SOCIAL MEDIA से स्त्रियों को सबसे ज्यादा फायदा, पर TROLL से सबसे ज्यादा नुकसान

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Troll
Troll on social media-women facing biggest loss because of troll

प्रियंका ओम:

Troll क्या है ये तो कमोबेश लगभग सभी जानते और समझते हैं लेकिन फिर भी यदि दो लाइन में कहूं तो Troll वह प्रक्रिया है जिसमे सोशल मीडिया पर सक्रिय किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाकर उसे नीचा दिखाने की कोशिश की जाती है.




Troll कई प्रकार का होता है…

· किसी के विचारों को सीधा शेयर कर उसका विरोध करना . 

· किसी के विचारों का स्क्रीन शॉट लेकर लेकर, अमुक व्यक्ति के हस्तक्षेप को निषेध कर उस पर चर्चा करना

· किसी की अति लोकप्रियता से कुंठित होकर उसके विचारों का लगातार विरोध करना.

· सिर्फ पोस्ट शेयर करना और स्क्रीन शॉट लगाना ही ट्रोल नहीं है बल्कि कई बार प्रेषित विचारों पर भद्दे- भद्दे कमेंट्स और गाली गलौज भी शामिल है. आजकल स्त्रियां भी इसमें पीछे नहीं.




ट्रोल धीरे धीरे सोशल मीडिया को रुग्न बनाता जा रहा है. सोशल मीडिया की उपयोगिता से जहां सबसे बड़ा फायदा स्त्री समुदाय को हुआ था वहीं ट्रोल की वजह से सबसे ज्यादा नुक्सान भी स्त्री समुदाय को ही हो रहा है.

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प्रियंका ओम

घर-गृहस्थी और समाज में अपनी अस्तित्व की समस्याओं से जूझती हुई स्त्री सोशल मीडिया के माध्यम से विरोध जताने लगी, वो अपनी बात अपने तरीके से बेधड़क बिना डरे कहने लगी.

कभी अपनी असली पहचान से तो कभी छद्दम रूप धर कर पितृसत्ता के नियमों का विरोध करने लगी लेकिन ट्रोलिंग ने एक बार फिर उन्हें दायरे में समेट दिया है.

पता नहीं कब कौन उसकी कही गई बात को बिना ठीक तरीके से समझे उसे ट्रोल करने लगे.  हालांकि इतने के बावजूद कुछ स्त्रियों के साहस को मैं सलाम करुंगी जो उनके लिए इस्तेमाल किये गये अपशब्दों से ज़रा भी नहीं घबराती है बल्कि और मजबूती से टिकी रहती है.

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ट्रोल कौन करता है और क्यूं करता है ?

ज्यादातर ट्रोलर कुंठित होते है, जो वह खुद हासिल करना चाहते हैं वो किसी और को हासिल देखकर उन्हें तकलीफ होती है तब वो सफल व्यक्ति को ट्रोल करने लगते हैं.

सोशल मीडिया में किसी की बढती हुई पॉपुलैरिटी जब किसी और को बेवजह खटकने लगे तब वह उसे नीचा दिखाने के मौके या तरीके ढूंढ कर Troll का रास्ता अपनाता है.




खास कर कुंठित मानसिकता वाले पुरुषों को स्त्रियों की लोकप्रियता जरा भी नहीं सुहाती. वे Troll के तरीकों से उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते है और यदि कोई अन्य पुरुष ट्रोल का विरोध करता है तो वह अमुक स्त्री का यार कहलाता है.

ऐसे मामलों में जहां कुछ स्त्रियां बढ़ चढ़ कर ट्रोल की गई स्त्री को और ट्रोल करने में हिस्सा लेती है वहीं कुछ सुचिता वाली स्त्रियां पुरुषों के गाली गलौज और खुद निशाना बनने के डर से मौन साध लेती हैं.

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अक्सर देखने में आता है स्त्रियां अगर किसी पुरुष से किसी बहस में हार रही होती हैं तो अपने दूसरे पुरुष दोस्तों को मेंशन करके बुलाती हैं या ठीक इसके विपरीत भी होता है कई बार पुरुष भी अपनी महिला मित्रो को मेंशन करके बुलाते हैं यह भी एक प्रकार का ट्रोल है.

हमेशा पुरुष ही स्त्री को या स्त्री ही पुरुषों को ट्रोल नहीं करती बल्कि स्त्री भी स्त्री को और पुरुष भी पुरुष को ट्रोल करते हुए पाए जाते हैं.

(साभार-फेसबुक वॉल)

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