क्यों यहां जाने पर SAREES खरीदना पसंद करते हैं लोग?

2028

मध्य प्रदेश में नर्मदा के किनारे बसा एक छोटा सा शहर Maheshwar पर्यटन के लिए विश्व प्रसिद्द है. यह खरगोन जिले में स्थित है और इंदौर से लगभग 90 किलोमीटर दूरी पर है. हर साल लाखों पर्यटक यहां घूमने आते हैं. प्राचीन समय में महेश्वर होल्कर राज्य की राजधानी हुआ करता था. पर्यटन के अलावा यह शहर महेश्वर Sarees के लिए लोकप्रिय है.




महेश्वर का इतिहास

महेश्वर का  उल्लेख ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ में भी है. इस शहर का नाम भगवान शिव के ही दूसरे नाम ‘महेश’ पर पड़ा है. यहां कई बेहतरीन शिव मंदिर देखने को मिलते हैं.

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महेश्वर का इतिहास लगभग 4500 साल पुराना है. रामायण काल में महेश्वर को ‘माहिष्मती’ के नाम से जाना जाता था. उस समय ‘महिष्मति’ राजा सहस्रार्जुन की राजधानी हुआ करता था, जिसने लंका नरेश रावण को हराया था.




बाद में यह शहर होल्कर वंश की रानी अहिल्याबाई की राजधानी रहा. इंदौर के बाद रानी अहिल्या ने महेश्वर को अपनी स्थाई राजधानी बना लिया था और बाकी जीवन उन्होंने महेश्वर में बिताया.

महेश्वर में स्थित रानी अहिल्याबाई का ही किला सबसे आकर्षक पर्यटन स्थल है. नर्मदा के तट पर मराठा कालीन कला का गवाह यह किला कभी रानी अहिल्या का निवास स्थल हुआ करता था. किले में आज भी उनकी राज गद्दी मौजूद है जिसपर कभी रानी बैठा करती थीं.

रानी अहिल्याबाई

इस ऐतिहासिक किले को बाद में एक हैरिटेज होटल में तब्दील कर दिया गया जिसकी देखरेख इंदौर के अंतिम शासक के बेटे राजकुमार शिवाजी राव होलकर करते हैं.

इस किले के अलावा जलेश्वर मंदिर और सिद्धनाथ मंदिर में आपको शिवलिंग के दर्शन होंगे जिनकी खूबसूरती लाजवाब है. इसके अलावा नर्मदा के घाट और वहां बैठकर असीम शांति का अनुभव शब्दों में बयां करना मुश्किल है. ऐतिहासिक विरासत समेटे हुआ ये शहर बॉलीवुड को भी खासा पसंद है. अशोका, तेवर जैसी कई फिल्में यहां शूट की जा चुकी हैं.




प्रसिद्धि में साड़ियों का महत्वपूर्ण स्थान

महेश्वर की अर्थव्यवस्था में महेश्वर साड़ियों का महत्वपूर्ण स्थान है. यह यहां के रहवासियों की आजीविका का प्रमुख साधन है. इस हथकरघा उद्योग की शुरुआत का श्रेय भी रानी अहिल्या को ही जाता है जिन्होंने अपने कार्यकाल में देश के दूसरे हिस्सों के बुनकरों को महेश्वर बुलाकर इस उद्योग की नींव रखी.

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महेश्वर साड़ियों में मंदिरों की शिल्पकला, फूल पत्ती, पान आदि के डिज़ाइन बुने जाते हैं जो देखने में बेहद खूबसूरत लगने के अलावा देश की संस्कृति की झलक भी दिखाते हैं. इन साड़ियों की लम्बाई 6.20 मीटर होती है जिनमें ब्लाउज पीस भी होता है. 500 से 3000 रुपये की रेंज में यह साड़ियां मिल जाती हैं.

कैसे पहुंचें ?

महेश्वर हवा, रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं. 91 किलोमीटर दूर इंदौर एयरपोर्ट है, मुंबई, दिल्ली, भोपाल तथा ग्वालियर से महेश्वर के लिए सीधी विमान सेवा है.

वहीं, महेश्वर के लिए बड़वाह (39 किलोमीटर) करीबी  रेलवे स्टेशन है. खंडवा, इंदौर से भी यहाँ तक पहुंचा जा सकता है. महेश्वर सड़क मार्ग द्वारा खरगौन (60 कि.मी.), इंदौर (91 कि.मी.), धार (75 कि.मी.) एवं खण्डवा (90 कि.मी.) से जुड़ा हुआ है.

ज्यादा जानकारी के लिए एमपी टूरिज्म की वेबसाइट पर log in कर आप महेश्वर का ट्रिप प्लान कर सकते हैं और हां लौटते समय महेश्वर की साड़ियां लाना न भूलें.

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