ONLINE ZINDAGI- इससे हमें सच्ची खुशियां मिलती है क्या?

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Online Zindagi

सुमन बाजपेयी:

Online Zindagi कैसे हो गई है-इन उदाहरणों से समझिए.

अभी मैं फेसबुक पर चैट कर रही हूं, अभी मैं Online हूं. “अरे मार्केट जाने की क्या जरूरत है, घर बैठे Online Shopping कर लो, मैं तो अखबार तक Online पढ़ती हूं,”  Online Zindagi का ये हाल है कि आजकल जो चाहो ऑनलाइन कर लो.




आज Online Zindagi हो गई है पूरी तरह. कोई ऐसा हिस्सा नहीं बचा है, या पल है जहां ऑनलाइन न पैठ न बनाई हो. एक तरह का ट्रेंड बन गया है  Online Zindagi रखने का.

जो खुद को इससे दूर रखते हैं उन्हें अचरज भरी नजरों से देखा जाता है और तुरंत ही आउटडेटेड होने का लेबल उन पर चिपका दिया जाता है.

भाषा की तो इसने सबसे ज्यादा दुगर्ति की ही है, साथ ही वाक्यों और शब्दों को इतना छोटा कर दिया है कि न तो उनमें भाव बचे हैं और न ही संवेदनाएं.




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बड़े-बड़े पत्र लिखने का चलन तो कब का खत्म हो चुका है, अब तो व्हाटसएप मैसेज इन थिंग हैं. शब्दों को बोनसाई का रूप दे इतनी तेजी से टाइप किया जाता है कि कई बार तो हैरानी होती है आज की पीढ़ी की इस काम में तेजी की.

सुमन बाजपेयी

भाई की जगह ब्रो और बहन की जगह सिस ने ले ली है. रिश्तों के नाम जिस तरह छोटे हो रहे हैं, उसी तरह संबंध भी संकुचित होते जा रहे हैं.

किसी के घर निमंत्रण देने जाने की जगह ई इनवाइट पापुलर हो गए हैं.  मैसेज से ही बधाई संदेश भी जाता है. Video Calling कर दुनिया के किसी भी कोने में बैठे इंसान से बात हो जाती है और मन खुश कि चलो शक्ल देख ली और थोड़ी सी एमबी खर्च कर कितनी बातें हो गईं.




“रोज तो बात हो जाती है, फिर इतनी दूर से आने की क्या जरूरत है, बेकार के पैसे खर्च हो जाते हैं. यहां तक कि घर बैठे ही बिलों का भुगतान हो जाता है. यही वजह है कि हम अपना सारा समय या तो फोन पर या लैपटॉप या डेस्कटॉप के सामने बैठकर बिताने लगे हैं, ऐसे में अपनों के लिए वक्त ही कहां बचा है?

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सुविधाएं पर गलतफहमियां भी

Online Zindagi के जरुर बहुत फायदे होंगे तभी तो लोग उसे इंजॉय करते हैं. आखिर एक बटन दबाते ही सारे काम हो जाते हैं. खाने से लेकर फर्नीचर तक घर में पहुंच जाता है.

पर सच यह भी कि इसने आपसी संवाद खत्म होने की प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है और साथ ही आपसी रिश्तों में खटास भी पैदा होने में अब देर नहीं लगती.

भला रिश्तों में फैली गलतफहमियां Online कैसे दूर हो सकती हैं. कई बार व्हॉट्सएप पर हम केवल आए हुए संदेश देखने के लिए ऑनलाइन आते हैं, लेकिन समय ना होने पर यदि हम उन मैसेजेस का जवाब ना दे सकें तो मैसेज भेजने वाला अपमानित महसूस करता है.

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ब्लू टिक से पता तो चल जाता है कि मैसेज देख लिया गया है. ऐसे में गलतफहमी पैदा होने के कारण आपसी रिश्तों में दरार पड़ सकती है. Online Zindagi जहां सारी सुविधाएं देती है, वहीं रिश्तों में ऊब भी पैदा कर सकती है.

अकेलेपन से जूझते लोग Online Dating कर रहे हैं या पार्टनर तलाश रहे हैं. अपनी पहचान छुपाकर वे इस माध्यम से अपने मन को बहलाने की कोशिश में लगे हैं, पर हम यह क्यों भूल रहे हैं कि Online Zindagi लाइक्स तो दे सकती है, पर किसी के लिए सच्ची लाइकिंग पैदा नहीं कर सकती.

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