POLITICAL PARTIES पहले अपना घर ठीक करने को तैयार क्यों नहीं?

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Political Parties
Prime Minister Narendra Modi and Congress President Sonia Gandhi

प्रतिभा ज्योति:

अगले आम चुनाव और हाल में होने वाले विधानसभा चुनावों के करीब आते ही फिर से Political Parties को महिला आरक्षण बिल का झुनझुना याद आने लगा है, लेकिन पहले वे अपना घऱ ठीक करने को तैयार नहीं दिखते. काग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महिला कार्यकर्ताओं के दस्तखत वाली एक चिट्ठी प्रधानमंत्री को भेजी है और कहा है कि उनकी सरकार महिला आरक्षण बिल को जल्दी पास करवाए . कांग्रेस का मानना है कि बीजेपी और एनडीए के पास इस बिल को पास कराने के लिए पूरी ताकत है इसलिए इसे पारित कराए.

यह सच है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों महिला आरक्षण बिल की वकालत  करने वाले राजनीतिक दल हैं ,लेकिन यह भी हकीकत है कि पिछले तीन साल से केन्द्र में बीजेपी के बहुमत वाली सरकार है और इससे पहले दस साल तक कांग्रेस की सरकार रही थी. मज़ेदार बात यह भी है कि जब कांग्रेस की सरकार थी तो बीजेपी बिल पर समर्थन की बात करती थी और अब कांग्रेस कर रही है.




दूसरा सच यह है कि महिला आरक्षण बिल को पास कराने या महिलाओं को राजनीतिक ताकत देना इन पार्टियों की मंशा है तो फिर दोनों पार्टियों के संगठन में महिलाओं की भागीदारी क्यों नहीं है? इनके  संगठन में महिलाओं की संख्या  पर नजर दौड़ाएं तो इस मसले पर दोनों पार्टियों की गंभीरता का अंदाज़ा हो जाएगा.

पहले बात कांग्रेस की.

इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं जो अब तक सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाली नेता हैं. ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में पदाधिकारियों की संख्या पार्टी अध्यक्ष से लेकर जेनरल सेक्रेटरी तक कुल 72 है लेकिन इनमें महिलाएं सिर्फ 9 हैं यानी पंद्रह फीसदी से भी कम.

देश भर में कांग्रेस के कुल 31 प्रदेश अध्यक्ष लेकिन इनमें एक भी महिला नहीं है.

कांग्रेस के 14 महासचिव में सिर्फ एक महिला, 7 प्रभारियों में सिर्फ एक महिला…

46 सचिव में सिर्फ 5 महिलाएं हैं…

एआईसीसी में विभागों और विभिन्न सेल की संख्या 24,इनमें सिर्फ 6 महिला हैं

कांग्रेस के कुल प्रवक्ता 34 है, इनमें से सिर्फ 5 महिलाएं हैं.




कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 37 सदस्यों में सोनिया गांधी समेत 5 महिलाएं हैं

कांग्रेस के 5 फ्रंटल संगठनों में राष्ट्रीय महिला कांग्रेस को छोड़कर किसी की अध्यक्ष महिला नहीं.

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अब बात बीजेपी की…

बीजेपी में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की कुल 50 है, इनमें महिलाएं सिर्फ 7

कुल 37 प्रदेश अध्यक्षों में महिला सिर्फ एक है.

बीजेपी में 12 सदस्यों वाले संसदीय बोर्ड में सिर्फ सुषमा स्वराज के रूप में एक महिला.

11 राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में सिर्फ एक महिला प्रवक्ता..




राज्यों के प्रभारी के तौर पर कुल 32 लोग हैं लेकिन सिर्फ दो महिलाओं को ज़िम्मेदारी

बीजेपी के सात उपाध्यक्ष में एक भी महिला नहीं.

आठ महासचिव में सिर्फ एक महिला,जबकि 11 सेक्रेटरी में महिलाओं की संख्या दो है

राष्ट्रीय स्तर पर कुल सात मोर्चा हैं, जिनमें से दो की अध्यक्ष महिला हैं.

गांधी ने कहा कि जो आचरण दूसरों से चाहते हैं वह पहले खुद करें. क्या हमारे राजनीतिक दल इस पर पहल करके अपने पार्टी स्तर पर महिलाओं को ताकत देंगें? यदि ऐसा किया गया तो वे ज़्यादा ताकत के साथ महिला आरक्षण बिल की बात उठा पाएंगें.

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