NATIONAL BRAVERY AWARD पाने वाली इन बहादुर लड़कियों के किस्से सुनकर दंग रह जाएंगे

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National Bravery Award
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मिलिए National Bravery Award पाने वाली उन लड़कियों से जिसने दूसरों की जान बचाने और समाज की रक्षा के लिए अपने जान की भी परवाह नहीं की. इस साल 18 बच्चों को वीरता पुरस्कार से नववाजा जा रहा है इनमें 7 लड़कियां और 11 लड़के है.

National Bravery Award
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हर बहादुर बच्चे की कहानी प्रेरणादायक है और हर कहानी बताती है कि साहस दिखाने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखता . इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर की ओर से दिए जाने वाला यह पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 जनवरी को बच्चों को प्रदान करेंगे.




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यहां हम बात करते हैं ऐसे ही कुछ बहादुर लड़कियों की…

1- नेत्रावती एम चव्हाण

कर्नाटक की 14 साल की नेत्रावती एम चव्हाण अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन अपनी बहादुरी के किस्से को उसनेअमर कर दिया है. नेत्रावती ने तालाब में डूबते बच्चों को बचाने में अपनी जान गंवा दीं. उन्हें मरणोपरांत ‘गीता अवार्ड’ से सम्मानित किया जाएगा.




2-ममता दलाई

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ममता दलाई

ममता की उम्र महज 6 साल 8 महीने की है लेकिन उसका साहस की कहानी सुनकर कोई भी दंग हुए बिना नहीं रह सकता. ममता ने बेहद कम उम्र में अद्भूत साहस का परिचय देते हुए एक मगरमच्छ के मुंह से अपने साथी की जान बचा ली.

6 अप्रैल 2017 का दिन था. ओडिशा के केंद्रापाड़ा जिले की ममता और उसकी साथ आसंती पास के तालाब में नहाने गई. सभी इस बात से अंजान थे तालाब में एक मगरमच्छ उनका इंतजार कर रहा है. नहाते हुए अचानक मगरमच्छ ने आसंती का हाथ अपने जबड़े में दबा लिया.

अपनी साथी की जान खतरे में देखकर भी ममता ने अपना सूझबूझ नहीं खोया और आसंती का हाथ पकड़े रहा. वो जोर से चिल्लाती रही, उसके चिल्लाने से मगरमच्छ की पकड़ ढीली हो गई. इस तरह ममता अपनी साथी को बचाने में कामयाब हो गई.

3-नाजिया

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नाजिया

भारत पुरस्कार विजेता उत्तर प्रदेश की नाजिया की उम्र अभी बेशक छोटी है लेकिन उसके हौसले ने अपराधियों को भी हैरान कर दिया. 16 साल की नाजिया ने जुए और सट्टेबाजी का अवैध धंधा करने वालों को पकड़ने में उत्तर प्रदेश पुलिस की मदद की.

नाजिया आगरा की रहने वाली है. उसके पड़ोस में कई दशकों से जुए और सट्टे का अवैध व्यवसाय चल रहा था. नाजिया ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, सबूत जुटाए और 13 जुलाई 2016 पुलिस में शिकायत की. नाजिया की पहल पर चार लोगों की गिरफ्तारी हुई और यह धंधा बंद हो गया लेकिन इसका खामियाजा उसके पूरे परिवार को उठाना पड़ा.

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उसके परिवार वालों को सताया गया. नाजिया की पिटाई की गई और उसका स्कूल आना-जाना बंद हो गया. कहीं से कोई मदद नहीं मिलने पर नाजिया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ से मदद मांगी और उसके बाद उस पर कार्रवाई हुई.

4-लक्ष्मी यादव

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लक्ष्मी यादव

छत्तीरसगढ़ की राजधानी रायपुर की लक्ष्मी यादव ने यदि उस दिन अपना साहस नहीं दिखाया होता तो न जाने उनके साथ क्या अनहोनी हो जाती? 2 अगस्त 2016 को लक्ष्मी अपने एक साथी के साथ गणेश नगर इलाके में खड़ी थी.

तभी तीन बदमाश वहां पहुंचे. दोनों के सात मारपीट की और जबरदस्ती लक्ष्मी को अपने साथ बाइक पर बिठा पर एक सुनसान स्थान पर लेकर गए.

उस आपात घड़ी में लक्ष्मी ने अपना साहस नहीं खोया, किसी तरह बाइक की चाभी छुपाई और वहां से भाग निकली. किसी तरह थाने पहुंची और अपनी आपबीती वहां सुनाई. पुलिस तुरंत हरकत में आई और तीनों अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया.

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