तो इसलिए उदयपुर को कहते हैं राजस्थान की सबसे ROMANTIC CITY

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Romantic City
Udaipur

डॉ कायनात क़ाज़ी:

ट्रैवलर, ब्लॉगर, फोटोग्राफर:

अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि आपको भारत में कौन सी जगह सबसे ज्यादा पसंद आई? वैसे तो इसका जवाब देना बड़ा ही मुश्किल है लेकिन मुझे राजस्थान का उदयपुर शहर बहुत पसंद है जिसे राजस्थान की सबसे Romantic City माना जाता है.




विस्तार से बताती हूं कि आखिर क्या वजह है जो एक बार इस शहर में आ जाए तो उसके तो दिल में ही यह शहर बस जाए. उदयरपुर की कई खासियतें इसे औरों से अलग बनाती है. चलिए मेरे साथ इस यात्रा पर….

उदयपुर रेल, सड़क और हवाई मार्गों से देश के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है. आप बड़ी आसानी से देश के किसी भी कोने से उदयपुर पहुंच सकते हैं. मैंने उदयपुर पहुंचने के लिए अपनी प्रिय सवारी भारतीय रेल को चुना. दिल्ली से रात भर का सफ़र तय करने के बाद मैं सुबह-सुबह उदयपुर के साफ सुथरे रेलवे स्टेशन पर उतरी.




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थोड़ी नज़र घुमाने पर सामने ही मुझे टूरिस्ट इन्फार्मेशन सेंटर नज़र आ गया. हैरानी की बात यह थी कि अभी सुबह के सात भी नही बजे हैं और यह टूरिस्ट इन्फार्मेशन सेंटर ना सिर्फ़ खुला था बल्कि राजस्थान टूरिज़्म डिपार्टमेंट के एक अफसर लंबी सी मुस्कान के साथ आने वाले पर्यटकों को यथा संभव जानकारियां उपलब्ध करवा रहे थे.




तो यह हुई ना बात. इसे कहते है सफ़र की शुभ शुरुआत. सबसे पहले जानते हैं इस शहर के इतिहास के बारे में. सन 1553 मे महाराजा उदय सिंह ने निश्चय किया कि उदयपुर को नई राजधानी बनाया जाएगा. इससे पहले तक चित्तौड़गढ़ मेवाड़ की राजधानी हुआ करता था.

1553 में उदयपुर को राजधानी बनाना का काम शुरू हुआ और साथ ही सिटी पैलेस का निर्माण शुरू हुआ. सन 1959 में उदयपुर को मेवाड़ की राजधानी घोषित किया गया. उदयपुर को महाराजा उदयसिंह ने सन् 1559 AD में बसाया. उन्हें लेक पिछौला बहुत पसंद थी इसलिए अपने रहने के लिए पैलेस यहीं लेक पिछौला के किनारे बनवाया. इस पैलेस का आकर किसी बड़े शिप जैसा है.

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City Palace, Udaipur

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दोस्तों अगर आप उदयपुर के चार्म को नज़दीक से महसूस करना चाहते हैं तो ओल्ड सिटी मे लेक पिछौला के आस पास ही ठहरें. यहां आपको फाइव स्टार होटल से लेकर हर बजट के होटल और होमस्टे मिल जाएंगे. मैंने भी ओल्ड सिटी का रुख़ किया.

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Pichola lake

यात्रा की शुरुआत जगदीश मंदिर से कीजिए, यह यहां का प्रसिद्ध मंदिर है. इसका निर्माण सन 1651 मे महाराणा जगत सिंह प्रथम ने करवाया था. जिसकी स्थापत्य कला देखने ही बनती है. मार्बल के पत्थरों पर उकेरी गई मूर्तियां एकदम सजीव जान पड़ती हैं.

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Jag Mandir, Udaipur

इस मंदिर मे भगवान जगन्नाथ की बड़ी-सी काले पत्थर की मूर्ति स्थापित है. मंदिर के प्रांगण मे ब्रास के गरुण देवता की मूर्ति भी है. यहीं से थोड़ा आगे जाने पर सिटी पैलेस आ जाता है. सिटी पैलेस पिछली 23 पीढ़ियों से यहां के महाराजाओं का निवास स्थान है.

जिसका कुछ हिस्सा पब्लिक के लिए खुला हुआ है, कुछ हिस्से मे होटल है और कुछ हिस्सा महाराजा का निवास स्थान है. सिटी पैलेस मार्बल का बना हुआ एक शानदार पैलेस है जिसमे कई संग्रहालय हैं, जहां मेवाड़ राजवंश के जीवन की झलक प्रस्तुत की गई है.

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जो भाग पब्लिक के लिए खुला हुआ है उसके दो हिस्से हैं, मर्दाना महल और ज़नाना महल. मर्दाना महल मे कई संग्रहालय और दार्शनिक स्थल हैं जैसे, बड़ी पॉल, तोरण, त्रिपोलिया, मानक चौक, असलहखाना, गणेश देवडी, राई आंगन, प्रताप हल्दी घाटी कक्ष, बाड़ी महल, दिलखुश महल, कांच की बुरज, और मोर चौक.

जबकि ज़नाना महल मे है, सिल्वर गैलरी, आर्किटेक्चर और कन्सर्वेशन गैलरी, स्कल्प्चर गैलरी, म्यूज़िक, फोटोग्राफी, पैंटिंग और टेक्सटाइल व कॉस्ट्यूम गैलरी. मेवाड़ के राज घराने के जीवन से रूबरू होने मे कम से कम दो घंटे का समय तो लगता ही है,यह एक प्राइवेट पैलेस है इसलिए इसके रख रखाव पर विशेष ध्यान दिया गया है.

यहां अंदर जलपान की भी व्यवस्था है. मैंने पैलेस मे घूमते हुए कई झरोखों से लेक पिछौला देखी. यह एक विशाल लेक है जिसके बीचों बीच सफेद मार्बल का एक खूबसूरत पैलेस नज़र आया मालूम करने पर पता चला कि यह जगनिवास पैलेस है जोकि अब एक फाइव स्टार होटल मे तब्दील हो चुका है.

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Jag Niwas, Udaipur

ऐसा ही एक और पैलेसलेक है जिसका नाम जगमंदिर है मार्बल के बड़े बड़े हाथियों की क़तार से यह दूर से ही पहचान में आ जाता है. यह भी एक फाइव स्टार सितारा होटल है. सिटी पैलेस को देखने के बाद मैं पतली पतली गलियों से गुज़रती हुई लाल घाट की ओर बढ़ी, मैं ढलान पर थी और मेरे दोनो ओर पूरा का पूरा बाज़ार सज़ा है इन गलियों में.

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यहां से आप शॉपिंग भी कर सकते हैं, लाल घाट बेहद खूबसूरत और मेरे सामने खूबसूरत लेक पिछौला है. यहां नज़रें घुमा कर देखिए सभी इमारतें एक जैसी हैं, सफेद और बादामी रंगों वाली इमारतें जिनमे झरोखे बने हुए हैं इनमें एकरूपता है. यह छोटे बड़े होटेल और रेस्टोरेंट हैं.

टूरिज्म सेक्टर से जुड़े सौरव आर्य मुझे बताते हैं राजस्थान मे पैलेस और किलों की कोई कमी नही है, लेकिन लेक पिछौला सब के पास नही है. उदयपुर एक ऐसी जगह है जो अतीत के राजपूती वैभव के साथ नए ज़माने की आधुनिकता दोनों का संतुलित मिश्रण प्रस्तुत करता है.

सिटी पैलेस राजस्थानी आन बान और शान का प्रतीक है, तो लेक पिछौला और उस से जुड़े घाटों पर बने रेस्टोरेंट और कैफ़े वर्ल्ड क्लास भोजन परोसते हैं. लेक पिछौला पर शाम को बोटिंग कीजिए और सनसेट का अद्भुत नज़ारा देखिए.

Romantic Cityकिसी रूफ टॉप रेस्टौरेंट मे बैठ कर लेक पिछौला पर तैरती हुई झिलमिलाती रोशनियों को देखते हुए एक हसीन शाम का लुत्फ़ उठाइए, यह कहीं और नही हो सकता. उदयपुर आने वाले पर्यटक को हर स्वाद परोसता है, दाल बाटी चूरमा से लेकर चिकेन स्टीक और लज़ानिया तक.

Romantic City
Rajasthani Food

जहां कैफे और रेस्टोरेंट मे वेस्टर्न म्यूज़िक पर्यटकों का मनोरंजन करता है वहीं नज़दीक ही बाघोर की हवेली मे हर शाम राजस्थान की लोक नृत्यों की प्रस्तुति देखने लायक़ होती है. शाम को मैंने लेक पिछौला मे नौका विहार किया और सनसेट देखने का लोभ छोड़ा नहीं गया. वाक़ई यह एक अद्भुतनज़ारा था.

सामने सिटी पैलेस पीली रोशनियों मे जगमगा रहा था, लगता है जैसे वक़्त यहीं ठहर जाए, थम जाए. थोड़ी शाम और बाक़ी थी तो मैंने बाघोर की हवेली मे होने वाले सांस्कृतिक प्रोग्राम का लुत्फ़ उठाया. घूमर, चाकरी और भंवरी नृत्य की इतनी सुंदर प्रस्तुति मैंने पहले कभी नही देखी. सिर के ऊपर नौ मटके रख कर कांच पर नृत्य करना कोई आसान काम नही है.

डॉ कायनात क़ाज़ी
डॉ कायनात क़ाज़ी

अगले दिन की शुरुवात फ़तेह सागर लेक पर वॉटर स्पोर्ट्स के साथ हुई. यहां पैरा मोटर, स्पीड बोट आदि की व्यवस्था है. बोट चलाने वाले से पूछा-लेक पिछोला सबसे सुन्दर कहां से दिखती है? उसने बताया – अमराई घाट से. बस क्या था मैं पहुंच गई अमराई घाट.

वाक़ई उसने सही कहा था. मेरे आगे लेक पिछोला का नीला साफ़ पानी और सामने सफ़ेद मार्बल वाला सिटी पैलेस और उस के बराबर बराबर क़तार में लगे लाल घाट और गणगौर घाट. यहां आप घंटों गुजार दे तो पता नहीं चले. यहीं मेरी मुलाक़ात हितेश जी से हुई जो एक इवेंट मैनेजर हैं.

उन्होने बताया कि आपने एतिहासिक इमारतों पर प्रेमी प्रेमिकाओं के प्रेम की निशानी दिल और तीर के रूप मे बहुत देखी होंगी, आज मैं आपको ऐसी ही कुछ निशानियां दिखाऊंगा जोकि इस बात का प्रमाण हैं कि यहां आने वाले सैलानियों को इस जगह से प्रेम हो जाता है.

हम ओल्ड सिटी मे उन जगहों पर गए जहां पर बड़ी ही सुंदर ग्रेफ़िटी बनी हुई थी जिसे यहां आने वाले सैलानियों ने बनाई थी. उदयपुर की ओल्ड सिटी की गलियों मे ऐसी कई सुन्दर ग्रेफ़िटी देखने को मिल जाती हैं. कैंडल लाइट की रौशनी में लेक पिछोला के किनारे किसी रूफ टॉप रेस्टोरेन्ट में डिनर करना यहाँ आने वाले सैलानियों को बहुत भाता है.

Romantic Cityइसी लिए शायद इस जगह को राजस्थान का सबसे Romantic City कहा जाता है. यहां इन गलियों में आप देर रात तक बड़े आराम से घूम सकते हैं।. वाकई उदयपुर सच मे एक इंटरनेशनल सिटी है, तभी तो देशी के साथ विदेशी पर्यटकों की यह पहली पसंद है.

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