SOCIAL MEDIA के कारण क्यों असुरक्षित महसूस कर रही हैं महिलाएं?

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Social Media पर छोटी-छोटी बात पर किसी को ट्रोल कर देना आम बात होती जा रही है. खासतौर से बहुत सी महिलाओं को ऑनलाइन मंच पर अपनी राय रखने पर घृणित संदेशों का सामना करना पड़ रहा है. सोशल मीडिया पर 75 फीसदी महिलाएं हिंसा की शिकार हो रही हैं.




दुनियाभर में कानूनी प्रावधान होने के बावजूद Virtual World में यह हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हाल में डेनमार्क, इटली, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका में 4000 महिलाओं के बीच सर्वे किया.

सर्वे में यह बात सामने आई कि सोशल मीडिया मंच पर महिलाओं को अपनी राय रखने पर घृणित संदेश झेलने की तस्वीर सामने आई है. सर्वे में 41 फीसदी महिलाओं ने खुद को सोशल मीडिया पर असुरक्षित महसूस किया.




जान न पहचान…..

हैरानी की बात है कि सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने वाली महिलाओं को हिंसा का शिकार वैसे लोग बनाते हैं जो उन्हें जानते ही नहीं. सर्वे में 59 फीसदी महिलाओं ने कहा कि ट्रोलर्स ऐसे हैं जिनसे कोई पहचान नहीं है. 26 फीसदी महिलाओं ने कहा कि उनकी पहचान बिना उनकी मर्जी और इजाजत के उजागर कर दी गई.




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63 फीसदी महिलाएं ऑनलाइन हिंसा के कारण अनिंद्रा की शिकार हो गई.  24 फीसदी महिलाओं को अपने परिवार पर खतरा महसूस हुआ. घृणित संदेशों में यौन हिंसा और धार्मिक कट्टरता फैलाने वाले संदेश शामिल थे.

मानसिकता पर बेहद खतरनाक प्रभाव

सर्वे में 61 फीसदी महिलाओं ने माना कि सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद उनके आत्मविश्वास में कमी आई. वहीं 55 फीसदी महिलाओं ने कहा कि ऑनलाइन हिंसा का शिकार होने के बाद उन्हें अत्यधिक तनाव की स्थिति से गुजरना पड़ा.

भारत में भी स्थिति चिंताजनक

भारत में भी 73 फीसदी महिलाएं हर साल साइबर अपराध से प्रभावित होती है. 2016 में 12हजार साइबर अपराध से संबंधित मामले दर्ज किए गए.  2016 में 58 फीसदी महिलाएं ऑनलाइन हिंसा का शिकार हुई.

61फीसदी महिलाओं को घृणित संदेशों का सामना करना पड़ा. घृणित संदेशों के चलते 28 फीसदी महिलाओं ने सोशल मीडिया पर उपस्थिति कम की. 39 फीसदी महिलाओं को उनके व परिवार पर हमला करने की धमकी मिली. 30फीसदी महिलाएं ही इसके खिलाफ शिकायत कर पाईं.

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सोशल मीडिया मंच ले जिम्मेदारी

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यक्रम निदेशक अस्मिता बासु का कहना है कि जो महिलाएं ऑनलाइन मंच पर अपने विचार रखती हैं उन्हें अक्सर घृणित संदेशों का सामना करना पड़ता है. उनके पास ऐसे लोगों को ब्लॉक करने या चुप रहने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं रह जाता. सोशल मीडिया मंच को इस तरह की हिंसा से निबटने की जिम्मेदारी लेने चाहिए.

एननेस्टी इंटरनेशनल ने सोशल मीडिया पर बढ़ती ऑनलाइन हिंसा के खिलाफ #ToxicTwitter मुहिम शुरु की है. संस्था ने इस दौरान ट्विटर पर घृणित संदेश झेलने वाली महिलाओं के इंटरव्यू को शामिल किया है. दावा है कि ट्विटर महिलाओं को सुरक्षा देने में असफल रहा है.

हालांकि ट्विटर का कहना है कि महिलाओं को सुरक्षित मंच मुहैया कराने की प्रतिबद्धता के कारण पिछले 16 महीने में 30 बदलाव किए हैं.

(साभार-हिन्दुस्तान)

 

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