OPEN LETTER TO SWARA BHASKAR-स्त्री का अंग-विशेष आपके लिए घृणित है क्या?

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Open Letter to Swara Bhaskar
'Veere Di Wedding': Swara Bhaskar

अणु शक्ति सिंह:

डियर स्वरा देवी

(Open Letter To Swara Bhaskar)- क्या यह उचित रहेगा कि मैं अपने ख़त की शुरुआत इस पंक्ति से करूं कि बॉलीवुड का फेमिनिज्म लोचे वाला है. कम से कम, आपकी नयी फ़िल्म Veere Di Wedding का ट्रेलर यही बताता है.




फिल्म चार सखियों की कहानी है. इस बाबत ख़बर देख कर मैं भी फिल्म का ट्रेलर देखने का लोभ संवरण नहीं कर पायी. ट्रेलर शुरू होता है, आप आती हैं और अपने सामने वाले पुरुष को स्त्री अंग विशेष का गाली देती हैं.

Open Letter to Swara Bhaskarमुझे पहली बार लगा कि मैंने कुछ ग़लत सुन लिया है. मैंने वापस प्ले किया और फ़िर अहसास हुआ कि जो सुना था, वह ठीक ही था. यह मेरे चौंकने का वक़्त था. Swara Bhaskar किसी को स्त्री का अंग-विशेष कह कर गाली दे, इस पर मेरे अन्दर की स्त्री को सहसा भरोसा नहीं हुआ.




मुझे तब लगा कि हो न हो आप को नहीं पता कि यह शब्द ‘योनी’/ ‘वजाइना’ का शुद्ध देसी संस्करण है. हो सकता है आपके संवाद-लेखक ने अथवा आपके निर्देशक ने आपकी अनभिज्ञता का फ़ायदा उठा लिया है.

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यह सोच कर मैं आपको संशय का लाभ देने ही वाली थी कि अचानक मुझे याद आया अरे आप तो दिल्ली की पढ़ी-लिखी हैं. कोई दिल्ली वाला इस शब्द का अर्थ न जाने, यह लगभग असंभव है. देवी जी, इस बार मैं ज्यादा चौंकी.

Open Letter to Swara Bhaskar
Pic Courtesy: Youtube

इस संवाद को इस सहजता से बोलने का अर्थ यह हुआ कि स्त्रियों का अंग-विशेष या तो आपके लिए घृणित है या फिर निकृष्टतम. मगर मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि आप जैसी प्रबुद्ध स्त्री ‘योनी’ को इतना निकृष्ट कैसे मान सकती हैं कि वह उस शब्द का इस्तेमाल किसी का मान-मर्दन करने के लिए करे?




क्या योनी का होना इतना बुरा है कि किसी को नीचा दिखाने के लिए उसे ‘योनी’ कह दिया जाए? क्या आप नहीं जानतीं कि यह स्त्रियों का वही अंग है जो उन्हें स्त्री होने की लैंगिकता देता है. जिसकी उपस्थिति को गौण बनाने के लिए पितृसत्ता लगातार जुटी हुई है और बार-बार जिसकी दुहाई देकर स्त्रियों की स्वतंत्रता पर सींखचे कसे जाते हैं.

Open Letter to Swara Bhaskarदेवी जी, सिमोन से लेकर अब तक हम सब बहुत लम्बी लड़ाई लड़ रहे हैं. इस बाबत लड़ रहे हैं कि हमारे शरीर के सारे अंग उतने ही महत्वपूर्ण और समान हैं जितना हमारे शरीर में आत्मा का होना.

Anushakti Singh

मैं यह नहीं कहूंगी कि आपने इसकी लड़ाई नहीं लड़ी है. आपको अपनी फिल्म अनारकली ऑफ़ आरा की पटकथा याद है न. इसी की लड़ाई थी न कि स्त्री की योनी उसे कमज़ोर नहीं बनाती है, फिर आपने कैसे इस अंग-विशेष को गाली का दर्ज़ा दे दिया?

क्या इससे पहले आपको इसी पितृ-सत्ता के हाथों घायल हुई, क़त्ल हुई स्त्रियां नहीं याद आयीं? कमाठीपुरा, जीबीरोड, सोनागाछी और बाकी तमाम शहरों में कितनी ही अनाम गलियों में नरक होती जिंदगियां नहीं याद आयीं? फ़िर आपने कैसे इतनी आसानी से इस संवाद की अदायगी की?

Open Letter to Swara Bhaskarआप ही नहीं, आप की सह-कलाकार भी कम दोषी नहीं. उन्हें मंगलसूत्र को गाली देनी थी मगर शब्द जो मिले उससे बहन की इज्ज़त “अफजाई” हुई. वाह, फेमिनिज्म के एक पहलू की ख़ातिर दूसरे के साथ अन्याय – यह कहां का न्याय है?

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मुझे एक बात बताइए न कि क्या हमारे उत्थान से ही पूरे महिला वर्ग का उत्थान हो जाएगा? क्या ‘मां’ और ‘बहनें’ औरत होने की श्रेणी में नहीं आतीं? क्या किसी पुरुष का मां से प्रेम करना स्त्री-विमर्श के ख़िलाफ़ है?

मैं आम स्त्री हूं स्वरा जी और मुझे स्त्री-विमर्श का ‘स’ भी नहीं पता मगर आपसे उम्मीद ज़रूर करती हूं कि आप पितृ-सत्ता के खिलाफ़ अपनी लड़ाई ज़ारी रखेंगी. इस अनुरोध के साथ मेरा यह डर भी जुड़ा हुआ है कि क्या बॉलीवुड से इतनी संवेदनशीलता की अपेक्षा की जा सकती है कि वहां की कथित स्त्री-विमर्शकारिणी सिर्फ चुनींदा मुद्दों के साथ नहीं खेलेगी.

एक तरफ़ पद्मावती के मुद्दे पर खुद को योनी में सिमटा हुआ पाकर, दूसरी तरफ किसी और मर्द को ‘योनी’ होने की गाली नहीं देंगी. विशेष क्या लिखूं? बस उम्मीद भर है कि अगली बार आपके अन्दर छिपी हुई पितृसत्ता यूं किलक कर बाहर न आ जाए.

सादर.

(साभार-फेसबुक वॉल)

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