किस राज्य में मनाया जाता है PERIOD FESTIVAL

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Periods Festival in odisha
Periods Festival in odisha

कविता सिंह:

पीरियड्स को लेकर अक्सर जहां हमें देश के कई कोनों से आए दिन दकियानूसी किस्से सुनने को मिल जाते हैं वहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में ही एक ऐसा राज्य है जो पीरियड्स का जश्न मनाता है. जी हां, आपको यकीन नहीं होगा लेकिन ये सच है. ये अनोखा राज्य ओडिशा है जहां हर साल जून में 3 दिनों तक Periods Festival यानी मनाया जाता है. इस उत्सव को राजपर्व कहते हैं.  




क्यों मनाते हैं ये Periods Festival ?

इस उत्सव को मनाने की परंपरा पुरानी है और इसे मनाने का कारण ओडिशा के लोगों की एक मान्यता है. वहां के लोग मानते हैं कि पृथ्वी यानी भूदेवी भगवान विष्णु की पत्नी हैं. जब गर्मियों का मौसम जाता है और बारिश आने वाली रहती है तो भूदेवी को पीरियड होता है जो कि तीन से चार दिन तक होती है. इस दौरान खेतों में कटाई, बोआई या जमीन से जुड़ा कोई भी काम वर्जित कर दिया जाता है जिससे पृथ्वी आराम कर सके और इसी वजह से महिलाओं और लड़कियों को भी देवी का स्वरुप मानकर आराम दिया जाता है. उन्हें कोई कार्य नहीं करने दिया जाता और खुश रखा जाता है. 




राज पर्व के तीनों दिनों का अलग-अलग महत्व है. इस Periods Festival की सबसे खास बात ये है कि इसमें केवल वही औरतें भाग लेती हैं जो इस दौरान मासिक चक्र के दौर से गुजर रही होती हैं लेकिन यदि दूसरी महिलाएं भी इस उत्सव में शामिल होना चाहती हैं तो उन्हें मना नहीं किया जाता.




पर्व का पहला दिन होता है रज. दूसरा वाला दिन, मिथुन संक्रांति और तीसरा दिन जिस दिन पीरियड्स ख़त्म माने जाते हैं उसको बासी-रज कहते हैं. इन तीन दिनों में लड़कियां अच्छे-अच्छे कपड़े और गहने पहनती हैं. सजती हैं. मेहंदी लगाती हैं. झूला झूलती हैं. घर के काम से उनको इन 3 दिनों की छुट्टी मिल जाती है. 

अपनी सहेलियों के साथ दिन भर बैठ कर बातें करती हैं. खास बात ये है कि पुरुष भी महिलाओं को इस पर्व को भरपूर एन्जॉय करने देने का मौका देते हैं. चूकिं गांवों में खेती-किसानी इस दौरान नहीं होती इसलिए उन्हें भी भरपूर आराम करने का मौका मिल जाता है. इस फेस्टिवल की सबसे अच्छी चीज़ है खूब सारी वैरायटी का खाना भी चखने को मिल जाता है. 

ओडिशा की सबसे स्पेशल डिश पीठा है जो इस पर्व की खास डिश है. चावल के आटे से बनी हर मीठी, नमकीन डिश को पीठा कहते हैं. पोड़ पीठा, चकुली पीठा, मंडा पीठा, आसिरा पीठा. ये लिस्ट ख़त्म ही नहीं होती. रज-पर्व में सबसे ज्यादा पोड़ पीठा बनता है. रज में पान खाना भी ट्रेडिशन का एक हिस्सा है जो महिला हों या पुरुष बड़े ही चाव से इस पर्व के दौरान खाते हैं. घरों में रंगोली सजती है, झूले पड़ते हैं और हर तरफ हंसते-खिलखिलाते चेहरे ही दिखते हैं. 

ओडिशा की ही तरह देश के अन्य राज्य भी अगर पीरियड्स के प्रति इतनी उन्नत सोच रखें और इसे यूं समझें कि ये महिलाओं के नारीत्व का अभिन्न अंग है जिसके बिना दूसरे इंसान का जन्म लेना असंभव है तो लंबे समय से चली आ रही परेशानियों का आसानी से हल निकल सकता है. हम उम्मीद करते हैं एक दिन ऐसा जरूर होगा!