CHILD ABUSE का शिकार हुई लेकिन क्यों नहीं कह पाई किसी से?

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Medini Pandey child abuse
Medini Pandey

मेदिनी पांडेय:

मैं वही लड़की हूं. पंजाबी बाग के बस स्टैंड पर जिसकी सलवार का नाड़ा अचानक टूट गया था और वह भयंकर असहज हो गयी थी. पहली बार पीरियड्स होने पर ये बात मम्मी तक से छुपा ली थी खुद से ये कहकर कि “मैं खुद इसे सम्भाल लूंगी” पर असल कारण तो मम्मी के आगे इस बात को कबूल न करके शायद इस बात को नकारना था कि “अब तो हर महीने यही होने वाला है”. वही हूं जिसने अपने साथ Child Abuse को घरवालों से शर्मिंदगी के कारण कभी छुपा लिया था जबकि मैं बड़े लाड़ प्यार में पली थी और बड़े भरोसेमंद माहौल में रही थी फिर भी नही कह पायी थी.




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वही हूं जो कॉलेज से गांधी स्मृति ट्रिप पर गयी थी और एक ही जगह बैठी रही सिर्फ इसलिए कि हल्के रंग के सूट पर गाढ़े रंग का लाल दाग लग गया था. वही हूं जो कभी वीट हेयर रिमूवल खरीदने दुकान पर तो गयी लेकिन पुरुष दुकानदार को देखकर बिना लिए ही झिझक में वापस आ गयी थी एक गैर ज़रूरी हेयर क्लिप लेकर. वही हूं जो अपने पहले प्रेमी के लिए गुलाम की तरह थी. जहां निर्णय का कोई भी अधिकार मेरे पास नही था.

वही हूं जो हर वक़्त इस बात को लेकर चौकन्ना रहती थी कि कहीं किसी लड़के के साथ मेरा नाम घर पर सुनने में न आ जाए.  वही हूं जिसने पहली बार पॉर्न देखने के लिए पहले अपनी सहेली को मनाया कि वह अपने बॉयफ्रेंड से अपने फोन में लेकर आए. ये बात अपनी बड़ी बहन से भी महीनों बाद शेयर की कि “मैंने पॉर्न देखी”.




लेकिन अब…. वो हूं जो जीन्स की खुली ज़िप भी बड़े आराम से क्लास में खड़ी होकर बन्द कर चुकी है. वो हूं जो भाई के साथ डेंगू के चेकअप के लिए गयी थी तो डॉ पूछ बैठे “पीरियड्स रेगुलर हैं?” और जब बड़ा भाई ये सवाल सुनकर वहां से हटने लगा तो मैंने ही हाथ पकड़कर रोक लिया था ये सोचकर कि “अपने खुद के भाई के आगे सहज नही रहूंगी तो और किसके सामने सहज रहूंगी. फिर पीरियड्स पर ही डॉ ने कई सारे सवाल पूछे और बड़े सामान्य रूप से मैंने उसका जवाब दिया.

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वो हूं, जिससे मम्मी ने पूछा कि मूड क्यों ख़राब है तो मैं खुलकर बता पायी कि “मेट्रो में एक लड़का इरेक्ट लिंग को मुझसे टच कराने की कोशिश कर रहा था, झाड़ तो दिया उसको लेकिन झाड़ भर देने से तो मन शांत होता नही न”. वही हूं जो चाइल्ड एब्यूज होने के बाद भी आज कुंठित नही है. वो हूं जो अचानक शुरू हुए पीरियड की वजह से चेयर पर लग गए खून को बड़ी सहजता से बीसों लोगों की उपस्थिति में साफ़ कर के क्लास से निकली. वो हूं जो H.C.G टेस्ट किट और कंडोम बस उन्हें देखने की जिज्ञासा के कारण तीन पुरुष दुकानदारों से खरीद लायी.




वो हूं जो प्रेमी को भी हर अधिकार देना नागवार समझती हूं, जहां मालिक मजदूर का सम्बन्ध नही बल्कि समानता का सम्बन्ध है. वो हूं जो In a relationship का स्टेटस पब्लिकली बड़ी सहजता से डाल सकती हूं और घर में खुलकर अपने प्रेम सम्बन्ध पर बात कर सकती हूं. वो हूं जो अब सेक्स पर आधारित जानकारियों वाली किताबें खुद खरीद कर लाती हूं और मम्मी को भी सलाह दे देती हूं कि “खाली समय में देख लिया करो इन किताबों को”.
ये क्या है? शायद इसे सहजता कहते हैं.

 

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