मुझ पर चढ़ा तेरे प्यार का रंग

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होली

शालिनी:

जब से उनसे प्यार हुआ था दोनों कभी होली में एक- दूसरे से दूर नहीं रहे. दूसरों की तरह उनके मन में भी होली के त्यौहार को लेकर उल्लास रहता, खूब मस्ती करते, लेकिन उससे भी ज्यादा था एक-दूसरे की चाहत और प्रेम का जो पक्का रंग जो उनके ऊपर चढ़ चुका था वे उसकी मदहोशी में रहते. वे उसे लाल गुलाल लगाते तो वो कहती थी अपने रंग में रंग ले मुझको और वे प्यार से उसे अपने सीने से लगाते हुए कहते हम तो तुम्हारे रंग में रंग गए हैं..




लेकिन इस बार उनके बिना है उसकी यह होली. उसका प्यार इस बार उससे दूर है. तीन साल के लिए उनकी पोस्टिंग जकार्ता में हो गई है. घर-मोहल्ले सब जगह लोग होली की तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन उसे तो ऐसा लग रहा है जैसे उसके जीवन में कोई रंग ही नहीं बचा. मुझे नहीं पता था कि प्यार के रंग के बाद किसी रंग का कोई मायने नहीं रह जाता.




 

होली में विरह क्या होता है उसकी पीड़ा क्या होती है ये वही जाने जिसने प्यार किया हो, वो अक्सर ऐसा कहकर मुझे ताने मारते रहती है. उसका दिल बहलाने की कोशिश बहुत करती हूं लेकिन उसके चेहरे की उदासी जाती नहीं. ये होली क्या आई उसके चेहरे पर उदासी और निराशा ले कर आई.




 

होली का दिन आ गया था, वह खामोश थी. मैं सुबह ही उसके घर पहुंच गई तो देखा चुपचाप मां के साथ किचन में हाथ बंटा रही थी. कहा-चलो होली खेलते हैं लेकिन वह मना करने लगी. अब तक कुछ और सहेलियां उसके घर पहुंच गई, सब उससे बाहर निकलने की जिद करने लगे, लेकिन उसे भरे आंसू से कहा-उनके बिना होली नहीं खेल पाऊंगी. हम उसे समझाने में लगे थे लेकिन उसके आंसू रुक ही नहीं रहे थे. उसके चेहरे पर विरह की तड़प साफ देखी जा सकती थी. तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी. उनका ही फोन था. वो मारे खुशी के हलो बोलते-बोलते रो पड़ी. पता नहीं दोनों की फोन पर क्या बातें होती रहीं, थोड़ी देर में वो आंसू पोंछते हुए बाहर आई और मुस्कुराते हुए कहने लगी-चलो होली खेलते हैं.

उसके प्रेम की शिद्दत देखकर इतना कह सकती हूं कि होली या दीवाली किसी त्यौहार या किसी भी मौके पर अपने प्रियतम से दूर रहने का दंश किसी को नहीं झेलना पड़ा.

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