कोई भी पूजे साईं को, वो तो हर दिल में है

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saibaba
साईंबाबा

हमारे देश में  भगवान और देवी देवताओं की पूजा तो होती ही है, लेकिन साधू संतों की पूजा को भी विशेष महत्व दिया गया है. ऐसे ही एक संत हैं साईंबाबा . साईंबाबा देश के सबसे महान संतों में माने जाते हैं और पूज्यनीय संतों में सर्वोपरी हैं. शिरडी के साईं बाबा के भक्तों की तादाद देश में सबसे ज्यादा है. हर गुरुवार को साईं बाबा के मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन भी होता है.

साईंबाबा के व्रत के नियम और विधि

साईंबाबा के पूजन के लिए वीरवार यानि गुरुवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता हैं. साईं व्रत कोई भी कर सकतें हैं. ये व्रत कोई भी जाति-पाति के भेद भाव बिना कोई भी व्यक्ति कर सकता है. किसी आसन पर पीला कपडा बिछा कर उस पर साईं बाबा का फोटो रख कर स्वच्छ पानी से पोछ कर चंदन या कंकु का तिलक लगाना चाहिये और उन पर पीला फूल या हार चढाना चाहिये. अगरबत्ती और दीपक जलाकर साईं व्रत की कथा पढ़ना चाहिये और साईं बाबा का स्मरण करना चाहिये और प्रसाद बाटना चाहिये अगर संभव हो तो साईं बाबा के मंदिर में जाकर भक्तिभाव से बाबा के दर्शन करना चाहिए.

शिरडी के साईंबाबा के व्रत की संख्या 9 हो जाने पर अंतिम व्रत के दिन पांच गरीब व्यक्तियों को भोजन और सामर्थ्य अनुसार दान देना चाहिए. इसके साथ ही साईंबाबा की कृ्पा का प्रचार करने के लिये 7, 11, 21 साई पुस्तकें, अपने आस-पास के लोगों में बांटनी चाहिए.  इस प्रकार इस व्रत को समाप्त किया जाता है.

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