SMRITI IRANI ने क्यों साधा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना?

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केंद्रीय मंत्री Smriti Irani ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर संसद में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दिए गए भाषण पर उनकी जमकर आलोचना की है. उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने अपने पूरे भाषण में एक तरफा पक्ष रखा और पूरे वक्तव्य में सिर्फ जवाहरलाल नेहरू की तारीफ की है. उनके भाषण में कोई विजन नहीं था. एक तरफ जहां प्रधानमंत्री ने देश की बात की वहीं सोनिया परिवार की बात की है.

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बुधवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने फेसबुक पेज पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा. उन्होंने लिखा, कि सोनिया गांधी ने यह साबित किया पारिवारिक संबंध अन्य चीजों से ऊपर है. ‘ऐसी अपेक्षा की जाती है कि भारत छोड़ो आंदोलन जैसी देशव्यापी ऐतिहासिक घटना के बारे में बिना किसी पक्षपात के हमें अपने अपने विचार रखने चाहिए. जबकि सोनिया गांधी अपने लंबे भाषण में सिर्फ 2014 की अपनी सत्ता हार का अफसोस मनाती दिखीं.




1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर लोकसभा में विशेष चर्चा हुई जिसमें सोनिया ने भी हिस्सा लिया था. सोनिया गांधी ने भाजपा या संघ का नाम लिए बिना कहा था आजादी के 70 सालों बाद सबके मन में यही सवाल उठ रहे हैं कि क्या फिर से अंधकार की शक्तियां तेजी से उभर रही हैं?  उन्होंने कहा था, ‘ऐसा लगता है कि देश पर संकीर्ण मानसिकता वाली, विभाजनकारी और सांप्रदायिक सोच वाली शक्तियां हावी हो रही हैं. सेक्यूलर और उदारवादी मूल्यों के लिए खतरा पैदा हो गया है. उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे संगठन थे जिनका भारत छोड़ो आंदोलन में कोई योगदान नहीं था.




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स्मृति ईरानी ने सोनिया गांधी के भाषण का हवाला देते हुए कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन को लेकर सिर्फ नेहरू के योगदान का महिमामंडन क्यों किया गया?  जबकि महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में सरदार वल्लभ भाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के योगदान को कोई जिक्र नहीं हुआ. 

वहीं, केंद्रीय मंत्री ईरानी ने अपने इस पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की. उन्होंने पीएम मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए कहा पीएम ने महात्मा गांधी के करो या मरो के नारे से सीखते हुए नया नया दिया करते और करते रहेंगे. उन्होंने सिर्फ सरदार वल्लभ भाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान की बात की कही बल्कि इस आंदोलन में महिलाओं की अहम भूमिका का भी जिक्र करना नहीं भूले.