क्या आपको lOVE PROPOSE करने के लिए BOYFRIEND का इंतजार है ?

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Love Propose
Girl proposing boy

जूली जयश्री:

किसी से प्यार का इजहार करना हो तो सबसे आसान है उसे आई लव यू कह देना. लेकिन देखा जाता है कि लड़कियां प्यार तो करती हैं पर अपने पार्टनर से प्यार का इजहार नहीं कर पातीं. किसी लड़की को को Love Propose करने का टिप्स मांगते हुए नहीं देखा है या गुलाब का फूल लेकर घुटने पर खड़े होते  हुए तो बिल्कुल नहीं ?  आखिर ऐसी क्या वजह है कि आज भी प्यार का इजहार केवल Boyfriend की ही जिम्मेदारी मानी जाती है ?




प्यार को महसूस करने का मामला हो या प्यार निभाने का लड़कियां हमेशा आगे ही नहीं होती ब्लकि अपने रिश्ते को लेकर गंभीर भी होती है, लेकिन जैसे ही बात जब Propose करने की आती हैं तो स्थिति बिल्कुल अलग हो जाती है . इस वजह से कई बार मन की बात मन में ही रह जाती है और जिंदगी भर इसका मलाल रह जाता है. अक्सर जिंदगी में आगे बढ़ जाने के बाद भी इंसान अपना पहला प्यार नहीं भूलता. इसलिए अच्छा है कि यदि कोई आपको अपना मि. परफेक्ट लग रहा हो तो आगे बढ़कर उससे प्यार का इजहार करें…




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यही बात हमने जानना चाहा कि कुछ यंग लड़कियों से. आत्मविश्वास की कमी, कोई डर, अहं या वो क्या चीज है जिसकी वजह से के लड़कियां चाहते हुए भी अपने प्यार का इजहार नहीं कर पातीं और इस इंतजार में रहती हैं कि उनका ब्यॉयफ्रेंड आगे बढ़कर ‘आई लव यू’ बोले.

सिविल सर्विस की तैयारी कर रही मीनाक्षी ने माना कि ये सच है कि लड़कियां लड़कों से Propose करवाना अपना हक समझती हैं ,उन्हें लगता है कि ये लड़कों की ड्यूटी है उसे ही पूरा करना चाहिए . कई बार मन में आशंका भी होती है कि यदि उसने मना कर दिया तो क्या होगा?




वहीं इस मामले में शाल्वी का कहना था कि अब ऐसा नहीं है कि लड़कियां लड़कों से प्रपोजल मिलने का इंतजार करती हैं मैंने जिसके लिए खास महसूस किया बिना किसी झिझक या इगो के उसके सामने प्रस्ताव रख दिया. एमएनसी में काम करने वाली श्रेया ने माना कि मेरे लिए प्रपोज करना आसान नहीं था , फिर भी मैंने बिना किसी परवाह अपनी बात कह दी थी. पर मेरा अनुभव यही कहता है कि आज भी लड़कियों का प्रपोज करना सही नहीं माना जाता है, इससे जहां लड़कों की शान बढ जाती है वहीं लड़की के चरित्र पर सवाल उठने का डर भी रहता है.




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मेडिकल छात्रा नेहा ने खुलकर स्वीकार किया कि हां मुझे प्रपोज करने में बदनामी का डर लगता है, मुझे ऐसा लगता है कि यदि मैं प्रपोज करुंगी तो लगेगा कि मैं उसके लिए मरी जा रही हूं. मनोवैज्ञानिक डॉ.नीलम सक्सेना इसके पीछे समाजिक अवधारणा को जिम्मेदार मानती हैं जहां आज भी महिलाओं के लिए अपनी फिजिकल फिलिंग बताना या अपने संबंध को आगे बढकर स्वीकार करना चरित्र का सवाल माना जाता है. इसलिए लड़कियां किसी को प्रपोज करने में हिचकती हैं, हालांकि बाद में इसके लिए उनके पछताना पड़ सकता है लेकिन आज का यंग जेनरेशन भी इस साइकोलॉजिकल प्रेशर से पूरी तरह निकलने में असफल साबित हो रहा है.

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