वर्कप्लेस पर SEXUAL HARASSMENT रोकिए-पहचानिए इन 5 लक्षणों को

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Sexual Harassment
Sexual Harassment at workplace

आमतौर पर महिलाएं कहीं सुरक्षित नहीं है. घर हो या बाहर असुरक्षा की भावना उन्हें घेरे रहती हैं. वजह भी साफ है.  महिलाओं के खिलाफ आए दिन अपराध बढ़ते जा रहे हैं.

वर्किंग प्लेस पर भी महिलाओं के साथ छेड़खानी से लेकर Sexual Harassment (यौन शोषण) की कई गंभीर शिकायतें अक्सर सुनने को मिलती हैं. लेकिन यदि थोड़ी सावधानी रखकर इन लक्षणों को पहचान लिया जाए तो समय पर कोई कदम उठा सकती हैं.




जानिए क्या है Sexual Harassment रोकने के लिए बनी विशाखा गाइडलाइंस

1-यदि कोई जानबूझ कर अपनी महिला कर्मचारी के शरीर को स्पर्श करने की कोशिश करता है, तो यह यौन शोषण है.

2-यदि कोई अधिकारी यौन संबंध बनाने के लिए महिला कर्मचारी पर दबाव बनाता है या अनुरोध करता तो यह भी इसी दायरे में आएगा.




3-संबंध बनाने के बदले तरक्की देने की बात करना यौन शोषण है.

4-किसी के कपड़ों-चलने-फिरने के तरीके पर व्यंग्य करना भी यौन शोषण का एक ही हिस्सा है.

5- अशोभनीय और आपत्तिजनक शारीरिक, मौखिक व्यवहार जैसे अश्लील फोटो या वीडियो दिखाना, भद्दे इशारे करना भी यौन शोषण ही कहलाएगा.




कार्यस्थल पर यौन शोषण और उत्पीड़न रोकने के लिए1997 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशाखा गाइडलाइंस बनाई गई है. सुप्रीम कोर्ट ने एक शिकायत कमिटी, एक विशेष परामर्शदाता और शिकायतों की जांच के लिए अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने की सिफारिश की है.

इस शिकायत कमिटी की अध्यक्षऔर कम से कम आधी सदस्य महिलाएं होंगी.

संस्थान के अंदर के लोगों के दबाव को रोकने के लिए इस कमिटी में किसी तीसरे पक्ष को भी शामिल किया जा सकेगा.

शिकायत को गोपनीय रुप से निपटाए जाने का निर्देश है.

यौन शोषण की जांच करने के लिए बनाई गई कमिटी संबंधित सरकारी विभाग को अपनी वार्षिक रिपोर्ट भेजेगी.

इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि पीड़ित को अपने दफ्तर में किसी भी तरह से सताया नहीं जाए.

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