पहले के बाद दूसरे बच्चे में 3 YEARS का GAP नहीं रखने से होने वाली 10 परेशानियां

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नीलम झा:

Population Control यानी बढ़ती आबादी पर रोक के लिए आजकल एक विज्ञापन चल रहा है जिसमें बसंती कहती है कि उसके पास एक तांगा है और जाने वाले लोग हज़ारों. इसलिए आप आबादी पर काबू करें, इसके लिए वो मौसी की सलाह का ज़िक्र करते हुए बहुत सारे उपाय बताती हैं, उसमें एक खास उपाय है देर से शादी के बाद दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतर.

दो बच्चों के बीच अंतर का ये उपाय सरकार के परिवार नियोजन विज्ञापनों में बरसों से बताया जा रहा है , लेकिन आमतौर पर घरों पर इस पर खास ध्यान नहीं दिया जाता. ये सच है कि अब लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ गई है क्योंकि पढ़ाई लिखाई करने से अब आम तौर पर 18 साल के बाद ही शादी होने लगी है. दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ये आयु सीमा 21 से 30 के बीच हो गई है. देर से शादी होने से पहला बच्चा होने में तो देर होने लगी है, लेकिन इसी बढ़ती उम्र की वजह से अब कपल सोचते हैं कि दूसरा बच्चा भी जल्दी हो जाए. 

Doctors मानते है कि दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतर सिर्फ़ परिवार नियोजन या आबादी पर काबू करने के लिए ही ज़रुरी नहीं है बल्कि मां की Health के लिए के भी जरुरी है.  कुछ डॉक्टरों का ये भी मानना है कि शादी में देरी, परिवार के दबाव में या जानकारी के अभाव में अक्सर पहला बच्चा बिना प्लानिंग के होता है लेकिन कपल्स को दूसरा बच्चा बिना प्लानिंग के नहीं करना चाहिए.

दूसरे बच्चे में तीन साल का या कम से कम 2 साल का ज़रुर होना चाहिए, क्योंकि, इससे न केवल बच्चा स्वस्थ पैदा होता है बल्कि मां भी हेल्दी रहती हैं. अक्सर देखने में आता कि दूसरा बच्चा जल्दी होने के कारण पहले बच्चे की उपेक्षा हो जाती है. यदि दो बच्चों में अंतर होता है तो मां पर जल्दी ही दूसरे बच्चे की ज़िम्मेदारी नहीं पड़ती.

 दो बच्चों के बीच अंतर नहीं होने से हो सकती है 10 तरह की परेशानियां..

1- दूसरी बार प्री मैच्योर बेबी होने का खतरा रहता है.

2-पहले और दूसरे बेबी में 2 साल या उससे भी कम का अंतर  होने से Miscarriage का खतरा बढ़ जाता है.

3-दूसरी बार जल्दी प्रेग्नेंसी से बेबी का वजन कम हो सकता है.

4- पहले बच्चे को मां का पूरा दूध नहीं मिल पाता .

5- जल्दी प्रेगनेंट होने से मां पहले Baby पर ध्यान नहीं दे पाती इसका असर उसकी हेल्थ पर पड़ता है.

6-जल्दी–जल्दी बच्चे पैदा होने या प्रेगनेंट होने से महिला के शरीर को Recovery  का समय नहीं मिल पाता है. इस वजह से महिला के शरीर में आयरन और कैल्शियम की कमी के अलावा Anemia एनिमिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है. याद रखिए प्रेग्नेंसी और डिलीवरी दोनों के लिए महिला का शारीरिक रूप से मजबूत होना जरूरी है.

7-बिना पर्याप्त अंतर के प्रेग्नेंसी से इसका असर महिला के हार्ट पर भी पड़ता है. डिलीवरी के वक्त हार्ट से जुड़ी परेशानियों की आशंका बढ़ सकती है.

8-डिलेवरी के दौरान शरीर से जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं,  इन्हें दोबारा तैयार होने में कम से कम एक साल का वक्त लगता है.

9-दो बच्चों में तीन साल से कम का फर्क रखने पर मां हमेशा थकावट महसूस करेंगी क्योंकि शरीर को उतनी एनर्जी ही नहीं मिल पा रही और उस पर बोझ बढ़ता जाता है. ब्रेस्ट फीडिंग कराने की वजह से भी मां के शरीर को ज़्यादा एनर्जी की ज़रुरत होती है और दो बच्चों को संभालना आसान काम नहीं है.

10-आजकल बच्चों को पालने, उनकी ड्रेस, दवाएं और दूसरे खर्चे ही इतने ज़्यादा होने लग गए हैं कि दूसरे बेबी का मतलब फिर से अपने पर खर्चों का बोझ डालना है.

और चलते चलते एक बात और  दो बच्चों में अंतर का मतलब सेक्स लाइफ से दूर होना कतई नहीं हैं .आप सेफ्टी रखेंगी तो अंतर के साथ साथ सेक्स लाइफ को भी ज़्यादा Enjoy कर सकेंगी, सो डियर, एंजाय द लाइफ..

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