HOUSEWIFE हूं, पर अपनी पहचान को चारदीवारी में कै़द नहीं होने दिया

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Housewife
मनीषा गुप्ता

मनीषा गुप्ता:

मेरी यह कहानी पढ़िए, शायद आपमें से बहुतों के काम आ जाए.  हम महिलाओं में बहुत कुछ करने की क्षमता होती है लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के दबाव, सही राह और जानकारी नहीं मिल पाने के कारण हम अपने अंदर के हुनर को तिलांजलि दे देते हैं. मैं भी एक Housewife हूं. छोटे से शहर ऋषिकेश से हूं जहां आगे बढ़ने के रास्ते उतने सरल नही पर मेरे अंदर कुछ करने की ललक हमेशा मुझे कचोटती रही.




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एक धुन हमेशा लगी रही कि अपनी पहचान को चार दिवारी तक ही सीमित नहीं रखना है. खुद को साबित करना है और इसी जज्बे ने मुझे हारने नही दिया.  मुझे कम्प्यूटर का बिल्कुल ज्ञान नही था. बच्चों से खोलना बन्द करना सीखा फिर जब भी खाली वक्त मिला वेबसाइट ढूंढती रहती की कहीं तो कुछ मिले.




आखिर एक दिन एक प्रकाशन के वेबसाइट पर मेरी नजर पड़ी. नंबर ले उनको कॉल किया और इस तरह उनके पेपर से अपना सफर शुरु किया ब्लॉग और पेज पर लिखा. ऑनलाइन कांपटीशिन सब घर बैठे जीतती और आज उस सफर में काफी आगे बढ़ चुकी हूं. देश विदेश में मेरा लेखन पढा और सराहा जाता है. 

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कहते है हौसले बुलंद हो तो परवाज़ों में भी ताकत आ जाती है. यही ताकत मुझमें आ गई थी. समाज में औरतों की स्थिति देखती तो मेरा मन कचोटता. वैसे तो समाज इन बातों से वाकिफ था लेकिन अपने मन की बात रखने के लिए मैंने 2013-14 में 2 किताबें लिखी  #औरत दास्तां दर्द की और  #जिंदगी कैसी है पहेली. मुझे इस किताब पर भी पाठकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली.  




 
धीरे धीरे किताब लोगों तक पहुंची और मुझे बधाईयां मिली जो मेरे सपनों की उड़ान में चार चांद लगा गई. मेरी खुशी और तब बढ़ गई जब 2017 में मेरी यह दोनों किताबें भारत सरकार ने 25 लाइब्रेरी के लिए चुनी गई जिसने फिर एक बार साबित कर ही दिया
 
“औरत तू कमजोर नही
तू तो एक ऐसी शक्ति है
अपनी पर जो आ जाए 
ब्रहमांड हिला सकती है “
 
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