CERVICAL CANCER से बचने के लिए पहचाने इन लक्षणों को

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cervical cancer
Identifiy these symptoms to avoid cervical cancer

मोनिका अग्रवाल:

महिलाओं को प्रभावित करने वाले सभी कैंसरों में Cervical Cancer यानी ग्रभाशय ग्रीवा का कैंसर भारत में कैंसर संबंधी मौतों का दूसरा सबसे आम कारण है. यह मुख्यता ह्यूमन पेपिलोमा वायरस या एचपीवी के कारण होता है. गर्भाशय में सेल्‍स की अनियमित वृद्धि को सर्वाइकल कैंसर कहते हैं.

यह एक ऐसी स्थिति है जो मुख्यतया गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स की परत या गर्भाशय के निचले हिस्से को प्रभावित करती है. यह कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है और समय के साथ पूर्ण विकसित हो जाता है .




एचपीवी के कारण 

बार-बार गर्भधारण करने, कम उम्र में यौन संबंध बनाने, धूम्रपान करने या एक से अधिक साथी से यौन संपर्क बनाने पर ऐसा होता है. एचपीवी संक्रमण यौन संपर्क या त्वचा संपर्क के माध्यम से फैलता है. कुछ महिलाओं में गर्भाशय-ग्रीवा की कोशिकाओं में एचपीवी संक्रमण लगातार बना रहता है और इस रोग का कारण बनता है.




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 जानकारी का अभाव

सर्वाइकल कैंसर संक्रामक रोग नहीं है. देश के ग्रामीण इलाकों में जानकारी के अभाव में अधिकतर महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की वजह से मौत हो जाती है.




इसके साथ ही लोक-लाजवश भी कई महिलाएं अपनी इस समस्या को दूसरे से कह नहीं पाती है. इसी का नतीजा है कि विश्व के बाकी देशों के मुकाबले भारत में सर्वाइकल कैंसर तेजी से अपने पैर पसार रहा है .

आंकड़े क्या कहते हैं?

भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के लगभग 1,22,000 नए मामले सामने आते हैं, जिसमें लगभग 67,500 महिलाएं होती हैं. कैंसर से संबंधित कुल मौतों का 11.1 प्रतिशत कारण सर्वाइकल कैंसर ही है.

यह स्थिति और भी खराब इसलिए हो जाती है कि देश में मात्र 3.1 प्रतिशत महिलाओं की इस हालत के लिए जांच हो पाती है, जिससे बाकी महिलाएं खतरे के साए में ही जीती हैं.

नेशनल इंस्ट्टियूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (एनआईसीपीआर) के पिछले साल किए अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि हर आठ मिनट में भारत की एक महिला की मौत सर्वाइकल कैंसर की वजह से होती है.भारत में सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित महिलाओं की दर 2.4% बढ़ी है, जबकि विश्व स्तर पर यह आंकड़ा 1.3% है.

लाइलाज नहीं

अगर समय पर इस कैंसर के बारे में पता चल जाए तो इसका इलाज आसानी से हो सकता है, लेकिन इसका पता शुरुआत में नहीं चल पाता है. अगर नियमित चेकअप कराते रहें तो इस बीमारी का पकड़ में आना कोर्इ बड़ी बात नहीं है.

समय पर स्क्रीनिंग और रोग का पता लगाना सर्विकल कैंसर से मुकाबला करने के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं क्योंकि यह पूरी तरह से इलाज योग्य स्थिति है.

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 कैंसर के मुख्य लक्षण

कैंसर के मुख्य लक्षणों में योनि से असामान्य रक्त स्त्राव, रजोनिवृत्ति या यौनसंपर्क के बाद और यौन क्रिया के दौरान योनि से रक्त स्त्राव, मासिक धर्म की सामान्य से अधिक मात्रा या लंबी अवधि, असामान्य योनि स्राव और दर्द प्रमुख हैं .यही नही कैंसर ट्यूमर पेल्विस वाॅल, एबडोमिनल, बैक पर दबाव डालता है और इसके साथ पैरों में दर्द, सूजन भी हो सकती है.

कैंसर को रोकने के सुझाव

महिलाओं को संक्रमण से बचने के लिए जीवनशैली में परिवर्तन करने चाहिए. इसमें कई साथियों के साथ यौन संपर्क से बचाव, नियमित जांच, धूम्रपान का त्याग, फलों, सब्जियों व साबूत अनाज का सेवन और शरीर का वजन ठीक रखना प्रमुख कदम है.

जांच

Cervical Cancerपैप परीक्षण से इस रोग का पता लगाया जा सकता है. पैप परीक्षण के साथ, गर्भाशय ग्रीवा से कोशिकाओं का एक सतही नमूना नियमित पेल्विक टैस्ट के दौरान एक ब्रश से लिया जाता है और कोशिकाओं के विश्लेषण के लिए एक प्रयोगशाला में भेजा जाता है.

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क्या कहते हैं डॉक्टर?

वालिया नर्सिंग होम की  वरिष्ठ चिकित्सक डाक्टर सरोज ऐरन  ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर का इलाज उस स्टेज पर निर्भर करता है, जिस स्थिति में कैंसर का पता चलता है.

आमतौर पर शुरुआती अवस्था में सर्वाइकल कैंसर के इलाज में सर्जरी का विकल्प खुला रहता है. ऑपरेशन के जरिए गर्भाशय को निकाल दिया जाता है, जिसे हिस्टेरेक्टॅमी कहा जाता है.

जिन महिलाओं का कैंसर शुरुआती अवस्था से आगे बढ़ चुका होता है, उनके लिए इलाज में कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी का प्रयोग किया जाता है. लैप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी से भी सर्विक्स कैंसर का इलाज किया जाता है.

ध्यान देने योग्य बातें

बहुत सारे लोगों का मानना है कि अगर उनके परिवार में यह कैंसर पहले किसी को नहीं हुआ है तो उन्हें भी नहीं होगा. लेकिन सच तो यह है कि परिवार में किसी को भी सर्वाइकल कैंसर ना होने के बावजूद इसके होने का खतरा होता है.

कोई लक्षण ना होने के बाद भी आपको एचपीवी संक्रमण हो सकता है. टीके लगने के बाद भी महिलाओं को नियमित रूप से पैप स्मीयर कराते रहना चाहिए.

इस दवा की मदद से शरीर खुद लड़ेगा कैंसर के खिलाफ

हाई सिक्योरिटी वाली लैब क्योरवैक में नयी दवाओं की खोज चल रही है. सबसे ज्यादा उम्मीदें राइबो न्यूक्लिक एसिड आरएनए से लगायी जा रही है. यह डीएनए का साथी मोलेक्यूल है और बीमारी के खिलाफ इम्यून सिस्टम को सक्रिय करता है.

 

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