हां, उनमें है अपने RIGHTS के लिए बोलने और ग़लत का विरोध करने का साहस

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Rights
प्रतिभा ज्योति

संयोगिता कंठ:

दिल्ली यूनिवर्सिटी के विवेकानंद कॉलेज  की लड़कियों से जब जोरदार आवाज से जब यह बात कही कि हां उनमें अपने Rights के लिए बोलने और ग़लत बात के विरोध करने का साहस है तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा. कॉलेज की छात्राओं ने कहा कि वे चाहती हैं कि उन्हें भी लड़कों के समान जिंदगी में तरक्की का मौका मिले.




Rightsमौका था Womeniaworld.com और Non-Collegiate Women’s Education Board, University Of Delhi के संयुक्त सहयोग से Women Empowerment विषय पर हुए चर्चा का.

चर्चा को संबोधित किया वुमनिया की संपादक और ‘एसिड वाली लड़की’ लेखिका प्रतिभा ज्योति ने. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बोर्ड की डाइरेक्टर डॉ अंजू गुप्ता थीं. कार्यक्रम की शुरुआत विवेकानंद महिला कॉलेज में नॉन कॉलेजिएट सेंटर की इंचार्ज योजना जी ने अतिथियों के स्वागत से किया.




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Women Empowerment पर हुए चर्चा में प्रतिभा ज्योति ने कहा कि महिला सशक्तीकरण वह है जिसमें न केवल महिलाओं को गरिमा के साथ जिंदगी जीने का अधिकार हासिल हो बल्कि शिक्षा, स्वास्थय, रोजगार में भी समान अवसर मिले.




उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल नौकरी हासिल करना या आर्थिक स्वतंत्रता पा लेना भर नहीं है. सश्क्तीकरण वह है जिससे आत्मविश्वास और आत्मसम्मान पैदा हो. ग़लत के ख़िलाफ आवाज उठाने का साहस हो और अधिकारों को पाने की चेतना हो. सश्क्तीकरण का एहसास भेदभाव मुक्त और हिंसा मुक्त माहौल से होता है और ऐसा करने के लिए महिलाओं को खुद ही आगे आना होगा.

Rightsप्रतिभा ज्योति ने कहा कि महिलाओं को जीवन में तमाम तरह की चुनौतियां आती है चाहे मामला शिक्षा का हो, स्वास्थय का हो या जिंदगी के किसी भी पहलू का, लेकिन ऐसी महिलाओं की कमी नहीं है जो हर चुनौती का सामना करते हुए अपने लिए रास्ते बनाती हैं और असल में वे महिलाएं सशक्त कहलाती हैं.

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डॉ अंजू गुप्ता

डॉ अंजू गुप्ता ने कहा कि छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही हैं और लड़कियों को समान अवसर हासिल करने के लिए आगे आना होगा.

उन्होंने कहा कि बोर्ड के कई सेंटर्स में उन हजारों लड़कियों को पढ़ाई का अवसर मिल रहा है जो किसी वजह से रेगुलर कॉलेजों में पढ़ाई नहीं कर सकती हैं. लड़कियों की संख्या बताती है कि वे पढ़ना चाहती हैं और अपने पैरों पर खड़े होना चाहती हैं यानी समाज में एक सकारात्मक बदलाव आ रहा है और लड़कियों को इस अवसर का पूरा फायदा उठाना चाहिए.

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