इस लड़की को सुनिए 13 साल में 12 देशों के ACCENT में ENGLISH बोलती है

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संयोगिता कंठ:

पानीपत की रहने वाली 13 साल की जान्हवी पंवार छोटी उम्र में ही ऐसा कारनामा करती है लोग हैरत में पड़ जाते हैं.  13 साल की उम्र में वह 12 देशों के Accent में English बोलती है और जिस उम्र में बच्चे 10th भी पास नहीं करते उस उम्र में वह ग्रेजुएशन कर रही है. शायद इसलिए जान्हवी को वंडर गर्ल कहकर भी बुलाया जाता है.




जान्हवी ने बहुत छोटी उम्र में अंग्रेजी में अच्छी पकड़ बनाई है. वह भी एक नहीं बल्कि 13 देशों के Accent में. वह ब्रिटीश, फ्रेंच, जापानी, ऑस्ट्रेलियन, कैनेडियन कई एक्सेंट में इंग्लिश बोल लेती है. जापानी और फेंच तो उसे लिखना भी आता है. ब्रिटीश और अमेरिकन अंग्रेजी में क्या अंतर है वे बखूबी बताती हैं.




पेशे से शिक्षक जान्हवी के पापा बृजमोहन पंवार ने वुमनिया से बातचीत में बताया कि बेहद छोटी उम्र से उसमें सीखने की लगन थी. वह कुछ भी बहुत जल्दी सीख लेती है.  मैंने घर पर  ही उसे इंग्लिश बोलना सिखाया. कक्षा 9 में आते-आते वह धाराप्रवाह इंग्लिश बोलने लगी. उसकी अच्छी इंग्लिश देखकर हमारे एक परिचित जो न्यूजीलैंड में रहते थे उन्होंने समझाया कि अलग-अलग देशों के एक्सेंट में इंग्लिश में बात करना सिखाइए.




बस क्या था मैंने इंटरनेट की सहायाता से उसे सिखाना शुरु किया. जब कई देशों के एक्सेंट पर उसका कमांड हो गया  तो लगा कि उसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए. फिर मैंने उसे फोनोटिक्स की जानकारी देना शुरु किया. ऑनलाइन क्लासेस करवाई अमेरिका से. ऑनलाइन बहुत सारे ट्यूटरियल को देखकर वह समझने लगी.  

प्रतिभाशाली और तेज दिमाग की जान्हवी ने 11 साल में 10वीं पास की है. जब साढ़े तीन साल की तो यूकेजी में एडमिशन लिया. पढ़ाई में तेज होने के कारण उसने बहुत जल्दी आगे की कक्षाओं के कोर्स  कर लेती थी. वे बताते हैं कि जान्हवी शुरु से तेज दिमाग की थी लेकिन उसे पढ़ाने के लिए हमें कोई ढंग का टीचर ही नहीं मिलता.

जब 11 साल में उम्र में उसने 10वीं की परीक्षा देने का फैसला किया तो सीबीएसई का नियम आड़े आ गया. नियम के मुताबिक कोई भी बच्चा 14 साल में 10वीं और 16साल 12वीं की परीक्षा दे सकता है. इसके लिए जान्हवी के पापा ने सीबीएसई से स्पेशल परमिशन लिया.

जान्हवी का कहना है कि लड़कियों को समाज में आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए. जैसे मेरे पापा ने मेरा साथ दिया है और मुझे आगे बढ़ने का इतना अवसर दे रहे हैं वैसे ही हर बेटियोंं को मिलना चाहिए. 

जान्हवी एक मोटिवेशनल स्पीकर भी है. हरियाणा में नॉर्थ जोन के आईएएस की एक मीटिंग में पहली स्पीच जान्हवी ने ही दी थी. वह ग्रामीण इलाके के मैनेजमेंट के छात्रों से इंग्लिश का डर दूर करती हैं. बच्चों में इंग्लिश एक हौव्वा है जान्हवी अपने मोटिवेशनल स्पीच से बच्चों में से यह भय निकालने की कोशिश करती हैं. 

कई पुरस्कारों से सम्मानित जान्हवी न्यूज एंकरिंग करना चाहती है. हालांकि उसके पापा उसे आईएएस बनाना चाहते हैं, लेकिन कहते हैं कि इसके लिए उस पर कोई दबाव नहीं है. वह जो करना चाहे, करे. 
 
फिलहाल  जान्हवी दिल्ली यूनिवर्सिटी के सत्यवती कॉलेज से इकॉनामिक्स ऑनर्स कर रही है. वह पानीपत से रोजाना ट्रेन से सफर करके दिल्ली अपने कॉलेज आती-जाती है.आने-जाने में उसे चार घंटे लगते हैं. यह छोटी बच्ची चार घंटे की अकेली सफर करके अपनी पढ़ाई पूरी करने आती है. सुबह 6.40 की ट्रेन लेती है और शाम तक घर पहुंचती है.
 
बृजमोहन पंवार सरकारी स्कूल में प्राइमरी टीचर है. छोटी तनख्वाह है लेकिन बेटियों के सपने पूरे करने के लिए जी-तोड़ मेहतन करते हैं. जान्हवी की तरह छोटी बेटी शानवी भी ऐसे ही इंग्लिश सीखा रहे हैं. 
 
हरियाणा में बेटियों के साथ भेदभाव को लेकर एक सामाजिक धारणा बनी हुई है और बृजमोहन भी अक्सर इसके शिकार हो जाते हैं. वे बताते हैं कि उनके दोस्त, रिश्तेदार और समाज के लोग कई बार कहते हैं क्यों बेटी के पीछे इतना परेशान हो रहे हो उसे दूसरे घर ही जाना है. मैं तो बेटी को ही बेटा मानता हूं. लोग मुझे जान्हवी के नाम से जानते हैं और मैं इसमें गर्व महसूस करता हूं. 
 

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