JEANS में हिप्स का भारी दिखना क्या लड़कों के लिए OPEN INVITATION होता है?

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Medini Pandey
मेदिनी पांडेय:

आप इसे उदारता कहें या कायरता, पर पहली बार में मैंने त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी और हिंसक भाषा के साथ कभी नहीं. आज भी यही हुआ. मैं Jeans में थी. रोड साइड पर चूड़ियां नापते हुए हिप्स पर किसी का हाथ जोर से लगा. मुड़कर देखा तो वह लड़का मुझे देखे जा रहा था. मुझे लगा कि शायद वह सॉरी कह रहा है कि हाथ गलती से लग गया. इसलिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.  

उसके लिए मेरी ये प्रतिक्रिया यकीनन कायरता थी क्योंकि कुछ देर बाद वह पूरी निर्भीकता से मेरे हिप्स को दबाते हुए आगे बढ़ जाता है. इस बार नहीं रुका गया मुझसे. कुछ तेज गति से मैं आगे बढ़ी और उसे पीछे से धक्का देकर रोक कर सुनाया कि “पहली बार में रियेक्ट इसलिए नही किया क्योंकि कई बार कुछ ठीक लड़के अनजाने में हुई गलतियों के बुरी तरह शिकार हो जाते हैं”. यह सुनकर लड़का भाग गया. मैं पीछे से चिल्लाती हूं. अच्छी खासी भीड़ इकठ्ठा हो गई. चूड़ी वाला आगे बढ़कर आता है और कहता है “एक दो बुरे लड़कों की वजह से हम जैसे बहन बेटियों वाले शर्मिंदा होते हैं”. एक आंटी भी बोल पड़ती हैं “बेटी तुमसे एक बात कहूं? भारी शरीर है तुम्हारा जीन्स मत पहना करो”.




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आंटी खुद को मेरी शुभचिंतक समझकर ये सलाह दे रही होंगी. उनकी विनम्रता के कारण मैं उनपर नही चिल्ला पाई लेकिन लड़के की छेड़छाड़ से ज्यादा मेरा आत्म आंटी की सलाह से आहत हो गया. मैं ज्यादा कुछ नही कह पाई, सिवाय इतने के “आंटी आपकी इस उम्र में मैं आपको अपनी मानसिकता के लिए बिलकुल कन्विंस नही कर पाऊंगी, आपकी सोच एकदम पक्की हो चुकी है, फिर भी सलाह के लिए शुक्रिया.” 

मैं क्या कहना चाहती हूं आंटी को? यही कि जब तक आप किसी लड़की के साथ हुई छेड़छाड़, बलात्कार आदि में लड़कियों को सलाह देना और उनकी गलतियां निकालना बन्द नही करेंगे तब तक ये दुर्घटनाएं बन्द नही होंगी. लड़कियों को सलाह देने का मतलब क्या है यह समझाना कि लड़कों की तो प्रकृति ही छेड़छाड़ करने की होती है, तुम ही थोड़ा सम्भलो. यकीनन परहेज इलाज से बेहतर होता है पर किस स्थिति में? जब मामला स्वस्थ हो लेकिन जब यह बीमार हो जाए तो इलाज की ज़रूरत है, प्रवचन की नहीं.

Jeans में हिप्स का भारी दिखना लड़के को खुला आमंत्रण नही था. मैं निःवस्त्र भी चलती हूं तो किसको अधिकार मिल जाता है मेरे शरीर से छेड़ छाड़ करने का? मैं तो इस विचार पर चलने वाली हूं कि मेरा नग्न होना मेरे चरित्र (चरित्रहीनता) का परिचायक नही बल्कि तुम्हारे चरित्र का निकष है. मेरा चरित्र इतना छोटा नही कि नग्न होने भर से मैं उससे हीन हो जाऊं. तो हमे चरित्र सम्भालने की सलाह मत दीजिए. कपड़े हमारे चरित्र से ज्यादा आराम का मामला है कि हम क्या पहनें?

आपको ये समझने में अभी सदियां लगेंगी कि बलात्कार अपने यौगिक अर्थ में बल (जबरन) से किया गया कार्य है. आप इसे रेप मात्र के तौर पर जानते हैं. नही तो मैं यौगिक के अर्थ में समझिए कि “जिस तरह शरीर से जबरन कपड़े उतारने को आप बलात्कार कहते हैं उसी तरह शरीर पर जबरन कपड़े लपेटने को भी बलात्कार कहा जाएगा”
खैर छोड़िये…

 

 

 
 

 

(साभार-फेसबुक वॉल)




 

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