PAPA का उधार कैसे चुकाया CHURU की बेटी मंजूबाला ने ?

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मंजूबाला अपने परिवार वालों के साथ

दीप्ति शर्मा:

कहते हैं कि उधार व्यक्ति के जीवन में सबसे बड़े तनाव कारण है. एक बार ले तो वह चुकना मुश्किल हो जाता है, लेकिन औलाद काबिल हो तो वह उधार चुकता हो जाता है. ऐसी ही एक बेटी है जिसका नाम मंजूबाल स्वामी है. जिसने Hammer Throw में देश भर में Churu जिले का नाम रोशन किया है और अपने Papa का उधार चुका दिया. इनका जीवन संघर्ष भरा रहा है लेकिन मंजू ने इस संघर्ष को लक्ष्य बनाकर आगे कदम बढ़ाए.  आज यही काबिल बेटी देश की झोली में सोना बरसा रही है.




मंजूबाला की इस सफलता में उनके पिता ने बहुत योगदान दिया. राजस्थान के चूरू जिले के चांदगोठी गांव की  मंजूबाला का जन्म एक जुलाई 1989 को विजय स्वामी और संतोष स्वामी के घर हुआ. पिता की सादुलपुर तहसील के गांव चांदगोठी में चाय की दुकान थी. मंजू पांच बहनों में सबसे बड़ी हैं. इस दुकान से जैसे-तैसे परिवार का लालन-पालन हो पाता था. गांव के  सरकारी स्कूल में पढ़ाई के दौरान मंजू ने अध्ययन Hammer Throw में अपनी पहचाने बनाने की मन में ठानी.  छोटा गांव था लेकिन उसे कोई कोच नहीं मिला. चांदगोठी से करीब 50 किलोमीटर दूर सादुलपुर में कोच मिले जिन्होंने हैमर थ्रो के गुर सिखाए.

ऐसे की तैयारियां
संसाधनों के अभाव में मंजू ने गांव की गलियों, पड़ोसियों के खाली प्लॉट और सड़कों को अपना कार्यक्षेत्र बनाया.  खाली प्लॉट में हैमर थ्रो की तैयारी की. दौड़ के लिए सड़कों और रेतीले धोरों को चुना। धीरे-धीरे प्रयास शुरू किया और खेल का शेड्यूल बना लिया. इसके बाद सादुलपुर जाकर तैयारी करने लगी. रोजाना सुबह जाकर वापस गांव आना और शाम को गांव में ही तैयारी करना जारी रखा.

मेहनत देख पिता ने लिए उधार
बेटी मंजू की मेहनत और लगन देख  देखकर पिता ने उसकी डाईट और खेल पर होने वाले खर्चे के लिए लोगों से हजारों रुपए  उधार लिए.  उधार लिए रुपयों में से ही पिता ने उन्हें हैमर थ्रो के लिए गोला लाकर दिया. जिससे उसका हौसला बढ़ता चला गया.  वह धीरे-धीरे खेल में पारंगत हो गई.  उसी संघर्ष की बदौलत देश की झोली में कई पदक डाले हैं. शादी के बाद कोच और पति रमेश स्वामी ने भी मंजू को खेल में आगे बढ़ाने में योगदान दिया जो आज भी बदस्तूर जारी है.

बेटी हुई पर अब भी तैयारी कर रही
मंजूबाला स्वामी ने कुछ माह पहले ही बेटी को जन्म दिया है. वह अभी देश की झोली में पदक डालने के लिए गुवाहाटी में होने वाली Asian Championship के लिए पटियाला में तैयारी में लगी  हैं. छोटी बहन मुनेष बाला स्वामी भी मुक्केबाजी में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है.

जीत का सिलसिला
2005: पूना में स्कूल नेशनल प्रतियोगिता में जीवन का पहला कांस्य पदक जीता. 
2006: बेंगलुरू में जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक 
2007:विजयवाड़ा में 23वीं नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप स्वर्ण पदक,  गुंटूर में 23वीं नेशनल इंटरजोन जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक,  मदुरई में फेडरेशन कप नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक
2008: अन्नामलाई यूनिवर्सिटी चिदम्बरम में ऑल इण्डिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स चैम्पियनशिप राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक,  पूना में फेडरेशन कप नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता.  जकार्ता (लंदन) में 13वें एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में चौथे स्थान पर रही. पूना में ऑल इण्डिया इंटर स्टेट चैम्पियनशिप में रजत पदक
2010: पटियाला में ऑल इण्डिया इंटर स्टेट चैम्पियनशिप में कांस्य पदक,  रांची में फेडरेशन कप नेशनल एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक,  नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स में आठवें स्थान पर 
2011: चेन्नई में ऑल इण्डिया इंटर रेलवे चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक, रांची में 34वें नेशनल गेम में स्वर्ण पदक, बैंगलुरू में 51वें नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक, कोलकता में ओपन नेशनल में स्वर्ण पदक
2012: चेन्नई में 52वें ऑपन ऑल इण्डिया एथलेटिक्स में स्वर्ण, भुवनेश्वर में ऑल इण्डिया इंटर रेलवे  चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक, पटियाला में 16वें फेडरेशन कप नेशनल सीनियर एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक, हैदराबाद में 52वें नेशनल इंटर स्टेट सीनियर में स्वर्ण पदक. 
2013:पटियाला में फेडरेशन कप रजत पदक, बैंगलुरू में  ऑल इण्डिया इंटर स्टेट नेशनल चैम्पियनिशप में स्वर्ण पदक, पूना में एथलेटिक्स  एशियन चैम्पियनशिप में पांचवें स्थान पर रही. रांची में ओपन नेशनल में कांस्य पदक
2014: लखनऊ में ऑल इण्डिया इंटर स्टेट चैम्पियनशिप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक, पटियाला में ऑल इण्डिया फेडरेशन कप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक.
2016: इंचियोन में हैमर थ्रो में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला




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