महिलाओं का पीछा करने वालों पर STRICT ACTION नहीं लिया तो वे हो जाएंगे खतरनाक

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Strict Action

दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ तेजी से बढ़ते अपराध पर तीस हजारी कोर्ट ने चिंता जताई है. अदालत ने कहा है कि महिलाओं के Stalking (पीछा करने)  के मामले भी तेजी से बढे हैं और इस पर Strict Action लेने की जरुरत है.




महिलाओं का पीछा करने में दो युवकों को छह महीने की सजा बरकरार रखते हुए मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने टिप्पणी की. तीस हजारी कोर्ट की विशेष न्यायधीश कामिनी लॉउ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि महिलाओं को पीछा करने वालों से सख्ती नहीं बरते जाने के कारण समय के साथ वे और खरतरनाक हो जाते हैं.




उन्होंने कहा कि ऐसे लोग महिलाओं के जीवन के लिए खतरा बन जाते हैं. भारतीय समाज पीछा करने के अपराध से छुटकारा पाने के तरीके खोज रहा है लेकिन मौजूदा समय में कानून में कई खामियां हैं.

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अदालत ने कहा कि किसी वारदात के बाद समाज हमेशा महिलाओं को दोष देता है कि उन्होंने ढंग से कपड़े नहीं पहने थे, लेकिन यह देखा गया है कि समाज जिन कपड़ों को अच्छा बताता है उसे पहनने वाली लड़कियां भी छेड़खानी की शिकार होती है.




अदालत ने कहा कि देखा गया है कि अच्छे माने-जाने वाले कपड़े पहनने वाली लड़कियों को ज्यादा परेशान किया जाता है. छेड़खानी को पुरुषों को अपने मानदंडों पर नहीं देखना चाहिए बल्कि महिलाओं के परिप्रेक्ष्य में भी समझना चाहिए कि उन्हें कैसा महसूस होता है. विशेष न्यायधीश ने कहा कि समाज को अपनी सोच बदलनी होगी.

दिसंबर 2012 में निर्भया कांड के बाद 2013 में महिलाओं को पीछा करना और घूरना अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया था. दिल्ली पुलिस ने साल 2013 में एक लड़की की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया था.

लड़की ने अपने ही कक्षा में पढ़ने वाले दो लड़कों पर पीछा करने और परेशान करने का आरोप लगाया था. मामले में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने दोनों युवकों को दोषी ठहराते हुए छह-छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी.

(साभार-हिन्दुस्तान)

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