WOMEN RESERVATION BILL को पास कराने की कोशिशें फिर तेज

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Women Reservation Bill
Sonia Gandhi

प्रतिभा ज्योति

संपादक

संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण के बिल को पास कराने के लिए एक बार फिर कोशिशें शुरु हो गईं हैं और 21 साल बाद लगता है कि यदि मौजूदा एनडीए सरकार और कांग्रेस इस मसले पर गंभीरता से प्रयास करें तो Women Reservation Bill पास हो सकता है. बिल अगर पास हो जाए तो अगले आम चुनाव में हर तीसरी सीट पर महिला के बैठने का सपना पूरा हो सकता है. इससे महिलाओं की आवाज़ को सत्ता तक पहुंचाने में ज़्यादा ताकत मिलेगी.




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पिछले आम चुनाव यानी 2014 में बीजेपी के घोषणा पत्र में भी महिलाओं को आरक्षण का बिल पास कराने की बात कही गई थी. सरकार की तरफ से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 2014 में संसद के संयुक्त सत्र में इसे पास कराने की गंभीरता पर ज़ोर दिया था,लेकिन तब से कुछ पास नहीं हो पाया. अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार को चिट्ठी लिखकर इस संसद के शीतकालीन सत्र में पास कराने की मांग की है.




इस बिल को 9 मार्च 2010 में यूपीए सरकार ने राज्यसभा में पास करा लिया था. अब इसे लोकसभा में पास कराना है और बीजेपी और कांग्रेस अगर दोनों साथ वोट करें तो इसे पास करने में कोई परेशानी नहीं होगी. पिछली बार समाजवादी पार्टी और जनता दल यूनाइटेड ने बिल में ओबीसी को आरक्षण देने की मांग रखते हुए मौजूदा बिल का विरोध किया था. अब जेडीयू भी सरकार का सहयोगी दल हो गया है तो इसे पास कराने में सरकार का आसानी हो सकती है.




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# महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में पास करने को लेकर सरकार गंभीर है.
# अरुण जेटली ने इस सिलसिले में कांग्रेस नेताओं से बातचीत, महिला आरक्षण बिल को राज्यसभा के बाद लोकसभा में पास कराने पर बातचीत की है.
# कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल के अलावा मोतीलाल वोरा से जेटली ने सरकार से बातचीत की.
# कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया ने 20 सितम्बर को प्रधानमंत्री को खत लिखा और कहा कि, राज्यसभा में 2010 में हमारे पास बहुमत था तो हमने पास किया, अब लोकसभा में आपके पास बहुमत है, अब लोकसभा में पास कराइये, कांग्रेस साथ देगी.
# सोनिया के खत के बात 21 सितम्बर को संसद भवन में हुई जेटली और कांग्रेसी नेताओं के बीच बातचीत हुई है.
# अगले सत्र में सरकार महिला आरक्षण बिल ला सकती है.

# पहली बार 1996 में इस बिल को लोकसभा में रखा गया था.

#बिल में एक तिहाई सीटों पर आरक्षण का प्रस्ताव रखा गया है यानी लोकसभा की 181 सीटों पर महिलाएं होंगी। हर बार ये सीटों बदल जाएंगीं.

#कुछ राजनीतिक दल सदन में एक तिहाई सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव रखते रहे हैं लेकिन उसके लिए संविधान में एक और बदलाव करना पड़ेगा.

 

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