WOMEN SAFETY के लिए साईकिल से दुनिया नापने क्यों निकल पड़ीं SABITA MAHATO

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जूली जयश्री:

हमें क्या रोकेंगे ये जमाने वाले, हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के छपरा जिले के एक छोटे से गांव की Sabita Mahato की. उन्होंने साबित किया है कि यदि आपकी सोच पॉजिटिव है तो दुनिया में असंभव जैसा कोई शब्द है ही नहीं है.

तभी तो उन्होंने गंगा-यमुना समेत अन्य नदी और नालों की स्वच्छता के लिए उच्च हिमालय ट्रैक पर साइकिल यात्रा निकाली. इस तरह की यात्रा पहली बार निकाली गई. अब Sabita Mahato Women Safety के लिए साइकिल से दुनिया की यात्रा करने निकल पड़ी हैं.

Padel For Women Mission के तहत वे जागरुकता अभियान चला रही हैं .इस अभियान के तहत वे नेपाल होते हुए दुनिया के 60 देशों की यात्रा करने वाली हैं. सबिता महतो एक माउंनटेनर और साइकलिस्ट हैं जिन्होंने एक बेहतर समाज के निर्णाण के लिए अब तक कई साहसिक यात्राएं कर चुकी हैं.

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बिहार के एक मछली विक्रेता के बेटी सबिता के अंदर इतना साहस और कुछ अलग कर गुजरने का ऐसा जुनून है किवे इसके पहले उन्होंने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का संदेश लेकर देश के 29 राज्यों में 12,500 किलोमीटर का सफर कर चुकी हैं. 173 दिनों में अकेले साइकिल से इतना लंबा सफर तय करने वाली वो पहली भारतीय महिला हैं.

इस मुहिम के तहत उन्होंने हिमालय की सात पहाड़ियों पर साइकिल से दुर्गम यात्रा कर कई रिकार्ड अपने नाम कर लिया है. सविता की यह तीसरी बड़ी साइकिल यात्रा है जो वुमन सेफ्टी के लिए किया जा रहा है .

नेपाल यात्रा के दौरान सबिता ने वुमनिया के साथ अपने अब तक के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं के अंदर असीम ताकत है, जरुरत है तो उसे सिर्फ इसका एहसास करने की. जब आप खुद पर यकीन करना शुरु कर देते हैं तो आपकी क्षमताओं के साथ ही लोगों का भरोसा भी आप पर बढने लगता है.

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वे कहती हैं उन्होंने मैंने जब ऑल इंडिया लेवल का मिशन शुरु किया तो मुझे भी काफी विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन अब स्थिति इसके अपोजिट है. वे कहती हैं कि मैं गणित के उस तर्क में यकीन रखती हूं कि यदि कोई प्रॉब्लम है तो निश्चित ही उसका साल्यूशन भी होगा ही बस आपको उसकी खोज करनी है.

इसी यकीन के साथ मैं बस दो हजार रुपये लेकर घर से निकल पड़ी थी. यदि मैं रास्ते के मुश्किलों और जरुरतों को सोचती तो शायद निकल ही नहीं पाती. आज अपने सफर के दौरान मुझे मंदिर मस्जिद ,गुरुद्वारे से लेकर पुलिस लॉक-अप तक में सोना पड़ा है. वहीं कई जगह पर लोगों ने हर संभव मदद भी की है.

सबिता कहना है कि यात्रा करना लोगों से मिलना आपके अंदर अनुभव और ज्ञान की अजीब ललक पैदा करता है आप जितना हासिल करते जाते हैं भूख उतनी ही बढने लगती है. इसलिए लड़कियों को लेकर सकारात्मक दिशा में सोच बदलने की बेहद जरुरत है.

मैंने अनुभव किया है कि आज महिलाओं की समस्या को ब्रांडिंग करने की परंपरा शुरु हो गई है हमारी लड़ाई या साहस को लड़कों से कपेंयर किया जाता है. हकीकत में हमें खतरा किसी और के पावर से नहीं बल्कि अपने अंदर के डर से है. मैं अपनी यात्रा के दौरान स्कूल कॉलेज के स्टूडेंट्स से मिलती हूं और उनके नजरिये को बदलने का प्रयास करती हूं.

मामला सुरक्षा का हो या अपनी सार्थकता साबित करने का  सिर्फ सेल्फ डिफेंस या इंडिपेंडेंट भर हो जाने से काम नहीं चलेगा हमें अवेयर होने की ज्यादा जरुरत है.

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