टूटे रिश्ते और टूटे दिल को जोड़ कर चेहरे पर SMILE लाती हैं भारती गौड़

2002
भारती गौड़
संयोगिता कंठ:
जयपुर की भारती गौड़ अब तक न जाने कितने टूटे और बिखरे परिवारों को मिलवा चुकी हैं. वे लोगों के दिलों को जोड़कर उनके चेहरे पर Smile लाती हैं. मनोवैज्ञानिक भारती ‘भारत सेवक समाज’ (एन जी ओ) में परिवार परामर्शक के रूप में काम कर रही हैं. वे जिस तरह लोगों को समझाती हैं लोग अपने टूटे रिश्तों को फिर से समेटने लगते हैं. भारती इस काम में तब और ज्यादा खुशी महसूस करती हैं जब बिछड़े हुए दो दिल उनके सामने फिर प्यार से आते हैं या कड़वे अतीत भूल कर यौन शोषण का शिकार हुई बच्चियां फिर से अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरु कर सकती हैं.




परामर्श मनोविज्ञान में स्पेशलाइज़ेश्न कर चुकीं भारती समाज सेवा में लगातार काम कर रही हैं बाल परामर्श और परिवार परामर्श करने में  सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. बच्चों, विशेषकर घर से भागे हुए और विकृत और असंतुलित परिवारों से आए बच्चों को परामर्श देकर उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन देकर पढ़ाई के लिए प्रेरित करने को वे अपनी अहम जिम्मेदारी मानती हैं.




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भारती बताती हैं ऐसी बच्चियां या लडकियां जो घर या बाहर यौन अत्याचारों से पीड़ित हैं उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श देकर उन के अन्दर के विश्वास को जगाना जीने की इच्छा को फिर से जगाना यह बेहद कठिन काम है, लेकिन जब बच्चियां अपने कड़वे अतीत को भूल कर नॉर्मल जिंदगी जीने की कोशिश करती हैं तो उन्हें देखकर




उनका कहना है लेखन मेरा जुनून है. मेरा प्यार है. साहित्य में रूचि और झुकाव मेरा शुरू से ही था ये कहीं से अचानक नहीं हुआ, लेकिन हां इतना अवश्य है कि इसे रफ़्तार मैंने बाद में चलकर दी. मैं अपने साहित्यिक कार्य के माध्यम से भी समाज में परिवर्तन लाने और विसंगतियों को दूर करने का ही प्रयास करती हूं, यही वजह है कि मेरे पहले उपन्यास को एक सामजिक उपन्यास की तरह देखा गया और 2016 में मुझे ‘युवा साहित्यकार’ का पुरस्कार दिया गया.

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भारती अभी राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान जयपुर की मीडिया प्रभारी हैं. कहानी, उपन्यास  नाटक, कविता हर विधा में वे लेखन करती हैं. 2014 में उनका जाहनवी प्रकाशित हो चुका है. उनकी प्रकाशित कहानियां है- ‘और बस एक दिन यूं ही, आत्मताप पर राजनीति या राजनीति का बलात्कार (पुरस्कृत), रेड लाइट, मज़हबपरस्ती बनाम इंसानियत (पुरस्कृत) वो रात (पुरस्कृत), साये में जिंदगी (पुरस्कृत) है. जल्दी ही उनकी एक कहानी संग्रह और उपन्यास प्रकाशित होने वाली है.

उनके लेखन को पहचान के साथ-साथ कई पुरस्कार भी हासिल हुए हैं.  2015 में उन्हें श्री राधेश्याम चितलांगिया अखिल भारतीय कहानी पुरूस्कार, 2016 में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राजस्थान की ओर से लघुकथा पुरूस्कार 2016, इसी साल नारी गौरव सम्मान और 2016 समर्था साहित्य संसथान की ओर से श्रेष्ठ कहानी एवं कविता पुरुस्कार भी हासिल कर चुकी हैं.

भारती का कहना है कि नारीवाद के रूप उसकी अवधारणा, उसकी संरचना की वर्तमान दुर्दशा से मैं आहत हूं. इसका वास्तविक मकसद ही खो गया है. अब ये सिर्फ आख्यानों व्याख्यानों तक ही सीमित है और लेखकों के मनोरंजन का साधन बन गया है.

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