उन्हें अपने रास्ते पर चलना क्यों पसंद है?

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Uma Bharti
Uma Bharti

प्रतिभा ज्योति:

बाबरी मस्जिद गिराए जाने के अगले दिन 7 दिसम्बर 1992 को दिल्ली के राष्ट्रीय अखबारों में छपी एक राजनीतिक फोटो बड़ी चर्चा में रही थी, जिसमें बीजेपी नेता साध्वी Uma Bharti पार्टी के वरिष्ठ नेता डा मुरली मनोहर जोशी के साथ एक विजयी मुस्कान के साथ दिख रही हैं. यानी ज़्यादातर लोगों ने माना कि साध्वी बाबरी मस्जिद गिराए जाने से बहुत खुश नज़र आ रही हैं .




साध्वी Uma Bharti का राम मंदिर आंदोलन से लंबा रिश्ता रहा है और वे बचपन में भी कथा वाचन करती थीं. राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनके भाषण काफी उत्तेजना भरे हुआ करते थे और हज़ारों लोग उन्हें सुनने आते थे. बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद Uma Bharti का राजनीतिक ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता गया. साध्वी ऋतम्भरा के साथ उन्होंने  राम जन्मभूमि आन्दोलन में प्रमुख भूमिका निभाई. इस दौरान उनका नारा था श्रीराम लला घर आएंगे, मंदिर वही बनाएंगे.




2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में, उनके नेतृत्व में भाजपा ने तीन-चौथाई बहुमत हासिल किया और मुख्यमंत्री बनीं. अगस्त 2004 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जब उनके खिलाफ 1994 के हुबली दंगों के सम्बन्ध में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ. नवम्बर 2004 में ही लालकृष्ण आडवाणी की आलोचना के बाद उन्हें  बीजेपी से बर्खास्त कर दिया गया. 2005 में उनकी बर्खास्तगी हट गयी और उन्हें पार्टी के संसदीय बोर्ड में जगह मिली. इसी साल वह पार्टी से हट गयी क्योंकि उनके प्रतिद्वंदी शिवराज सिंह चौहान को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया. इस दौरान उन्होंने  भारतीय जनशक्ति पार्टी नाम से एक अलग पार्टी बना ली.




7 जून 2011 को उनकी फिर से भाजपा में वापसी हुई और उत्तरप्रदेश में पार्टी की स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने “गंगा बचाओ” अभियान चलाया.  मार्च 2012  में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में वह  बुंदेलखंड में महोबा ज़िले की चरखारी सीट से विधानसभा सदस्य चुनी गयीं. लेकिन फिर 2014 के आम चुनावों में वे झांसी से सांसद चुनी गई हैं और उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में भारत की जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री बनाया गया हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर लिखी गई वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी की एक किताब “ हार नहीं मानूंगा ” में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विचारक रहे गोविन्दाचार्य ने उनकी निजी ज़िंदगी पर एक खुलासा किया है.

इस किताब में गोविन्दाचार्य के हवाले से कहा गया है कि –

इसी दौरान 1992 में एक और विस्फोट हुआ, पार्टी में गोविन्दाचार्य और एक महिला नेता के रिश्तों को लेकर खुलासा. उस पर भी काफी हंगामा चल रहा था. इस बीच गुजरात में बीजेपी की केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक हुई. बैठक में हिस्सा लेने के लिए गोविन्दाचार्य भी पहुंचे थे. मंच पर मुरली मनोहर जोशी का अध्यक्षीय भाषण खत्म हुआ कि पार्टी के महाराष्ट्र से वरिष्ठ नेता राम नाईक खड़े हुए, माईक संभाला और कहा कि अध्यक्ष जी हमारे एक महामंत्री और एक महिला नेत्री के संबंधों को लेकर चर्चा चल रही है, सही स्थिति क्या है, स्पष्ट होनी चाहिए.

तभी  लालकृष्ण आडवाणी खड़े हुए और उन्होंने राम नाईक से माईक लेते हुए कहा कि गोविन्दाचार्य मद्रास में रहेंगे, तमिलनाडु की जिम्मेदारी देखेंगे, इसलिए अब इस पर कोई बात नहीं होगी तो आडवाणी को टोकते हुए वाजपेयी बोले, नहीं, आडवाणी जी केवल स्थानांतरण से काम नहीं चलेगा. संगठन के नाम और छवि पर असर पड़ता है और यहां कुछ लोग किसी को ऊंचा करने, तो किसी को नीचा करने में लगे हैं. गोविन्दाचार्य ने बीच में ही हाथ उठाते हुए कहा कि मुझे भी इस बारे में कुछ कहना है. आडवाणी ने नाराज़ होते हुए कहा कि कुछ नहीं कहना है आप बैठिए, बैठ जाइए.

बैठते-बैठते गोविन्दाचार्य बोले, जो अटल जी ने कहा है, वो ग़लत है. बैठक में माहौल एकदम गरमा गया. अध्यक्ष जोशी ने आधे घंटे के ब्रेक का ऐलान कर दिया. देवराज आप्टे ने गोविन्दाचार्य को कहा कि अभी बाहर मत जाना, पूरा मीडिया है, झपट पड़ेंगे. कई साल बाद गोविन्दाचार्य ने स्पष्ट किया कि वे उमा भारती से प्रेम करते थे और उनसे शादी करना चाहते थे लेकिन ना तो उमा राजी हुईं और न ही संघ के पदाधिकारियों ने इसकी इजाज़त दी. गोविन्दाचार्य ने इस सिलसिले में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और संघ के नेता भाऊराव देवरस से बात की थी. आडवाणी का मानना था कि इससे दोनों नेताओं के सार्वजनिक जीवन पर असर पड़ेगा. इसके बाद 17 नवम्बर 1992 को उमा ने संन्यास ले लिया और तब गोविन्ददाचार्य ने उमा भारती के पैर छूकर उन्हें अपना गुरु मान लिया.

उमा का जन्म 3 मई 1959 को लोध राजपूत परिवार में  टीकमगढ़ में हुआ था. उन्हें ग्वालियर की महारानी विजयराजे सिंधिया ने उभारा वह युवावस्था में ही भारतीय जनता पार्टी से जुड़ गयीं थी. उन्होंने 1984 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गयीं. 1989 के लोकसभा चुनाव में वह खजुराहो संसदीय क्षेत्र से सांसद चुनी गयीं और 1991,1996 और 1998 में यह सीट बरकरार रखी.1999 में वह भोपाल सीट से सांसद चुनी गयीं. वाजपेयी सरकार में वह मानव संसाधन विकास, पर्यटन, युवा मामले एवं खेल और फिर कोयला और खदान जैसे विभिन्न राज्य स्तरीय और कैबिनेट स्तर के विभागों में कार्य किया.

अपने रास्ते पर चलने की राजनीति करने वाली Uma Bharti को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभी उनके पसंद की ज़िम्मेदारी गंगा सफाई की सौंप रखी हैं और वे जल्दी ही ढाई हज़ार किलोमीटर की गंगा यात्रा पर निकलने वाली हैं. उनका कहा है कि अगले साल अक्टूबर तक गंगा निर्मल हो जाएगी.