शनि के दंड से बचने के लिए कौन से तीन शक्तिपीठ हैं?

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शनि शक्तिपीठ singnapur
शनि शक्तिपीठ

ऐसा माना जाता है कि शनि देव की कृपा जिस पर हो जाती है उसे फिर जीवन में किसी तरह का कष्ठ नहीं होता. अगर शनि की दृष्टि वक्र है तो फिर उसका छुटकारा आसान नहीं है, लेकिन शनि देव के शक्ति पीठों पर दर्शन और पूजा-पाठ से कष्टों से मुक्ति मिलने की बात की जाती है. वैसे तो देश भर में शनि देव के कई पीठ है लेकिन तीन ही प्राचीन और चमत्कारिक पीठ है, जिनका बहुत महत्व माना जाता है. इन तीन पीठ पर जाकर ही पापों की क्षमा मांगी जा सकती है. कहा जाता है कि यहां  जाकर ही लोग शनि के दंड से बच सकते हैं.




‍ज़िंदगी में किसी भी तरह की मुश्किल, परेशानी हो या शनि ग्रह का प्रकोप बताया गया हो तो लोग यहां जाकर लोग भय‍मुक्त हो जाते हैं. मान्यता के अनुसार इससे तुरंत फायदा होता है .




शनि शिंगणापुर

कुछ महीने पहले महिलाओं के जिस मंदिर में प्रवेश को लेकर बहुत हंगामा हुआ था, वह है शनि शिंगणापुर का मंदिर. महाराष्ट्र के एक गांव शिंगणापुर में है, शनि भगवान का प्राचीन स्थान. शिंगणापुर गांव में शनिदेव का अद्‍भुत चमत्कार है. इस गांव के बारे में कहा जाता है कि यहां रहने वाले लोग अपने घरों में ताला नहीं लगाते हैं और आज तक के इतिहास में यहां किसी के घर या दुकान पर कभी चोरी नहीं हुई है.




ऐसी मान्यता है कि बाहरी या स्थानीय लोगों ने यदि यहां किसी के भी घर से चोरी करने की कोशिश भी की  तो वह गांव की सीमा से पार नहीं जा पाता है और उससे पहले ही शनि देव का प्रकोप उस पर हावी हो जाता है. इस स्थान पर पूजा का विशेष महत्व माना जाता है और देश भर से ही नहीं दुनिया भर से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं .

सिद्ध शनिदेव  

यह शनि मंदिर भी दुनिया के प्राचीन शनि मंदिरों में से एक है. माना जाता है कि यहां मांगी गई मुराद जल्दी पूरी हो जाती है.  उत्तरप्रदेश के कोशी से छह किलोमीटर दूर कौकिला वन में है यह सिद्ध शनिदेव का मंदिर. इस मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यता है कि यहां शनिदेव के रूप में भगवान कृष्ण विराजमान हैं. रहते हैं.मान्यता के अनुसार जो भी भक्त इस वन की परिक्रमा करके शनि देव की पूजा करेगा वहीं कृष्ण की कृपा पाता है और उस पर से शनि देव का प्रकोप भी हठ जाएगा.

शनिश्चरा मंदिर

माना जाता है कि शनिश्चरा मंदिर में शनि शक्तियों का वास है. मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास है शनिश्चरा मंदिर. मान्यता है कि यहां वह अलौकिक शनिदेव का पिंड है जिसे हनुमानजी ने लंका से फेंका था. यहां शनिश्चरी अमावस्या के दिन मेला लगता है.

इस पीठ में भक्तजन शनि देव पर तेल चढ़ाते हैं और अपने पहने हुए कपड़े, चप्पल, जूते आदि सभी यहीं छोड़कर घर चले जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से पाप और दरिद्रता से छुटकारा मिल जाता है.