करोड़पति होकर भी छोले-कुल्चे क्यों बेचना पड़ता है?

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उर्वशी करोड़पति महिला
उर्वशी करोड़पति महिला

हमारे हाथ में कोई हुनर है, हम उसे निखारना चाहते हैं लेकिन फिर सोचते हैं लोग क्या कहेंगे? लोगों की सोच कर हम न तो अपने हुनर को निखार पाते हैं और न अपनी क़ाबलियत किसी को दिखा पाते हैं, लेकिन गुरुग्राम की उर्वशी ने ऐसा नहीं सोचा. उन्होंने किसी की परवाह नहीं की. सोचा तो केवल अपने वर्तमान और भविष्य को और निकल पड़ीं ऐसे रास्ते पर जिसके बारे में सुनकर आप को भी हैरानी होगी.




उर्वशी करोड़पति महिला हैं, उनके एक घर की कीमत ही तीन करोड़ है, एक एसयूवी है, आर्थिक रुप  से संपन्न है लेकिन पति को गंभीर बीमारी हुई तो अपने पैरों पर खड़े रहने के लिए छोले-कुल्चे बेच रही हैं. वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती हैं. पति बीमारी के कारण काम करने में असमर्थ हो गए, परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी तो पेशे से टीचर उर्वशी ने अपनी जॉब छोड़ दी क्योंकि वह जानती थीं कि टीचिंग से घर की आर्थिक जरूरत पूरी नहीं हो पाएगी.




उर्वशी करोड़पति महिला selling chhole kulche
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उर्वशी खुद को एक अच्छा कुक मानती हैं इसलिए जब कुछ करने का सवाल आया तो उन्होंने  छोले-कुल्चे का ठेला लगाने के बारे में सोचा . उर्वशी के सिर्फ घर की ही कीमत करीब तीन करोड़ रुपए है, लेकिन फिर भी उर्वशी का मानना है कि यह घर उनका नही उनके ससुर का है. वह अपने अच्छे दिनों में खरीदी चीजों को बुरे वक्त में ना बेचकर खुद अपने बच्चों का भविष्य बनना चाहती है.




उन्हें करोड़पति कहलाना अच्छा नही लगता. वह परिवार के लिए खुद कुछ करना चाहती थीं. उन्होंने किसी के सामने हाथ फैलाने से अच्छा खुद कुछ करना समझा. इसके बाद उन्होंने अपने पति से बात की और फिर गुरुग्राम की एक मार्केट में 16 जून 2016 से एक ठेला लगाना शुरु कर दिया.

उर्वशी करोड़पति महिला
उर्वशी करोड़पति महिला

अपने पति,ससुर और बच्चों के साथ रहने वाली उर्वशी अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाती हैं. उनके दोनों बच्चे गुरुग्राम के नामी स्कूल में पढ़ते हैं. बच्चों को तैयार कर स्कूल भेजती है और फिर रेहड़ी लगाकर छोले कुल्चे बेचती हैं. उर्वशी का सपना एक दिन बड़ा रेस्टोरेंट खोलने का. वैसे एक-दो महीने से नोटबंदी के कारण उनका बिजनेस थोड़ा ढ़ीला चल रहा है पर उनका मानना कि जल्द ही दिन बदल जाएंगे.

वे कहती हैं कि तक़लीफें और इम्तिहान तो हर किसी की जिंदगी में आता है, लेकिन आगे बढ़ना ही जिंदगी का दूसरा नाम है. वे कहती हैं “जब तक जान में जान में जान है किसी के आगे भीख नही मांगूंगी, चाहे भूखा सोना पड़े. तो दोस्तों जब भी गुरुग्राम की तरफ एमजी रोड पर जाएं तो उर्वशी के हाथ के छोले-कुल्चे खाना ना भूलें.

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