19 साल पहले पार्टी की कमान संभालने वाली SONIA GANDHI क्या जिम्मेदारियों से हो गईं मुक्त?

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प्रतिभा ज्योति:

लंबे इंतज़ार के बाद कार्यकर्ताओं की सालों पुरानी मांग पूरी हो गई. राहुल गांधी की ताजपोशी हो गई. वे कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए.  साथ ही 19 साल से इस पद पर मौजूद Sonia Gandhi का कार्यकाल खत्म हो गया. तो क्या सोनिया जिम्मेदारियों से मुक्त हो गई हैं?




राहुल कांग्रेस कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे शख्स हैं. उनसे पहले मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरु, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के हाथों में पार्टी की कमान रही है. 19 साल पहले अप्रैल 1998 में जब सोनिया ने कांग्रेस की कमान संभाली, तब पार्टी की नैया डंवाडोल थी.




मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता चाहते थे कि वे पार्टी अध्यक्ष पद स्वीकार करें.  लेकिन उन्होंने  इसे स्वीकार नहीं किया और कभी भी राजनीति में नहीं आने की कसम खाई थी. इसके बाद 1996 में नरिसम्हा राव की सरकार जाने के बाद पार्टी की चिंता और बढ़ गई.




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1997 में पार्टी को अंदरुनी कलह से बचाने के लिए सियायत में आने को राजी हुईं और आखिरकार अप्रैल 1998 में वो कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं. लेकिन समय बदला और पार्टी के नेतृत्व की जिम्मेदारी राहुल गांधी पर आ गई है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या सोनिया गांधी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गई हैं?

कांग्रेस ने कहा है कि सोनिया गांधी केवल कांग्रेस अध्यक्ष पद से रिटायर हो रही हैं राजनीति से नहीं. यानी राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद भी पार्टी उनसे मार्गदर्शन लेती रहेगी. यानी वे पार्टी की मुख्य मार्गदर्शक रहेंगी.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने Tweet कर स्पष्ट किया कि- सोनिया गांधी ने अपना दायित्व राहुल गांधी को सौंपा है. वे अध्यक्ष के रुप में रिटायर हो रही हैं राजनीति से नहीं. उनका आशीर्वाद, बुद्धिमता एवं कांग्रेस की विचारधारा के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी.

राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद भी सोनिया गांधी यूपीए अध्यक्ष और कांग्रेस संसदीय दल की नेता के रुप में अपनी भूमिका में रहेंगी. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत का कहना है कि सोनिया गांधी की कांग्रेस और देश दोनों ही जगह भूमिका बनी रहेगी.

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यह तो तय है कि राहुल गांधी की मां, राजीव गांधी की पत्नी और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष होने के नाते पार्टी में उनकी अहमियत हमेशा बनी रहेगी. सोनिया पार्टी के मार्गदर्शक की भूमिका में उस तरह नहीं होंगी जैसा कि भाजपा में लाल कृष्ण आडवाणी है.

एक और जिम्मेदारी जो सोनिया को पूरी करनी है वह है बहू लाने की. राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद अब कार्यकर्ताओं और मीडिया के मन में अगला सवाल होगा वे शादी कब करेंगे. हालांकि इस पर निर्णय राहुल को लेना है.

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