आखिर HOUSEWIVES को कुछ समझा क्यों नहीं जाता है?

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Daily chores of housewives have always been ignored
Daily chores of housewives have always been ignored(Representational Image)

क्या Housewives होना तुच्छता की निशानी है? अक्सर Housewives  की योग्यता का सही मूल्यांकन नहीं होता और उसे नजरअंदाज किया जाता है. क्या हमने कभी इस बात पर गौर किया कि ज्यादतर भारतीय घरों में Housewives को कुछ भी नहीं समझा जाता ?




सीधे तौर पर इसका मुख्य कारण है  जो समझ में आता है वह है Housewives का अर्थाजन न करना अथवा पैसे न कमाना. Housewives  24 घंटे घर के कामों और परिवार की जिम्मेदारियो को निभाने में ही खुद को झोंके रखती है लेकिन उसके कार्य का कोई मूल्यांकन नहीं होता और न ही उसे अहमियत दी जाती है.

24 घंटे Without Salary की नौकरी

जहां पुरुषों के काम करने या उनकी नौकरी को काफी अहमियत दी जाती है वहीं गृहिणियों के काम का कोई मूल्यांकन नहीं होता. न तो उन्हें यथोचित सम्मान मिलता है और न ही उनके काम को कोई अहमियत दी जाती है.




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वे 24 घंटे खुद को घर के कामों में उलझाए रखती हैं बावजूद उन्हें यह सुनने को मिलता है कि “क्या करती हो दिन भर?” या “तुम क्या जानो बाहर जाकर नौकरी करना कितना मुश्किल काम है” जैसे वाक्य कई बार सुनने को मिलते  होंगे.

जबकि कायदे से देखें तो Housewives एक Home Maker की भूमिका में होती है और घर का सारा प्रबंधन संभालती है. गृहिणियों के Daily Chores को इस तरह देखिए..

वे बच्चों को संभालनती है, उन्हें पढ़ाती-लिखाती हैं, बुजर्गों का ख्याल रखती हैं, घर की साफ-सफाई और खाना बनाने का पूरा प्रबंध करती हैं, बीमार होने पर 24 घंटे सेवा करती है.




बावजूद इसके उसके काम को Unproductive माना जाता है. बल्कि अब तो कई जगह मैंने यह सुना है कि जो महिलाएं नौकरी या कोई काम नहीं करती वे Old-fashioned है और समाज पर  Economic burden की तरह हैं.

अपने घरों में आने वाली Maid के काम का मूल्यांकन तो किया जाता है और उसे हरेक काम के अलग-अलग मेहनताना भी दिया जाता है लेकिन यदि वही काम घर की महिला करती हैं तो उसे उसका कर्तव्य मानते हैं और उसे कोई अहमियत नहीं दिया जाती.

Senior Counselor Dr. Neelam Saxsena कहती हैं दरअसल यह सदियों से बनी हमारी मानसिकता के कारण Housewives के काम को कोई तवज्जो नहीं मिलती. इसे महिलाओं का धर्म माना जाता है, जबकि काम चाहे बाहर का हो या घर का उसे करने वाले को पूरे सम्मान की जरुरत होती है.

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क्या केवल बाहर नौकरी करके धनोपार्जन करने वाली महिलाएं ही समाज के विकास में अपना योगदान देती है? नहीं, बल्कि घर में एक अच्छा वातावरण तैयार करके अपने घर के लोगों को खुशहाल रखने वाली Housewives भी समाज के लिए ही काम कर रही हैं.

घर का जो भी सदस्य घर से बाहर जाकर इत्मीनान से काम कर पाता है तो उसके पीछे महिलाओं का ही हाथ हो जो अपने बेहतर प्रबंधन और कौशल का हुनर दिखाकर घर के सभी सदस्यों की सभी जरुरतों का ख्याल रखती हैं.

उनके अथक परिश्रम और बदले में कुछ न पाने की चाहत की बदौलत ही पति और बच्चे शोहरत और बुलंदियों को छूते हैं. हम उन्हें उचित सम्मान तो दे ही सकते हैं.

 

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