Womenia की मुहिम रंग लाई, Amazon ने हटाया ‘ऐश ट्रे’

301
womenia campaign against amazon
womenia campaign against amazon

प्रतिभा ज्योति:

सब मिल जाएं तो फिर किसी मूवमेंट और आंदोलन को रोका नहीं जा सकता है. वुमनिया ने अमेजन के आपत्तिजनक ‘ऐश ट्रे’ के ख़िलाफ़ सबसे पहले शुरुआत की और महिला एक्टिविस्ट, लेखक, पत्रकारों के साथ बहुत से मीडिया संस्थान, चैनल, वेबसाइट और अखबारों ने भी इस लड़ाई और मूवमेंट को आगे बढ़ाया. देखते- देखते अमेजन पर दबाव बन गया और उसने 24 घंटे से भी कम वक्त में अपने इस प्रोडक्ट को अपनी वेबसाइट से वापस ले लिया. यह सिर्फ़ पत्रकारों और सोशल एक्टिविस्ट की ही नहीं महिलाओं और सोसाइटी की ताकत की जीत है. आप सबको बहुत बहुत बधाई और वैसे अमेजन को भी शुक्रिया लोगों की भावनाओं को समझने के लिए.




पत्रकार और एक्टिविस्ट रीवा सिंह ने सही लिखा है कि

कौन कहता है आसमां में सुराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों!

कल अमेजन के ऐश ट्रे के खिलाफ़ मुहिम शुरू की गयी थी जो 24 घंटे के भीतर कामयाब हो गयी है. अमेजन ने औरत की वेजाइना के शेप की बनी वो ऐश ट्रे और उस तरह के सभी उत्पाद हटा लिये हैं. दोस्तों ने खूब साथ दिया. ऐमेजॉन के उस उत्पाद की खिलाफ़त की, पोस्ट लिखे, शेयर किये. ये मशाल जलती रहनी चाहिए. ऐसे विषयों का बेझिझक विरोध होना चाहिए- हर रोज़, हर बार. बीबीसी, नेशनल दस्तक, द वायर, तहलका न्यूज़ और वुमनिया जैसे प्लेटफॉर्म्स ने पूरा सहयोग करते हुए बात दूर तक पहुंचायी. आप सभी बधाई के पात्र हैं. सहयोग के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!




लोग वेबसाइट्स से पोस्ट पढ़कर मेल्स भी कर रहे हैं. बहुत सुकून मिलता है जब बात का असर होने लगे. सभी को बेशुमार प्यार!

women supporting womenia campaign against amazon
women supporting womenia campaign against amazon

लेखक अनीता मिश्रा ने भी  वुमनिया के साथ साथ सभी का शुक्रिया किया है इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए. अनीता ने सबसे पहले इसके लिए वुमनिया पर लेख लिख कर अपना विरोध जताया था.




अनीता मिश्रा ने वुमनिया पर लिखा था कि एक बार को मान लिया ये महंगा ऐश ट्रे महज सजाने के लिए है इसको खरीदकर शायद ही कोई राख डालेगा, लेकिन है तो ये एक ऐश ट्रे ही जिसका इस्तेमाल तो यही है सिगरेट की राख झाडना . क्या एक स्त्री के शरीर के हिस्से को कलाकृति में राख डालने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला बनाने के पीछे महज कलात्मक नजरिया है. ऐसा नहीं है कि आर्ट में कभी न्यूड बनाये नहीं गए हैं. जाने –माने दार्शनिक और पेंटर खलील जिब्रान ने सिर्फ न्यूड ही बनाए हैं, लेकिन उनकी कोई कलाकृति पर कभी अश्लील नहीं महसूस होती है. जिब्रान ही नहीं बहुत सारे लोगों ने ऐसी पेंटिंग या मूर्तियां बनाई हैं. सारा खजुराहो ही ऐसी मूर्तियों से भरा हुआ है, लेकिन इसे अश्लील नहीं माना जाता है .

इस भेद की सबसे बड़ी वजह है नज़रिए की. स्त्री के किसी अंग की ऐश ट्रे बनाकर उसे बेचने के लिए प्रदर्शित करना और किसी चीज को कला की तरह देखना दोनों में फर्क है. ये विज्ञापन मन में जुगुप्सा जगाता है. ये विज्ञापन अपने इरादों और सन्देश में अश्लील है इसलिए इसे लेकर जो तीखी प्रतिक्रिया हो रही है स्त्रियों में बिलकुल उचित है.   

लेखिका गीता यथार्थ की तीखी प्रतिक्रिया सबसे पहले आई थी गीता ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा –

ये बलात्कार को बढ़ावा नहीं है तो क्या है??

हर घंटे बलात्कार होते है, 
सिर्फ बलात्कार नहीं होते,
होती है चीरा फाड़ी लड़कियों के शरीर की,
स्तन काटे जाते है, 
वेजाइना में घोंप दिए जाते है,
कांच, लोहे की रोड, 
कंकर पत्थर के टुकड़े.,
शराब की टूटी बोतले, 
मारने के बाद 
जला देते है चेहरा, 
ताकि कोई पहचान ना पाए, 
उस देश का बाजार आपको मानसिक संतुष्टि देना चाहता है, 
आप असलियत में ये सब नहीं कर पा रहे हो तो, 
ऐशट्रे पर ही कर लीजिये, 
जलती हुई सिगरेट मेटल की वेजाइना में बुझाइये, 
और खुश होइए, 
ये सोचकर के किसी औरत के शरीर को जला दिया.

(बाज़ार का ये रूप, और अमेज़न घिन्न हो रही है तुमसे.)

एक बार आपको सबको मुबारकबाद लेकिन ये लड़ाई आज ख़त्म नहीं हुई है, हमेशा तैयार रहना है ऐसे ही औरतों के लिए एकजुट होने के लिए.

 

 

 

Facebook Comments