महीने की गंदी बात पर चुप्पी तोड़ने के लिए SWATI SINGH को मिलेगा ‘काका साहेब कालेलकर सम्मान’

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Swati Singh
Swati Singh

कुछ लोग समाज में थोड़ा हटकर काम करते हैं तो कुछ ऐसे विषय पर काम करते हैं जिस पर कोई लोग चुप्पी साधे रखते हैं. वाराणसी की Swati Singh ने थोड़ा हट कर भी काम किया है और उस विषय पर जिस पर लोग आमतौर पर कुछ बोलना नहीं चाहते.




Swati Singh पीरियड या माहवारी जिसे ‘महीने की गंदी बात’ मान जाता है उस पर लोगों की चुप्पी तोड़ने का प्रयास कर रही हैं और उनके इस काम के लिए उन्हें ‘काका साहेब कालेलकर सम्मान 2017’ से सम्मानित किया जा रहा है.




स्वाती को यह सम्मान 23 दिसंबर 2017 को गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा की ओर से समाज में उनके सकारात्मक  योगदान और सदियों से छिपाए जाने वाले विषय पर चुप्पी तोड़ने के सार्थक प्रयास के लिए दिया जा रहा है.




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23 साल की उम्र में स्वाती ने ‘मुहीम’ एक सार्थक प्रयास वेलफेयर सोसाइटी’ की स्थापना की और गांव की किशोरी और महिलाओं के बीच गई और पीरियड को लेकर समाज में चली आ रही मान्यताओं को तोड़ने के लिए आगे आने को कहा.

मुहीम के ज़रिए स्वाती ने ग्रामीण इलाके में पीरियड या मासिकधर्म जैसे उस मुद्दे पर काम करना शुरू किया है जिस विषय पर यहां के समाज में बात करना भी वर्जित माना जाता है.

वे अपनी संस्था के माध्यम से उत्तर प्रदेश के वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लाक के गांव देलहना, बन्देपुर, बछांव, खनाव, बेटावर, रामपुर, लठिया, खुशीपुर, कादेपुर समेत कई गांवों में ‘Period Alert’ कार्यक्रम चला रहीं हैं.

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स्वाती बताती हैं गांवो में मासिकधर्म पर बात नहीं की जाती है. इसलिए हमने ‘पीरियड अलर्ट’ नामक अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत अलग-अलग माध्यमों के ज़रिए हम महिलाओं और किशोरियों को उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

युवा पत्रकार, लेखिका और एक्टिविस्ट स्वाती की पहल का नतीजा है कि इन गांवों में लड़कियां और महिलाएं न केवल पीरियड पर खुल कर बात कर रही हैं बल्कि अब अपना ‘सैनटरी पैड’ भी खुद ही बनाने लगी है.

महिलाओं को घर के पुराने सूती कपड़े को अच्छी तरह साफ़ करके पैड बनाने की तकनीक सिखाई जाती है जो न केवल सस्ती बल्कि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी उनके लिए अच्छी साबित हो रही है.

वुमनिया की ओर से स्वाती को बहुत शुभकामनाएं

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