SOCIAL NETWORKING SITES से क्या हमारे अपनो के बीच रिश्तों में आ रही है दूरियां?

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Social Networking Sites
social networking sites negative effects on personal relationship

मोनिका अग्रवाल:

Social Networking Sites हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं. इंटरनेट के बढ़ते माध्यमों और सब तक इसकी पहुंच के कारण अब ज्यादतर लोग किसी न किसी  ऐसे साइट्स का हिस्सा बन गए हैं.

शुरुआत में Social Networking Sites आपसी संबंधों को मजबूती दी, पुराने दोस्तों को मिलवाया, सबको अपना विचार रखने का मौक दिया लेकिन देखने में आ रहा है कि नेटवर्क बढ़ाने वाले ये साइट्स धीरे-धीरे यह पारिवारिक रिश्‍तों के नेटवर्क में बाधा पहुंचा रहे हैं. वे परिवार और रिश्तों में दूरी पैदा करने और दरार पैदा करने का भी कारण बनते जा रहे हैं.




पहले जहां परिवार के लोगों के साथ बैठकर बात करने, चाय पीने और साथ खाना खाने का आनंद था, वो आनंद अब इन साइट्स के कारण छूटता जा रहा है. अब अपनों से ज्यादा वक्त हम वैसे दोस्तों के लाइक्स और कमेंट्स को देने लगे हैं जिनमें से ज्यादतर को जानते ही नहीं.

खत्म होती जा रही है प्राइवेसी

मनोचिकित्सक आशिमा  का कहना है कि संबंधों के खत्म होने में सोशल मीडिया की भूमिका बढ़ती ही जा रही है, क्योंकि यह निजता को भंग करने वाला है. लगातार सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सक्रिय रहने के कारण हम अन्य लोगों को समय नहीं दे पाते हैं.




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परिवार और पड़ोसियों के साथ बातचीत कम हो गई है लेकिन सोशल मीडिया के दोस्तों के साथ दिन-भर कुछ न कुछ गतिविधियों में शामिल रहना लोगों को मानसिक रुप से कमजोर बना रही है और डिप्रेशन में डाल रही है.

संबंधों में आने लगी है खटास

Social Networking Sitesसोशल मीडिया के कारण लोगों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं, जो संबंधों में दरार लाने वाला साबित हो रहा है. सोशल मीडिया पर प्रसारित झूठी या आधी-अधूरी कहानियों के प्रभाव में आकर लोग अपने साथी से अव्यवहारिक अपेक्षाएं पाल लेते हैं और उन पर उसी तरह के अवास्तविक जीवन जीने का दबाव डालने लगते हैं.




सोशल साइट्स का अत्यधिक इस्तेमाल करने से किसी भी रिश्ते की जड़ों जैसे विश्वास, निजी राय और व्यक्ति की स्वतंत्रता में कमी आती है. दूसरों की देखादेखी करने का चलन बढ़ने लगता है.

सोशल मीडिया पर अक्सर लोग केवल खुशी वाली तस्वीरें शेयर करते हैं जो दूसरों में ईर्ष्या, जलन और कुंठा पैदा करती हैं. हम दूसरों के जीवन के उसी पहलू को देखते हैं जो वे सोशल मीडिया पर हमें दिखाते हैं.

मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण

Social Networking Sitesरिश्तों में बढ़ता तनाव और विश्‍वसनीयता में कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही है. पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया इसकी एक बड़ी वजह बनकर सामने आया है. पति या पत्नी, बच्चों या मां-बाप या घर के दूसरे सदस्यों की उपेक्षा करके व्‍हाट्सएप, फेसबुक पर व्यस्त रहना संबंधों में बड़ी दरार डाल रहा है.

Social Networking Sites
मोनिका अग्रवाल

ऐसा देखने में आया है कि फेसबुक जैसी सोशल साइट्स के यूजर्स इन पर मौजूद अपने फ्रेंड्स से अपने साथी की जोड़ी से तुलना करने लगते हैं जो संबंधों में तनाव का कारण बनता है.

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इस समस्या को स्मार्टफोन ने औऱ बढ़ा दिया है. रात में सोते समय में भी स्मार्टफोन या लैपटॉप पर लगे रहने से बेडरुम में किसी ‘तीसरे व्यक्ति’ की उपस्थिति महसूस होती है. यह सब पति-पत्नी के बीच रोमांस पनपने के लिए जरूरी निजता को खत्म कर देता है.

सोशल साइट्स पर जरुर रहें लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि यह आपकी निजी जिंदगी को प्रभावित नहीं करें. घर-परिवार की अपेक्षा सोशल साइट्स पर ज्यादा समय बिताने से निजी रिश्तों से लेकर मानसिक सेहत तक को खतरा है. इसलिए Social Networking Sites पर एक सीमा तक ही समय दें.

सोशल साइट्स पर यदि कोई फैमिली फोटो डाल रहे हों  या कोई निजी बात साझा करने जा रहे हों तो परिवार के सदस्यों से भी इस बारे में बात कर लें. जब आपका साथी आपसे ज्यादा सोशल नेटवर्किंगसाइट पर समय बिताता है तो आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है.

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