क्या आपका बच्चा भी BOARD EXAMINATION देगा?

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10वीं और 12वीं की Board Exam 5 मार्च 2018 से शुरु होने वाला है. क्या आपका बच्चा भी इस बार 10वीं या 12वीं में है और Board Examination देगा? तो जरुर आप भी इस बात को सोच-सोच कर परेशान हो रहीं होगी न जाने आपका बच्चा कैसा परफॉर्म करेगा, कितने मार्क्स लाएगा.




यही सोचकर बोर्ड एग्जैम का हौव्वा बना दिया जाता है, इससे न केवल बच्चा टेंशन और प्रेशर में होता है बल्कि इसका असर पूरे परिवार पर देखने को मिलता है. जबकि यदि सही और नियमित ढंग से तैयारी अभी से शुरु कर दी जाए तो बोर्ड एग्जैम को लेकर न तो बच्चे और न ही परेंटेंस को किसी तरह का तनाव होगा.

बोर्ड एग्जैम की तैयारी के लिए क्या करें..

बच्चे को मार्क्स के बजाए अपनी पढ़ाई पर फोकस करने के लिए कहें और मेहनत करने पर जोर दें. बच्चों को बताएं कि केवल अच्छे मार्क्स लाना ही नहीं बल्कि जो विषय वह पढ़ रहा है उसे अच्छी तरह समझना भी जरुरी है.




योजनाबद्ध ढंग से एग्जैम की तैयारी में सेशन के शुरुआत से ही जुट जाने को कहें. अक्सर बच्चे तनाव में इसलिए आते हैं कि वे एग्जैम से दो-तीन महीने पहले तैयारी शुरु करते हैं, इससे सभी विषयों की तैयारी पूरी नहीं हो पाए तो बच्चा तनावग्रस्त हो जाता है.




बच्चे का रुटीन बनाएं. टाइम टेबल बनाकर पढऩे को कहें. सभी विषयों पर पर्याप्त ध्यान देना जरुरी है. स्कूल के होमवर्क के अलावा स्कूल में जो कुछ भी पढ़ाया जाता है उसका रिवीजन होना चाहिए. मैथ्स के रिवीजन पर एक घंटे का समय नियमित रुप से देना चाहिए. बच्चों से कहें कि नोट्स जरुर बनाएं और हफ्ते में एक-दो बार अपने नोट्स को जरुर पढ़ें.

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लिखकर याद और अभ्यास करने और सुंदर हैंडराइटिंग में तेज लिखने की आदत विकसित करें जिससे कि परीक्षा में प्रश्न छोड़ने की नौबत न आए. लिखने की आदत से तय समय पर प्रश्नपत्रों को पूरा करने में बहुत मदद मिलती है.

स्कूल के टीचर के नियमित संपर्क में रहें. बच्चा यदि किसी विषय में होने वाली परेशानी के बारे में बात करे तो उसे गंभीरता से सुने और टीचर से बात करें.

यदि बच्चा किसी विषय में कमजोर है तो उसकी सहायता के लिए होम ट्यूशन का विकल्प भी आजमा सकती हैं, इससे बच्चा फोकस होकर उसी विषय को पढ़ेगा.

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मोबाइल और इंटरनेट को बच्चों से दूर रखने का प्रयास करें. हां ध्यान रखें कि आप ज्यादा इस बात के लिए उन पर दवाब न डालें. प्यार से समझाएं कि मोबाइल-इंटरनेट के कारण उसकी पढ़ाई में बाधा हो सकती है. आधा-एक घंटे के लिए इसके इस्तेमाल की इजाजत दे सकती हैं.

घर में पढ़ाई का माहौल बनाएं, बच्चा जब पढ़ रहा हो तो टीवी बंद कर दें, मेहमानों का घर आना टाल दे.

बच्चों को दोस्तों के साथ थोड़ी देर के लिए मिलने-जुलने और बाहर खेलने के लिए भेजें लेकिन उन्हें समय का ध्यान रखने की हिदायत जरुर दें.

सोना बहुत जरुरी है. ध्यान रखें कि बच्चों की नींद जरुर पूरी हो. नींद पूरी नहीं होने से अपच, अनिंद्रा, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द जैसी परेशानियां होने लगती है.

बच्चों के खानपान का ध्यान रखें. घर का बना पौष्टिक खाना, दूध, फल, ड्राइफूट्स दें.

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