‘चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर ‘

81
साईं बाबा के वचन
साईं बाबा के वचन

संयोगिता कंठ

कहा जाता है कि अपने भक्तों का सम्मान हैं साईं. हर गुरुवार यानी बृहस्पतिवार को शिरड़ी के साईंबाबा मंदिर हीं नहीं देश भर के साईं मंदिरों में दर्शन के लिए भीड़ लगी रहती है और लाखों लोग इस दिन साईं का व्रत भी रखते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं साईं नाम की महिमा




साईं बाबा और उनकी महिमा:

साईं बाबा को एक चमत्कारी पुरुष, अवतार और भगवान का स्वरुप माना जाता है.
इनको भक्ति परंपरा का प्रतीक माना जाता है.
साईं का मूल स्थान महाराष्ट्र में शिरडी है, जहां पर भक्त इनके स्थान के दर्शन के लिए जाते हैं.
हर धर्म के मानने वाले साईं में आस्था रखते हैं.
साईं की उपासना गुरुवार के दिन विशेष रूप से की जाती है.
साईं की उपासना तीन रूपों में की जाती है.
चमत्कारी पुरुष के रूप में, भगवान के रूप में और गुरु के रूप में.
गुरु के रूप में इनकी पूजा उपासना सबसे उत्तम मानी जाती हैं.




साईं बाबा ने हमेशा श्रद्धा और सबूरी पर ज़ोर दिया है . माना जाता है कि उनके 11 वचनों में जीवन का सार और हर समस्या का समाधान है.

साईं बाबा के वचन-

पहला वचन:

जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा.‘ 

साईं बाबा की लीला स्थली शिरडी रही है. इसलिए साईं कहते हैं कि शिरडी आने मात्र से समस्याएं टल जाएंगी. जो लोग शिरडी नहीं जा सकते उन्हें अपने इलाके में साईं मंदिर जाना चाहिए.




दूसरा वचन:

चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर 
 साईं बाबा की समाधि की सीढ़ी पर पैर रखते ही भक्तों के दुःख दूर हो जाएंगे, लेकिन मन में श्रद्धा भाव का होना जरूरी है. 

तीसरा वचन:

त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा.
 साईं बाबा कहते हैं कि मैं भले ही शरीर में न रहूं. लेकिन जब भी मेरा भक्त मुझे पुकारेगा, मैं दौड़ के आऊंगा और हर तरह से अपने भक्त की सहायता करूंगा.

चौथा वचन:

मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस.
 हो सकता है मेरे न रहने पर भक्त का विश्वास कमजोर पड़ने लगे,लेकिन भक्त को विश्वास रखना चाहिए कि समाधि से की गई हर प्रार्थना पूर्ण होगी.

पांचवां वचन:

‘मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो.’
साईं बाबा कहते हैं कि मैं केवल शरीर नहीं हूं. मैं अजर-अमर अविनाशी परमात्मा हूं.

छठा वचन:

मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए.
 जो कोई भी व्यक्ति सच्ची श्रद्धा से मेरी शरण में आया है. उसकी हर मनोकामना पूरी हुई है.

सातवां वचन:

जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का.
 जो व्यक्ति मुझे जिस भाव से देखता है, मैं उसे वैसा ही दिखता हूं. यही नहीं जिस भाव से कामना करता है, उसी भाव से मैं उसकी कामना पूर्ण करता हूं.

आठवां वचन: 

भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा.
 जो व्यक्ति पूर्ण रूप से समर्पित होगा उसके जीवन के हर भार को उठाऊंगा. और उसके हर दायित्व का निर्वहन करूंगा.

नौवां वचन:

‘आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वो नहीं है दूर.’
 जो भक्त श्रद्धा भाव से सहायता मांगेगा, उसकी सहायता मैं जरूर करूंगा.

दसवां वचन:

‘मुझमें लीन वचन मन काया , उसका ऋण न कभी चुकाया.’
 जो भक्त मन, वचन और कर्म से मुझ में लीन रहता है, मैं उसका हमेशा ऋणी रहता हूं.

ग्यारहवां वचन: 

धन्य धन्य व भक्त अनन्य , मेरी शरण तज जिसे न अन्य. 
साईं बाबा कहते हैं कि मेरे वो भक्त धन्य हैं जो अनन्य भाव से मेरी भक्ति में लीन हैं.
साईं बाबा के वचन को पढ़ने के बाद साईं बाबा का स्मरण करें, माना जाता है कि इससे साईं बाबा की कृपा जरूर मिलेगी.

Facebook Comments