फिल्म “पद्मावती” के विवाद पर संजय लीला भंसाली के लिए उमा भारती ने OPEN LETTER में क्या लिखा?

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Open Letter

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने “पद्मावती” फिल्म पर चल रहे विवाद के बीच एक Open Letter लिखा है.  Twitter पर लिखे इस Open Letter में उमा भारती ने फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली का नाम लिए बिना कहा है जब आप किसी ऐतिहासिक तथ्य पर फिल्म बनाते हैं तो उसके फैक्ट को वॉयलेट नहीं कर सकते.




उमा भारती ने अपने पत्र में लिखा है…

तथ्य को बदला नहीं जा सकता. उसे अच्छा या बुरा कहा जा सकता है. सोचने की आजादी किसी भी तथ्य की स्तुति या निंदा का अधिकार हमें देती है. 




रानी पद्मावती की गाथा एक ऐतिहासिक तथ्य है. अलाउद्दीन खिलजी एक व्यभिचारी हमलावर था. उसकी बुरी नजर रानी पद्मावती पर थी तथा इसके लिए उसने चित्तौड़ को नष्ट कर दिया था. 




रानी पद्मावती के पति राणा रतन सिंह अपने साथियों के साथ वीरगति को प्राप्त हुए थे. स्वंय रानी पद्मावती ने अपने उन स्त्रियों के साथ जिनके पति वीरगति को प्राप्त हुए थे, जीवित ही स्वंय को आग के हवाले कर जौहर कर दिया था. 

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उमा भारती ने लिखा है, हमने इतिहास में यही पढ़ा है. आज भी खिलजी से नफरत तथा पद्मावती के लिए सम्मान तथा उनके दुखद अंत के लिए बहुत वेदना होती है. 

आज भी मनचाहा रेस्पांस नहीं मिलने कुछ लड़के लड़कियों पर तेजाब फेंक देते हैं. वो सब किसी भी धर्म जाति के हों मुझे अलाउद्दीन खिलजी के ही वंशज लगते हैं.

मैंने इस फिल्म डाइरेक्टर की पहली भी फिल्में देखी हैं. मैं सोचने की आजादी का सम्मान करती हूं. मानती हूं कि सोचे हुए को अभिव्यक्त करने का भी मानव समाज को एक अधिकार है. किंतु अभिव्यक्ति में कहीं तो एक सीमा होती ही है. जैसे कि आप बहन को  पत्नी और पत्नी को बहन अभिव्यक्त नहीं कर सकते. इसकी संभावना जानवरों में तो हो सकती है लेकिन स्वतंत्र चेतना विश्व के किसी भी देश के किसी भी समाज के लोग इस मर्यादा के उल्लंघन की निंदा ही करेंगे.

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उन्होंने लिखा है इसलिए मेरा कहना यही है, मैंने तो फिल्म देखी नहीं है, किंतु लोगों के मन में आशंकाओं का जन्म क्यों हो रहा है? इन आशंकाओं का लुत्फ मत उठाइए, न इससे कोई वोट बैंक बनाइए.  कोई रास्ता यदि हो सकता है,  जरुरी नहीं कि मैंने जो सुझाया है वही हो, वो रास्ता निकालकर बात समाप्त कर दीजिए.

किंतु यह ध्यान रहे मैं आज की भारतीय महिला हूं, जिस स्थिति में होंगी, भूत, वर्तमान और भविष्य के भारतीय महिलाओं के प्रति यथाश्क्ति अपना कर्तव्य जरुर पूरा करुंगी. 

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