#MYFirstBlood-खेलना-कूदना, बाहर निकलना सब बंद करवा देते मानो CURFEW लग गया हो

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Curfew

#MyFirstBlood कैंपेन की 13वीं कड़ी में आज बात उनकी जिन्होंने अपनी पहचान नहीं बताई लेकिन अपनी बात कहना चाहती हैं. वाराणसी के सेवापुरी के पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय बालिका महाविद्यालय की छात्राओं ने इस विषय को बेहद शर्म और झिझक का मामला बताते हुए जब पीरियड होने लगा तो हमारा खेलना-कूदना और बाहर निकलना सब बंद करवा देते. ऐसा लगता मानो Curfew लग गया हो. 




स्वाति सिंह:

मौका मिला इस महाविद्यालय की छात्राओं के साथ माहवारी पर बात करने का. कार्यक्रम की शुरुआत में गीता मैडम ने छात्राओं को संबोधित किया और कार्यक्रम के दौरान खुल कर अपने विचार रखने को प्रोत्साहित किया. लेकिन उनमें एक हिचक और शर्म बनी रही.

मैेने बातचीत में धीरे-धीरे उन्हें सामान्य किया. फिर वे इसमें सक्रिय भागीदारी लेने लगीं. पीरियड से जुड़े भ्रांतियों के बारे में कई सवाल पूछे और अपने अनुभव भी साझा किया.




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ज्यादतर लड़कियों ने अपने अनुभव में बताया कि जब पहली बार उन्हें पीरियड आया तो उन्हें घर में बताया गया कि पूजा नहीं करना और अचार नहीं छूना साथ ही उनके खेलने- कूदने और बाहर निकलने पर भी रोक लगा दी जाती. ऐसा हर महीने चार-पांच दिन चलता. हम स्कूल भी नहीं जाते. लेकिन हमें समझ ही नहीं आता कि ऐसा क्यों हो रहा है? पर हमें कोई कुछ नहीं बताता.




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मैंने उन्हें मासिकधर्म सम्बन्धी महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जानकारी दी और बताया कि इस दौरान साफ-सफाई रखना क्यों जरुरी है? उन्हें मासिकधर्म से जुड़ी बीमारियों और इस दौरान खास खानपान का ध्यान रखने के बारे में भी बताया गया.इसके साथ महिलाओं को कॉटन के कपड़ों की अपसाईकलिंग करके हैंडमेड कॉटन सेनेटरी बनाने जी जानकारी भी दी गयी. छात्राओं में माहवारी पर केंद्रित जानकारी पत्र ‘स्वस्थ्य पन्ना’ का भी वितरण किया गया.

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