कौन सी राह बेहतर-WORKING या HOUSEWIFE रहने की?

2240
Working
Housewife and working women

महिलाओं का नौकरी करना या घर पर रहना दोनों ही स्थितियों में समझौता उसे ही करना पड़ता है. Working हो या Housewife दोनों ही स्थितियों में उसे अपने आप को ‘सुपर मॉम’ या ‘सुपर वुमन’ साबित करने का दबाव झेलना पड़ता है.




महिला यदि Working हो तो घर-परिवार की जिम्मेदारियों में जरा सी चूक को यह उसकी लापरवाही मानी जाती है या केवल करियर को प्राथमिकता देने का आरोप लगता है.




MUST READ: क्या कॉर्पोरेट सेक्टर में महिलाएं खुद नहीं चाहती हैं TOP पर पहुंचना?

वहीं Housewife को अलग-अलग मौकों पर कई बार उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है. दिन भर घर में समय देने के बाद भी उसके काम को वह तवज्जो नहीं मिलता जो एक कामकाजी महिला के काम को मिलता है. तो क्या समझें  कौन सी राह बेहतर है Working होना या Housewife होना?




आईए देखते हैं कि दोनों में स्थितियों में एक औरत क्या खोती है और क्या पाती है?

Working

महिलाओं का नौकरीपेशा होना समय की जरुरत है. शिक्षा हासिल करने के बाद अपने पैरों पर खड़े होना उसके लिए भी उतना ही जरुरी है जितना एक पुरुष के लिए.

1-आर्थिक आत्मनिर्भरता महिला में आत्मसम्मान की भावना पैदा करती है.

2-परिवार की आय बढ़ती है तो संपन्नता बढ़ती है.

3-भविष्य के लिए थोड़े पैसे जोड़े जा सकते हैं.

4-ऐसी मांओं के बच्चे आत्मविश्वासी हो जाते हैं. घर पर मां के नहीं रहने से वे अपना कई काम खुद करते हैं, इससे उनके अंदर आत्मनिर्भरता आती है.

5-महिला का व्यक्तित्व निखरता है. वह जीवन की आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहती है.

लेकिन दूसरी तरफ ऐसी महिलाओं पर घऱ-परिवार और दफ्तर के बीच सामंजस्य बिठाने का बहुत दबाव होता है. बच्चों या घर के किसी सदस्य की बीमारी या बच्चों की परिक्षाओं के के समय दफ्तर से छुट्टी नहीं मिलने पर वह ग्लानि महसूस करती है.

MUST READ: 5 HOME CAREER- जिसमें निखारें अपना हुनर और कमाएं पैसा

बच्चों को मां का अधिक साथ नहीं मिलता है तो वे अपनी परेशानी किसी और से बांट सकते हैं. ग़लत संगत में पड़ सकते हैं. पति-पत्नी दोनों के व्यस्त रहने से आपसी रिश्तों पर असर पड़ने लगता है. ऐसी महिलाएं सामाजिक उत्सवों और पारिवारिक कार्यक्रमों में कई बार पूरी तरह शामिल नहीं हो पाती हैं, उसका असर भी आपसी रिश्तों पर पड़ता है.

Housewife

ऐसी महिलाएं हमेशा परिवार के सदस्यों के बीच रहती है, जिसकी वजह से वे अच्छी तरह सबकी देखभाल कर पाती हैं.

ऐसी मांओं को बच्चे हर पल अपने पास पाते हैं और कोई भी बात तुरंत शेयर कर सकते हैं.

मांएं बच्चों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे पाती हैं.

सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में पूरी तरह ध्यान दे पाती हैं.

लेकिन नौकरी या कोई ऐसा काम जिसमें कुछ आमदनी हो नहीं करने के कारण वे पूरी तरह पति पर निर्भर रहती हैं. हर छोटे-बड़े खर्चे के लिए उन्हें पति से पैसा मांगना पड़ता है.

MUST READ: महिलाओं के कंधों पर ही क्यों है HOUSE WORK की ज्यादातर जिम्मेदारियां?

ऐसी महिलाएं अक्सर अवसाद का शिकार हो जाती हैं, उन्हें लगता है कि उनके काम की कोई कद्र नहीं है. वे खुद को उपेक्षित महसूस करती हैं.

उनकी दुनिया सिर्फ घर तक सिमट कर रह जाती हैं. इसलिए वे कामकाजी महिलाओं की तुलना में खुद को कम आंकती हैं.

बहरहाल आपको नौकरी करना है या घर पर रहना है यह आपको खुद तय करना चाहिए. यह पूरी तरह आपकी अपनी परिस्थितियों पर निर्भर करता है. सिर्फ किसी को देख कर अपने फैसले नहीं लेने चाहिए. हर हंसान की अलग सामाजिक और पारिवारिक परिस्थिति होती है. इसलिए आपकी भी अलग होगी. इसलिए कौन सी राह चुननी है यह आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता…

महिलाओं से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करेंट्विटर पर फॉलो करे… Video देखने के लिए हमारे you tube channel को  subscribe करें