginity test
मानसी चड्ढा

मानसी चड्ढा:

मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ी-लिखी लड़की हूं. मैंने जर्मन भाषा में बीए और एमए इस यूनिवर्सिटी से किया है. अभी मैं जर्मन भाषा में फेमिनिज्म पर सिनाप्सिस लिख रही हूं. मुझे अपनी यूनिवर्सिटी से जर्मन फिलॉस्पी को पढ़ने के लिए बर्लिन और हेडलबर्ग यूनिवर्सिटी के लिए स्कॉलरशीप भी मिली है, लेकिन जब मेरी शादी होती है कि तो मेरी पढ़ाई-लिखाई की कोई कीमत नहीं रह जाती है और मुझे केवल एक औरत होने के तौर पर देखा जाता है. शादी हुई तो सुहागरात को सफेद तौलिए पर मुझे अपनी Virginity test देना पड़ा.




आप सबको मेरी कहानी बताने का मकसद ही यही है कि आप जान सकें कि एक उच्च शिक्षित लड़की के साथ भी शादी के बाद क्या-क्या हो सकता है? लड़कियां मां-बाप की खुशी और समाज के डर से चुप रह जाती हैं, लेकिन मैंने चुप रहना ठीक नहीं समझा.

मेरी शादी 17 फरवरी 2016 में हुई. पहली रात को ही मेरी सास ने मुझे एक सफेद तौलिया दिया ताकि मैं साबित कर सकूं कि मैं वर्जिन हूं. एक आधुनिक ख्यालों की होने और उच्च शिक्षित होने के कारण मेरे लिए उनका यह व्यवहार हैरान करने वाला था. क्या सिर्फ औरत का वर्जिन होना जरुरी है मर्द का नहीं?   जब हम हनीमून पर निकल रहे थे तो मेरी सास ने मुझे फिर एक सफेद तौलिया देते हुए यह आदेश दिया कि सेक्स के बाद वे इस तौलिए को उन्हें वापस कर दें.




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हनीमून से जब लौट कर आई तो मेरे हाथ में 2हजार रुपए रख दिए गए  कहा कि यदि मुझे सैनटरी नैपकिन खरीदना हो या फोन रिचार्ज करना हो तो केवल वे ही मेरे अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करेगी. यह सब देखकर मैं शॉक्ड थी.   मैंने अपने पति से सवाल किया-क्या यही शादी है? वे कुछ नहीं बोले.   




मेरी मानसिक प्रताड़ना का दौर शुरु हो गया था. मेरे सास-ससुर का न केवल मेरे प्रति व्यवहार खराब था बल्कि सेक्सुअल एब्यूज भी होने लगा. मेरे पति को कहा जाने लगा कि वो सेक्स के दौरान कंडोम न इस्तेमाल करे. मेरी सास मेरी पैंटी चेक करके देखती कि मेरा पीरियड हुआ है या नहीं? कुल मिलाकर हमारा सेक्स भी उनके निर्देश पर हो रहा था.

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सास ने मुझे गुरु राम रहीम के नाम पर जाप करने को कहा. मैंने ऐसा करने से मना कर दिया. इस बीच मैंने गुरुग्राम के एक स्कूल में जर्मन पढ़ाना शुरु कर दिया. 18 मई 2016 को मेरे पति ने मुझसे मेरी पूरी सैलरी मांगी और अपने घरवालों के सामने मुझ पर हाथ उठाया. वे मुझे जल्दी से जल्दी बच्चा पैदा करने की जिद कर रहे थे. अब तक मैं डिप्रेशन में जाने लगी थी.  मैं अपने मां-बाप के पास रहने आ गई.

10 दिनों के बाद मेरे पति आए और कहा कि उन्हें लगता है कि मेरे माता-पिता ने मुझे जीबी रोड पर बेच दिया है. अब तक मैं पूरी तरह टूट गई. अपनी नौकरी पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पा रही थी तो मुझे जॉब छोड़नी पड़ी. मैंने वूमन सेल में अपना केस रजिस्टर कराया इस उम्मीद में कि मुझे न्याय मिलेगा, लेकिन मैं नहीं भूलती हूं कि वहां पहुंचने पर पुलिसवाले मुझे कैसे देखते और हंसते थे. वूमन सेल में मेरे पति ने अपने बयान में कहा कि-ये तो अपने भाई के घऱ में रह रही है, मुझे क्या पता कि वो रात में इसे क्या देता है जो मैं नहीं दे पाया?

तीन-चार सुनवाई के बाद मेरा केस मेडिएशन सेंटर को भेज दिया गया. मैंने अपने सास-ससुर से अपनी किताबें मांगी लेकिन उन्होंने मना कर दिया. मैं कई वकीलों से मिली लेकिन तलाक दिलाने के लिए वे ढ़ाई लाख रुपए का पैकेज बताते. मेरे पास इतना पैसा नहीं था. अब मैंने अपने केस के लिए खुद लड़ाई शुरु की. आरटीआई लगाने का तरीका जाना, एसीपी-डीसीपी से मिली और अपने ससुराल वालों के खिलाफ एफआईआर कराने की मांग की. आखिरकार 24 फरवरी 2017 को एफआईआर हुआ लेकिन अभी जांच की प्रकिया चल रही है.

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अपनी शादी में और क्राइम अगेंस्ट वूमन सेल में हुए अपने खराब अनुभव ने मुझे बहुत डरा दिया. मैंने महसूस किया कि वूमेन सेल में मोटिवेट करने के बजाए केवल औरतों को सलाह दी जाती है. बेशक वहां के लोग अनुभवी होते हैं लेकिन प्रशिक्षित नहीं होते. एक पुलिसवाले ने मुझसे कहा कि ‘बेटा कहां जाओगी, अभी बच्ची हो, जिंदगी नहीं देखी तुमने. एक बच्चा हो जाएगा तो ये लड़का खुद संभल जाएगा’.

डिप्रेशन के दौरान मैंने आत्महत्या करने के बारे में सोच रही थी लेकिन मैंने ‘मनोबल स्टडी’ ज्वाइन किया. यहां मुझे एम्स से रिटार्यड साइकोथेरेपिस्ट डॉ शकुंतला दुबे मिलीं. वे मुझे जीने का हौसला और संबल देने लगी थीं. अब मैं अपने जीवन से खुश हूं. बेशक मेरा केस अभी चल रहा है लेकिन अब मुझे पता है कि मुझे क्या करना है? आपको अपनी कहानी बताने का मेरा मकसद यही थी कि आप भी जान सकें कि मैं किस दौर से गुजरी हूं.

(यह एक सच्ची कहानी है..)

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