उसने क्यों ठुकरा दी अमेरिका की जॉब?

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Bhakti Sharma
Bhakti Sharma

कविता सिंह:

वे जब अमेरिका से वापस भारत आने की तैयारी कर रही थीं तब उन्हें दोस्तों ने बहुत समझाया था. अमेरिका की शानदार नौकरी छोड़कर भारत जाने के भक्ति के फैसले पर उन्हें हैरानी भी थी और गुस्सा भी आ रहा था, लेकिन पापा की कही एक बात उनके मन में बैठ गई थी. पापा ने कहा था बेटा देश सेवा से बढ़कर कुछ नहीं है, यहां वापस आ जाओ.




मिलिए मध्यप्रदेश के भोपाल के बरखेड़ी अब्दुल्ला पंचायत  की सरपंच हैं भक्ति शर्मा से. वुमनिया से खास बातचीत में भक्ति बताती हैं कि ‘भोपाल के नूतन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में एमए करने के बाद मैं कुछ वक्त के लिए अमेरिका के टेक्सास चली गई थी. वहां मेरे चाचा जी और परिवार के अन्य सदस्य भी रहते हैं. रिश्तेदारों ने मेरा रिज्यूम वहां की कई कंपनियों में दिया और मुझे इंटरव्यू के कॉल भी आने लगे. यह बात मैंने जब अपने पापा को बतायी और कहा कि अमेरिका में जॉब करना चाहती हूँ तो उन्होंने मुझे समझाया और कहा कि देश की सेवा से बड़ा कोई काम नहीं,  तुम यहीं के लिए काम करो.




बस यही बात मेरे मन के अंदर तक समा गई. मैं 2013 में वापस इंडिया आ गयी. मेरे दोस्तों ने मुझे कहा था, तुम बहुत बड़ी गलती कर रही हो लेकिन मैंने उनसे कहा, जिसे तुम खोना कह रहे हो उसे मैं पाना समझती हूँ. मैं उस वक्त चाहती तो लाखों का पैकेज पाकर अमेरिका में आराम से सेटल हो जाती लेकिन आज जो कर रही हूँ, उससे ज्यादा संतुष्टि मुझे किसी काम में नहीं मिलती.




भक्ति का परिवार पहले ही बरखेड़ी और आसपास के गाँवों में समाज सेवा कर रहा था. बचपन से ही उन्होंने घर में अपने दादा, पापा को गांव के हित के लिए के काम करते देखा था. इसलिए कहीं न कहीं उनके अंदर भी समाज सेवा की भावना छुपी थी. भक्ति ने वापस आकर महिलाओं के लिए काम करने वाले भोपाल के एक एनजीओ के साथ काम करना शुरू किया. तभी पंचायत चुनाव की घोषणा हुई और बरखेड़ी की सीट भी महिलाओं के लिए आरक्षित हो गयी. भक्ति ने चुनाव लड़ने का फैसला किया और फिर जीत गयी.

 

सरपंच बनते ही सबसे पहला कदम महिलाओं की बेहतरी के लिए ही उठाया था. गाँव में लड़की पैदा होने पर उन्होंने उनकी मां के लिए सरपंच मानदेय के रूप में दो महीने के लिए चार हजार रूपये के वेतन का प्रावधान देकर खूब तारीफ बटोरी थी. भक्ति बताती हैं, ‘ मैं चाहती थी कि मां बनने के बाद महिलाएं अपने खानपान पर ध्यान दें जो वे गरीबी के कारण नहीं दे पाती थीं.’

भक्ति के सरपंच बनने के बाद गाँव की तस्वीर बदल गयी है. हर ग्रामीण का राशन कार्ड बनवाया और बैंक अकाउंट खुलवा गया. इसके अलावा सोलर लाइट्स लग गयी हैं. फ्री मेडिकल कैंप समय-समय पर आयोजित की जाती है. रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर ग्रामीणों में जागरूकता आई है. दो स्टॉप डैम भी बनाये हैं. आंगनबाड़ी, इंदिरा आवास योजना और शौचालय निर्माण में भी सफलता मिली है.

 

भक्ति का अगला लक्ष्य अपने गांज को डिजिटल बनाना है. उनका कहना है सभी बच्चों का स्कूल एनरोलमेंट तो प्राथमिकता थी ही अब डिजिटल एजुकेशन पर काम करना है, बस इसके लिए फंड मिल जाये तो यह काम भी जल्दी शुरु कर दूं.

भक्ति को हाल ही में दिल्ली में एमआईटी-एसओजी की ओर से आयोजित भारतीय छात्र संसद में आदर्श उच्च शिक्षित युवा सरपंच पुरस्कार दिया गया है.  2016 में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने फेमस महिलाओं की टॉप 100 सूची में भी उन्हें शामिल किया था.

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