#MYFirstBlood-GRAND MOTHER ने बोला किसी को बताना मत कि तुम्हारा पीरियड शुरु हो गया…..

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Grand Mother
कंचन सिंह

पीरियड पर आधारित हमारे कैंपेन #MYFirstBlood के चौथे दिन आज पढिए कंचन सिंह के अनुभव.

कंचन सिंह:

मेरी उम्र 24 साल है.  मैं बिहार के एक गांव से संबंध रखती हूं. आज से 12-13 साल पहले जब मेरा पहला पीरियड आया था तो मैं डर गई कि कि मेरे साथ ये क्या हो गया? मैंने जब इस बारे में Grand Mother (दादी) को बताया तो उन्होंने मुझे सख्त हिदायत दी-यह बात किसी को बताना मत कि तुम्हारा पीरियड शुरु हो गया है.




मेरे पीरियड का पहला अनुभव ही यही थी कि इसे मुझे सबसे छुपा कर रखना था. हमारे समाज में इसे छुपा कर रखने की प्रथा है. यानी किसी के सामने कुछ प्रकट मत करना और किसी को इसकी भनक मत लगने देना.

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हम किसी से भी इस बारे में खुल कर बात भी नहीं कर सकते थे कि यह क्या है, क्यों हो रहा है और क्यों आता है?  बेशक पेट में दर्द हो रहा है या ब्लीडिंग बहुत हो रही हो खुद ही जूझना पड़ता इन चीजों से.

‘चुप्पी रखने’ के अलावा हमारे समाज में पीरियड के नाम पर बहुत अंधविश्वास फैला हुआ है और लड़कियां इसे मानने के लिए मजबूर हैं क्योंकि उनके घरवाले जिसमें मां, चाची, बूआ, दादी-नानी शामिल होती हैं वे ऐसा करने के लिए मजबूर करती हैं.




हमारे यहां कहा जाता है कि पीरियड हो जाए तो अचार मत छूओ क्योंकि वो खराब हो जाएगा. हमें किचन में जाने से मना किया जाता है. कहा जाता है इस दौरान यदि हम खाना बनाएं तो वह अशुद्द हो जाएगा.

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हमें किसी भी तरह के पूजा- पाठ में भाग लेने की इजाजत नहीं होती. मंदिर जाने, पूजा करने या पूजा का सामान तक छूने से सख्त मना किया जाता है. यदि घर में पूजा का आयोजन होता है और हम उसमें हिस्सा नहीं लेते हैं तो हमारे चुप रहने के बाद भी दूसरों को आसानी से पता चल जाता है कि हमारा पीरियड चल रहा है.




पीरियड के दौरान हमारे समाज में लड़कियों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है मानो वह अछूत हो गई है. उसे सोने के लिए अलग बेड दिया जाता है. इस दौरान शरीर को ज्यादा साफ-सुथरा रखने की जरुरत होती है लेकिन हमें नहाने से मना किया जाता है.

मुझे खुशी हो रही है कि  मैं मुहीम और वुमनिया के #MyFirstBlood कैंपेन का हिस्सा बनी हूं और मुझे उस बारे में बोलने का मौका मिला है जिस पर हमें चुप रहना सिखाया जाता है. हर मां और दादी-नानी को ध्यान रखना चाहिए कि यह विषय बेटी को चुप कराने का नहीं है बल्कि इस पर बेटियों से विस्तार से बात करनी चाहिए.

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