कहीं आपके BACKACHE यानी पीठ दर्द का कारण ये तो नहीं?

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सुमन बाजपेयी:

अकसर ऐसा होता है कि हम झुककर किसी चीज को उठाते हैं या फिर किसी भारी चीज को अलमारी से उतारने हैं कि बहुत जोर से आउच की आवाज निकलती है और हम अपनी पीठ पर हाथ रख लेते हैं. यानी पीठ दर्द (Backache) की दस्तक सुनाई देती है.




Backache की वजह भारी चीज को उठाना या फिर गलत पोश्चर ही नहीं होता, बल्कि मानसिक या भावनात्मक तनाव भी इसकी वजह बन सकता है. मानसिक तनाव के हम रोजमर्रा की जिंदगी में शिकार होते ही हैं.

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वास्तव में ईमोशनल स्ट्रेस से उत्पन्न तनाव आपको पीठ दर्द दे सकता है. इससे गंभीर पीठ दर्द की परेशानियां होने होने के साथ-साथ अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं.




तनाव को समझें

हाल में हुए अध्ययन बताते हैं कि केवल स्ट्रेस केवल पीठ दर्द का कारण ही नहीं बनता है, वरन वह कई तरह से आपकी सेहत पर असर डाल सकता है. आपका इम्यून सिस्टम वीक हो सकता है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और आपके लिए वजन पर कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि स्ट्रेस की वजह से आप अनहेल्दी फूड खा लेते हैं.




आप दैनिक जीवन में जो भी काम करते हैं, उसमें आपकी पीठ का इस्तेमाल होता ही है, इसलिए तनाव का असर भी उस पर सबसे पहले पड़ता है. अकसर लोग, खासकर महिलाएं अपने ईमोश्नल स्ट्रेस को अपनी मांसपेशियों में रख लेती हैं, खासकर गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में.

तब या तो सिरदर्द होने लगता है और फिर वह दर्द धीरे-धीरे आपकी गर्दन से होता हुआ ऊपर-नीचे जाता है. बहुत अधिक काम या तनाव से उत्पन्न चिड़चिड़ाहट, ट्रैफिक जाम, आफिस में परेशानी या घर का काम, वजह कुछ भी हो सकती है, जिसके कारण मांसपेशियों में अकड़न हो जाती हैं.

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आमतौर पर हमारी गर्दन और पीठ से रक्त प्रवाह बिना किसी अवरोध के होता है, लेकिन जब हम मानसिक तौर पर तनावग्रस्त होते हैं तो कुछ मांसपेशियां अकड़ जाती हैं और इन रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देती हैं. और इन अकड़ी हुई मांसपेशियों से खून का प्रवाह अवरु द्ध हो जाता है.

जब गर्दन और पीठ को उचित रक्त की आर्पूति नहीं होती तो उससे दर्द महसूस होने लगता है. चूंकि रक्त से ही न्यूट्रीएंट और ऑक्सीजन मिलते हैं, जिससे मांसपेशियां सही ढंग से कार्य कर पाती हैं.

रक्त प्रवाह में कमी होने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. इससे उनकी फ्यूल सप्लाई बंद हो जाती है और मांसपेशियां जैसे ही कमजोर होती हैं, दर्द व चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है.

तनाव से बाहर आएं

जिस दिन आपको लगे कि आपका मूड और स्ट्रेस लेवल आपकी फिजीकल कंडीशन पर असर डाल रहा है, सचेत हो जाएं और यह पता लगाएं कि कौन-सी स्थिति और लोगों की वजह से आपको तनाव हो रहा है. जिंदगी में कुछ स्थितियों और लोगों से बचना मुश्किल होता है जैसे ट्रैफ्रिक, काम के दबाव और गुस्सैल बॉस से.

बेहतर होगा कि इन स्थितियों को पहले ही समझकर इन पर काम करना आरंभ कर दें. आप स्थिति को आसान बनाने का कोई तरीका ढूंढ सकते हैं. म्यूजिक सुनें या फिर मूवी देखें या हो सके तो दोस्तों के साथ गप्पें मारें. गहरी सांस लें, मेडीटेशन करें या कुछ समय एकांत में बिताएं.

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कल्पना करें कि आप समुद्र किनारे बैठी हैं और ठंडी-ठंडी हवाएं आपको छू रही हैं. स्ट्रेचिंग व अन्य एक्सरसाइज करते भी आप स्ट्रेस लेवल को कंट्रोल कर सकती हैं. सैर को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. एक्टिव रहना बहुत अनिवार्य है.

इससे आप तनाव से भी मुक्ति पा लेंगी और पीठ दर्द से भी. अपने लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव कर आप पीठ दर्द को कह सकती हैं बाय-बाय.

 

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