इस RICKSHAW की सवारी की है क्या?

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लकी:

सभी के लिए अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता. सभी के हौसले इतने बुलंद नहीं होते. कठिनाईयों  में कोई किसी का साथ नहीं देता, यहां तक की परछाई भी साथ छोड़ देती है…ऐसे विषम परिस्थितिओं में खुद पर भरोसा ऱखना कोई रघुवीरी से सीखे. रघुवीरी दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में इकलौती महिला ई-रिक्शा चालक है. वे 36 साल की है, राजस्थान के भरतपुर से है. 2014 से ई-रिक्शा चला रही है. उनके पति एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे तब मजबूरन घर चलाने के लिए उन्हें घर से बाहर निकलना पड़ा. जो ईरिक्शा उनके पति चलाते थे उसी में रघुवीरी को सहारा नज़र आया. घर की जिम्मेदारियों में पति का साथ देने के लिए वे निकल पड़ीं ऐसी राह पर जहां शुरुआत में कदम-कदम पर उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा.




रघुवीरी को रिक्शा चलाते देख  कई महिलाएं रिक्शा चलाना चाहती हैं और  वे कहती हैं उनको रिक्शा चलाते देख उनके इलाके की कई जरुरतमंद महिलाएं अपने इलाके में ई-रिक्शा चलाना चाहती है वे इसे सीखना चाहती हैं पर अपने घर वालों के तैयार नहीं करने के कारण ऐसा नहीं कर पा रही  हैं. वे कहती हैं सबको वैसे पति नहीं मिलते जैसे कि मेरे पति हैं. वे मुझे हौसला देते हैं.




वे सुबह 9  बजे से दोपहर के एक बजे तक रिक्शा चलाकर घर लौटती हैं क्योंकि उन्हें घर की जिम्मेदारियां भी पूरी करनी होती है.  घर का काम खत्म करने के बाद  वे दोबारा 3 बजे से  शाम 7 बजे तक रिक्शा चलाती हैं.  उनके रिक्शा में आदमी और महिलाएं दोनों ही सवारी करती हैं. कई बार मनचले किस्म के इंसान भी उनके रिक्शा में बैठ जाते हैं लेकिन उन्हें ऐसे लोगों से निपटना आ गया है. अपनी सुरक्षा की चिंता भी रहती हैं इसलिए भीड़भाड़ इलाके में ही रिक्शा चलाती हैं.




शुरु में पुरुष रिक्शा चालक उन्हें हैरत और व्यंग्य की दृष्टि से देखते थे लेकिन वे इस की परवाह किए बिना अपने काम पर ध्यान रखतीं. धीरे-धीरे पुरुष रिक्शा चालकों के बीच में भी उनके प्रति सम्मान कायम होने लगा. उनके संघर्ष और जज्ब़े को देखकर रिक्शे में बैठने वाली सवारी भी अक्सर उनके प्रति सम्मान जाहिर करती है. रघुवीरी रिक्शा चलाकर रोजाना तीन सौ से पांच सौ रुपए कमा लेती हैं. अपने पैरों पर खड़े होना ही उनकी सबसे बड़ी कमाई हैं.

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