इस व्रत में पानी तक क्यों वर्जित है?

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हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी व्रत का बहुत महत्व है. साल में 24 एकादशी होती है. एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं. इस व्रत में भोजन करना और पानी पीना वर्जित माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि  निर्जला एकादशी के व्रत से व्यक्ति को पूरे साल की 23 एकादशियों के पुण्य जितने फल की प्राप्ति होती है. यानी अगर आप साल की इन चौबीस एकादशी को नहीं कर पाते है तो  निर्जला एकादशी का एक व्रत करके ही आपको उन चौबीस एकादशी का पुण्य कमा सकते हैं. यह एकादशी दशहरा के एक दिन बाद आती हैं, लेकिन कभी-कभी गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी दोनों एक साथ पड़ती हैं. इस निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी या भीमसेन एकादशी के नाम से जाना जाता हैं .

इस व्रत को करने से भगवान विष्‍णु की कृपा होती है. एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्‍णु का ध्यान लगाकर व्रत का संकल्प लें और मंदिर जाएं. भगवान विष्‍णु की आराधना और पूजा अर्चना करें. एकादशी पर दान दक्षिणा करना ना भूलें. उपवास अगले दिन सुबह स्नान करके पूजा करने के बाद खोलें. माना जाता है कि इस व्रत से व्यक्ति दीर्घायु होता है और मोक्ष मिलता है.

निर्जला एकादशी व्रत कथा

एक बार पाण्डु पुत्र भीमसेन ने श्री वेदव्यासजी से पूछा,” हे परमपूजनीय विद्वान पितामह! मेरे परिवार के सभी लोग एकादशी व्रत करते हैं व मुझे भी करने के लिए कहते हैं, किन्तु मुझसे भूखा नहीं रहा जाता. आप कृपा करके मुझे बताएं कि उपवास किए बिना एकादशी का फल कैसे मिल सकता है? श्री वेदव्यासजी बोले, “पुत्र भीम! यदि आपको स्वर्ग बड़ा प्रिय लगता है, वहां जाने की इच्छा है और नरक से डर लगता है तो हर महीने की दोनों एकादशी को व्रत करना ही होगा.”

भीम सेन ने जब ये कहा कि यह उनसे नहीं हो पाएगा तो श्री वेदव्यास जी बोले,”ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को व्रत करना, उसे निर्जला एकादशी कहते हैं. उस दिन अन्न तो क्या, पानी भी नहीं पीना. एकादशी के अगले दिन प्रातः काल स्नान करके, स्वर्ण व जल दान करना. वह करके व्रत खोलने का समय है. ब्राह्मणों व परिवार के साथ अन्नादि ग्रहण करके अपने व्रत को विश्राम देना. जो एकादशी तिथि के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक बिना पानी पीए रहता है तथा पूरी विधि से निर्जला व्रत का पालन करता है, उसे साल में जितनी एकादशियां आती हैं, उन सब एकादशियों का फल इस एक एकादशी का व्रत करने से सहज ही मिल जाता है.”

यह सुनकर भीम उस दिन से इस निर्जला एकादशी के व्रत का पालन करने लगे और वे पापमुक्त हो गए.